बासमती धान के स्वीकृत क्षेत्र का दायरा स्थिर रखने का आग्रह
06-Jul-2026 01:13 PM
अमृतसर। वर्तमान समय में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू कश्मीर के दो जिलों में उत्पादित होने वाले लम्बे दाने के सुगंधित धान (चावल) को ही वास्तविक बासमती की मान्यता प्राप्त है और इन राज्यों के उत्पादक तथा निर्यातक चाहते हैं कि इस क्षेत्रफल के दायरे में किसी ओर इलाके को शामिल न किया जाए।
वैसे भी बासमती की इतनी ज्यादा किस्मों की खेती भारत में पहले से ही हो रही है कि बाजार में दुविधा या असमंजस का माहौल बना रहता है। मामले की जटिलता को देखते हुए केन्द्र सरकार इस सूची को छोटा करने पर विचार कर रही है। उधर मध्य प्रदेश बार-बार दावा कर रहा है कि राज्य में उत्पादित लम्बे दाने वाला सुगंधित बासमती श्रेणी का है और उसे इसकी मान्यता दी जानी चाहिए। मध्य प्रदेश के इस दावे के कारण मामला और भी पेचीदा हो गया है।
अमृतसर स्थित संस्था- पंजाब राइस मिलर्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन अब केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री से इस बात का ठोस आश्वासन चाहता है कि न तो बासमती की सूची में कोई नया नाम शामिल किया जाएगा और न ही इसके परम्परागत उत्पादन क्षेत्र में किसी नए इलाके को जोड़ा जाएगा।
एसोसिएशन का कहना है कि बासमती चावल की जिन किस्मों एवं श्रेणियों को भौगोलिक संकेतक का दर्जा प्रदान किया गया है उसे ही बरकरार रखा जाए और इसमें कोई नया नाम या क्षेत्र शामिल न किया जाए क्योंकि इससे अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में समस्या और कठिनाई बढ़ सकती है। सरकार को तत्काल इस मुद्दे पर सभी सम्बद्ध पक्षों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए ताकि मामले को तूल पकड़ने से पहले ही समाप्त किया जा सके।
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री को भेजे एक पत्र में एसोसिएशन के निदेशक ने कहा था कि मध्य प्रदेश को बासमती जीआई एरिया के अंतर्गत शामिल करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं होगा और इससे भारतीय बासमती के निर्यात पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजार में भारतीय बासमती की पैठ बहुत गहरी हो चुकी है। यह विरासत और परम्परा का प्रतीक बना हुआ है इसलिए इसकी साख प्रतिष्ठा एवं विश्वसनीयता पर कोई आंच नहीं आने देना चाहिए।
