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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:34:09 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी के उत्पादन का सीजन नियत समय से पूर्व ही समाप्त]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। गन्ना की पैदावार से सम्बन्धित सरकारी अनुमान से संकेत मिल रहा था कि 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में कम से कम मध्य मई तक चीनी के उत्पादन का सीजन बरकरार रहेगा मगर वास्तविक हालत यह है कि उत्पादन का सीजन अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही लगभग समाप्त हो गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">मध्य अप्रैल तक 18-20 इकाइयों में गन्ना की थोड़ी-बहुत क्रशिंग हो रही थी और माना जा रहा है कि शीघ्र ही वे मिलें भी बंद हो जाएंगी। अप्रैल का अंत गन्ना क्रशिंग का भी अंत होगा।&nbsp;</span></p><p>महाराष्ट्र-कर्नाटक एवं तमिलनाडु-तेलंगाना में इस बार चीनी का उत्पादन पिछले सीजन से बेहतर रहा जबकि उत्तर प्रदेश, गुजरात एवं बिहार सहित अन्य राज्यों में उत्पादन की स्थिति कमजोर रही। हालांकि कुल मिलाकर राष्ट्रीय स्तर पर चीनी के उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन यह पहले लगाए गए अनुमान से काफी कम है। </p><p>जुलाई-अगस्त में उत्तरी कर्नाटक एवं तमिलनाडु में गन्ना क्रशिंग का विशेष सत्र आयोजित होगा और उसमें करीब 3 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का&nbsp; अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बावजूद 2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में चीनी का कुल उत्पादन 280 लाख टन तक पहुंचना मुश्किल लगता है जबकि पहले 309.50 लाख टन का अनुमान लगाया गया था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31692</guid>				
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 13:51:28 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[हरियाणा में गेहूं की कुल आवक 77 लाख टन पर पहुंची]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-77-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">रोहतक। हरियाणा की मंडियों में वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान 20 अप्रैल तक गेहूं की कुल आवक बढ़कर 77 लाख टन से ऊपर पहुंच गई जो खाद्य मंत्रालय द्वारा नियत खरीद लक्ष्य 72 लाख टन से 5 लाख टन अधिक है लेकिन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एवं प्रांतीय एजेंसियों द्वारा इसमें से केवल 56.13 लाख टन की ही खरीद की गई। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस खरीद की कुल मात्रा के महज 35 प्रतिशत भाग यानी 19.77 लाख टन गेहूं का उठाव अभी तक संभव हो पाया है। बाकी माल मंडियों में ही है।&nbsp;</span></p><p>उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस बार सिरसा में सबसे ज्यादा 9.56 लाख टन गेहूं पहुंचा। इसके बाद जींद में 8.44 लाख टन तथा करनाल में 7.49 लाख टन गेहूं आया। करनाल में सबसे अधिक 6.56 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई जबकि कैथल में 5.72 लाख टन तथा सिरसा में 5.55 लाख टन गेहूं सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा गया। सोनीपत जिले में सबसे कम 3.30 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई।&nbsp;</p><p>पिछले साल 20 अप्रैल तक सरकारी एजेंसियों द्वारा समूचे हरियाणा में 47.15 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जो इस वर्ष करीब 9 लाख टन बढ़कर 56.13 लाख टन पर पहुंच गया। गत वर्ष राज्य में 75 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य नियत किया गया था जबकि वास्तविक खरीद 72.41 लाख टन पर पहुंची थी। गेहूं की कुल आपूर्ति 75.61 लाख टन की हुई थी। शेष 3.20 लाख टन गेहूं की खरीद फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों द्वारा की गई थी।&nbsp;</p><p>हरियाणा में गेहूं की आवक एवं खरीद अभी जारी है। किसान मंडियों में पड़े गेहूं के भारी स्टॉक से परेशान हैं क्योंकि इसके उठाव की गति सुस्त होने से उन्हें अपना माल सही जगह पर रखने में कठिनाई हो रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31690</guid>				
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 13:28:36 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उड़ीसा में दलहन-तिलहन की खरीद के लिए 14.28 अरब रुपए की मंजूरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---14-28-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने उड़ीसा को दलहन-तिलहन की खरीद के लिए 14.28 अरब रुपए की राशि मंजूर की है। उल्लेखनीय है कि उड़ीसा सरकार ने केन्द्र के पास किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पांच फसलों (जिंसों) की खरीद के लिए इस राशि के आवंटन के प्रस्ताव भेजा था। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है। इस विशाल धनराशि से उड़ीसा में मूंग एवं उड़द जैसे दलहनों एवं मूंगफली, सूरजमुखी तथा सरसों जैसे तिलहनों की खरीद सुनिश्चित की जाएगी।</span></p><p>कृषि मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक उड़ीसा में 1,19,387 टन उड़द की खरीद के लिए 9.31 अरब रुपए तथा 34,492 टन मूंग की खरीद के लिए 3.02 अरब रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसी तरह तिलहनों जिंसों में 20,219 टन मूंगफली की खरीद के लिए करीब 1.47 अरब रुपए, 4964 टन सरसों की खरीद के लिए 30.80 करोड़ रुपए तथा 2210 टन सूरजमुखी की खरीद के लिए 17.06 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इससे किसानों को मूल्य समर्थन योजना का पूरा लाभ हासिल होगा और उसे औने-पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश नहीं होना पड़ेगा।&nbsp;</p><p>केन्द्र सरकार उड़ीसा में खासकर सूरजमुखी का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है क्योंकि यह तिलहन फसल धीरे-धीरे अनेक क्षेत्रों से गायब होती जा रही है। </p><p>उड़ीसा के कई इलाकों में न केवल इसकी खेती नियमित रूप से हो रही है बल्कि इसकी पैदावार में भी सुधार आ रहा है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार दलहन-तिलहन की इस सम्पूर्ण स्वीकृत मात्रा की खरीद पीएम-आशा स्कीम के अंतर्गत 90 दिनों की अवधि में सुनिश्चित की जाएगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31685</guid>				
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:08:21 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गुणवत्ता मानको में ढील दिए जाने से यूपी में गेहूं खरीद की गति बढ़ेगी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">लखनऊ। केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद की रफ्तार बढ़ाने तथा किसानों को राहत देने के उद्देश्य से गुणवत्ता मानकों (क्वालिटी नॉमर्स) में ढील दी गई है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश देश में गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है मगर केन्द्रीय पूल में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का योगदान देने के मामले में पांचवें नम्बर पर रहता है। राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में गेहूं की क्वालिटी से सम्बन्धित शिपमेंट- शर्तों में छूट पहले ही दी जा चुकी है।&nbsp;</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन में 20 अप्रैल तक उत्तर प्रदेश की मंडियों में 6.77 लाख टन गेहूं की आपूर्ति हुई मगर इसमें से केवल 2.75 लाख टन की सरकारी खरीद संभव हो सकी। यह स्थिति सरकार के लिए चिंताजनक रही। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष 10 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</p><p> पिछले साल की समान अवधि में यूपी की मंडियों में 10.88 लाख टन गेहूं की आवक एवं 4.54 लाख टन की सरकारी खरीद हुई थी। गुणवत्ता नियमों में छूट मिलने के बाद अब इस राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31681</guid>				
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:20:24 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[यूरिया का स्टॉक कम रहने से खरीफ बिजाई प्रभावित होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। हालांकि देश में अन्य किस्मों के रासायनिक उर्वरकों (खाद) की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है लेकिन सबसे प्रमुख उर्वरक- यूरिया का स्टॉक घटकर पिछले चार वर्षों के निचले स्तर पर आने से आगामी खरीफ सीजन के दौरान विभिन्न फसलों की बिजाई एवं प्रगति प्रभावित होने की आशंका है। जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पहली बौछार (बारिश) के साथ ही खरीफ फसलों की बिजाई शुरू हो जाती है। मानसून-पूर्व की वर्षा भी इस बार कम होने की संभावना है।</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 को देश में 54.22 लाख टन यूरिया का स्टॉक मौजूद था जो गत वर्ष की इसी तिथि को उपलब्ध स्टॉक 55.96 लाख टन से कम था। इससे पूर्व वर्ष 2022 में यह स्टॉक घटकर 47.83 लाख टन पर आया था और उस वर्ष खरीफ सीजन में चावल (धान), तुवर, उड़द तथा कुछ अन्य फसलों के उत्पादन में काफी गिरावट आ गई थी। </p><p>ध्यान देने की बात है कि वर्ष 2022 के मानसून सीजन में दीर्घावधि औसत के सापेक्ष देश में 106 प्रतिशत बारिश हुई थी मगर खाद की कमी से फसलों की उपज दर एवं कुल पैदावार में कमी आ गई थी।&nbsp;</p><p>वर्ष 2022 में यूरिया के साथ-साथ अन्य उर्वरकों का स्टॉक भी काफी घट गया था लेकिन इस वर्ष केवल यूरिया का ही ज्यादा अभाव महसूस हो रहा है। दूसरी चिंता मानसून की बारिश को लेकर है। </p><p>इस बार जून-सितम्बर के दौरान दीर्घावधि औसत की तुलना में केवल 92 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया गया है और बांधों-सरोवरों में जल स्तर भी घटकर काफी नीचे आ गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31679</guid>				
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 10:29:36 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भारत से अभी तक गेहूं का निर्यात शुरू नहीं]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। यद्यपि सरकार ने फरवरी में 25 लाख टन गेहूं का जो निर्यात कोटा घोषित किया था उसके लिए निर्यातकों को लाइसेंस जारी कर दिया गया है लेकिन अत्यन्त कठिन प्रतिस्पर्धा के कारण निर्यातकों को अनुबंध करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है।&nbsp;</span></p><p>भारतीय गेहूं का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल 265-270 डॉलर प्रति टन चल रहा है जबकि रूस, यूक्रेन एवं यूरोपीय संघ का गेहूं महज 230-240 डॉलर प्रति टन पर उपलब्ध है। समीक्षकों का कहना है कि यह बाजार का खेल है और इसमें सरकारी नीतिगत हस्तक्षेप कारगर साबित नहीं होगा। </p><p>यदि वैश्विक बाजार भाव ऊंचा एवं तेज हो जाए तो निर्यात संभव हो सकता है। सरकार गेहूं के घरेलू बाजार मूल्य को और नीचे नहीं जाने दे सकती है क्योंकि इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31667</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:07:47 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं का अतिरिक्त निर्यात कोटा भी बाजार की धारणा बदलने में नाकाम]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। हालांकि केन्द्र सरकार ने गेहूं का निर्यात कोटा 25 लाख टन से दोगुना बढ़ाकर 50 लाख टन निर्धारित कर दिया है लेकिन घरेलू बाजार में इसकी मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है। अधिकांश व्यापार विश्लेषक इस अतिरिक्त निर्यात कोटे की प्रासंगिकता पर सवाल उठा रहे हैं। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उनका कहना है कि प्रथम चरण के दौरान जिस 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी गई उसका अनुबंध करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि वैश्विक बाजार भाव नीचे होने से भारतीय गेहूं की प्रतिस्पर्धी क्षमता समाप्त हो गई है और निर्यातकों को 'पड़ता' (पैरिटी) नहीं बैठ रहा है। जब उस कोटे का ही उपयोग नहीं हो रहा है तब इस अतिरिक्त कोटे की घोषणा की क्या जरूरत थी ?</span></p><p>वैसे कुछ समीक्षक इस अतिरिक्त निर्यात कोटे के निर्णय का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि भू-राजनैतिक हालत एवं जलवायु की स्थिति प्रतिकूल रही तो वैश्विक निर्यात बाजार में भारतीय गेहूं की प्रतिस्पर्धी क्षमता में सुधार आ सकता है और तब यह अतिरिक्त निर्यात कोटा लाभदायक साबित हो सकता है।&nbsp;</p><p>ध्यान देने की बात है कि चालू वर्ष के दौरान न केवल मौसम की हालत कुछ हद तक प्रतिकूल रही बल्कि केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं खरीद की रफ्तार भी धीमी बनी हुई है। </p><p>ऐसे परिदृश्य में गेहूं का निर्यात कोटा एकाएक दोगुना बढ़ाने का निर्णय कुछ अजीब लगता है। यह सही है कि केन्द्रीय बफर स्टॉक में गेहूं की पर्याप्त मात्रा मौजूद है जिससे यह घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता में आने वाली गिरावट की भरपाई करने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है।&nbsp;</p><p>1 अप्रैल 2026 को केन्द्रीय पूल में करीब 218 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद था जो 1 अप्रैल 2025 को उपलब्ध स्टॉक से 85 प्रतिशत ज्यादा था। </p><p>अप्रैल-जून के लिए बफर स्टॉक में कम से कम 75 लाख टन गेहूं का भंडार अवश्य होना चाहिए जबकि इस बार का स्टॉक उस नियत स्तर के दोगुने से भी काफी अधिक था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31665</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:52:20 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वस्त्र परिधानों का निर्यात 2.1 प्रतिशत बढ़ा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-2-1-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से 3,09,859.30 करोड़ रुपए मूल्य के वस्त्र परिधानों एवं टेक्सटाइल सामानों (हस्तकरघा उत्पाद सहित) का निर्यात हुआ था जो वित्त वर्ष 2025-26 में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,16,334.90 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार तमाम चुनौतियों एवं बाधाओं के बावजूद निर्यात में हुई इस वृद्धि से स्पष्ट संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में भारतीय वस्त्र उत्पादों की मांग मजबूत बनी हुई है और सभी प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता बरकरार है। </p><p>उल्लेखनीय है कि भारतीय वस्त्र उत्पादों के सबसे प्रमुख निर्यात बाजार- अमरीका में कुछ समय तक भारत के उत्पादों पर 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा दिया गया था और मार्च 2026 में अमरीका-ईरान के बीच भयंकर युद्ध होने से पश्चिम एशिया, </p><p>मध्य पूर्व तथा खाड़ी क्षेत्र के देशों में कारोबार काफी हद तक&nbsp; प्रभावित हुआ था लेकिन इसके बावजूद वार्षिक आधार पर निर्यात में कमी नहीं आई बल्कि कुछ बढ़ोत्तरी हो गई। यह उद्योग के लिए राहत की बात है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31663</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:07:35 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गन्ना नियंत्रण आदेश हेतु संशोधन का प्रारूप जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में कुछ संशोधन करने का प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी किया है। इसी आदेश से सम्पूर्ण गन्ना एवं चीनी क्षेत्र का नियंत्रण एवं संचालन होता है। नए प्रारूप में किसी दो चीनी मिलों के बीच कम से कम 25 कि०मी० का अंतर (फासला) रखने और खांडसारी इकाइयों को गन्ना उत्पादकों को केन्द्र द्वारा निर्धारित उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ-साथ खांडसारी इकाइयों को रेग्युलेट करने पर भी इस ड्राफ्ट में जोर दिया गया है। इसके तहत इन इकाइयों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जाएगा और उसे नियमित जांच-पड़ताल एवं निरीक्षण के दायरे में लाया जाएगा।</span></p><p>उल्लेखनीय है कि खांडसारी एक परम्परागत गैर रिफाइंड कच्ची चीनी होती है जिसे गन्ना से बनाया जाता है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि सम्बन्धित पक्षों को अपनी राय एवं टिप्पणी 20 मई तक सरकार के पास भेजना आवश्यक है।</p><p>मोटे अनुमान के अनुसार देश में प्रतिवर्ष औसतन 43-45 करोड़ टन गन्ना का उत्पादन होता है जिसमें से लगभग 31 प्रतिशत का उपयोग गुड़-खांडसारी इकाइयों द्वारा किया जाता है। यह मात्रा काफी बड़ी होती है इसलिए सरकार इसके उपयोग को अवस्थित करना चाहती है और खांडसारी इकाइयों पर नजर भी रखना चाहती है।&nbsp;</p><p>जहां तक दो चीनी मिलों के बीच की दूरी का सवाल है तो महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य राज्यों में यह अनिवार्य नियम पहले से ही लागू है। </p><p>संशोधन के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव भी किया गया है कि यदि चीनी मिल गन्ना की प्राप्ति के बाद 14 दिन के अंदर उसके मूल्य का भुगतान नहीं करती है तो उसे गन्ना किसानों को 14 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31661</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 17:59:42 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से चीनी का 6 प्रतिशत वैश्विक कारोबार प्रभावित]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-6-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सान डियागो। पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण स्थिति रहने और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के बंद होने से अन्य जिंसों के साथ चीनी का आयात-निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">खाड़ी क्षेत्र के देश भारी मात्रा में ब्राजील, भारत, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया एवं यूरोपीय संघ से कच्ची चीनी का आयात करते हैं और फिर उसकी रिफाइनिंग करके सफेद-रिफाइंड चीनी तैयार करते हैं। कुछ देश सीधे रिफाइंड चीनी भी बाहर से मंगाते हैं।&nbsp;</span></p><p>लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया की 6 प्रतिशत चीनी का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इससे मध्य पूर्व के देशों में चीनी की रिफाइनिंग इकाइयों की कठिनाई बढ़ गई है। </p><p>न्यूयार्क एक्सचेंज में पिछले तीन सप्ताहों से चीनी की कीमतों पर दबाव बना हुआ था और 17 अप्रैल को सबसे निकटवर्ती पोजीशन के अनुबंध हेतु इसका वायदा मूल्य लुढ़ककर पिछले करीब साढ़े पांच साल के निचले स्तर पर आ गया था। </p><p>लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे इसमें सुधार आने लगा। ब्राजील के मध्य दक्षिण भाग में 2025-26 सीजन के दौरान 402.50 लाख टन तथा समूचे देश में 441.96 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया गया जबकि 2026-27 के वर्तमान में उत्पादन घटने की संभावना है। इससे चीनी का वैश्विक बाजार भाव कुछ सुधरने के आसार है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31659</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 17:56:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं की आवक के मुकाबले सरकारी खरीद बहुत कम]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। मार्च के अंतिम एवं अप्रैल के प्रथम सप्ताह के दौरान तेज हवा के प्रवाह के साथ बेमौसमी बारिश तथा कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने से गेहूं फसल को न केवल नुकसान हुआ बल्कि इसकी कटाई-तैयारी में बाधा भी पड़ी। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसके फलस्वरूप मंडियों में तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर 20 अप्रैल 2026 तक 157.88 लाख टन गेहूं पहुंचा जिसमें से 114.29 लाख टन की खरीद भारतीय खाद्य निगम एवं प्रांतीय एजेंसियों द्वारा की गई।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> पिछले साल की तिथि तक 194.16 लाख टन गेहूं की आवक हुई थी और उसमें से 135.52 लाख टन गेहूं सरकारी एजेंसियों ने खरीदा था। इस तरह गेहूं की कुल आवक तथा सरकारी खरीद गत वर्ष की तुलना में इस बार काफी पीछे चल रही है।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद पिछले साल की तुलना में इस बार पंजाब में 29.88 लाख टन से उछलकर 46.28 लाख टन तथा हरियाणा में 47.08 लाख टन से बढ़कर 53.70 लाख टन पर पहुंच गयी लेकिन उत्तर प्रदेश में 4.54 लाख टन से गिरकर 2.75 लाख टन, मध्य प्रदेश में 47.15 लाख टन से लुढ़ककर 7.26 लाख टन और राजस्थान में 6.75 लाख टन से घटकर 4.01 लाख टन पर अटक गई।</p><p>उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय पूल में ये पांचों राज्य मिलकर 95 प्रतिशत से अधिक गेहूं का योगदान देते हैं। यद्यपि बिहार, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ एवं जम्मू कश्मीर में भी गेहूं की सरकारी खरीद होती है लेकिन वहां इसकी मात्रा सीमित रहती है। </p><p>केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने इस वर्ष 303.37 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत पंजाब में 122 लाख टन, मध्य प्रदेश में 78 लाख टन, हरियाणा में 72 लाख टन, राजस्थान में 21 लाख टन एवं उत्तर प्रदेश में 10 लाख टन की खरीद का लक्ष्य शामिल है। गेहूं खरीद की गति आगे तेज हो सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31657</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 17:12:06 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो का खतरा आ रहा है नजदीक]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">तिरुअनन्तपुरम। विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह पर पानी के गर्म होने (या तापमान) बढ़ने से उत्पन्न होने वाले अल नीनो मौसम चक्र के आगमन की संभावना पहले अगस्त-सितम्बर के लिए व्यक्त की गई थी,</span></p><p>फिर जुलाई-अगस्त के लिए व्यक्त की गई और अब कहा जा रहा है कि मई से जुलाई के बीच कभी भी इसकी सक्रियता बढ़ सकती है। यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि अप्रैल-मई में अक्सर मानसून-पूर्व की अच्छी वर्षा होती है और जून से मानसून की बारिश आरंभ हो जाती है।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग ने जून-जुलाई में अल नीनो के आने का अनुमान व्यक्त किया है लेकिन कुछ मौसम मॉडल्स इसके जल्दी पहुंचने के संकेत दे रहे हैं। इसी तरह कुछ मौसम पूर्वानुमान केन्द्र सामान्य अल नीनो तो कुछ अन्य जलवायु ब्यूरो 'सुपर' अल नीनो का अनुमान लगा रहे हैं। इससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। </p><p>मई में अल नीनो का आना ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे खरीफ फसलों की अगैती बिजाई करने में किसानों को भारी कठिनाई हो सकती है। बांधों-जलाशयों में भी पानी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद नहीं है जिससे चिंता और बढ़ सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31654</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:43:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सीसीआई को रूई की बिक्री में मिल रही शानदार सफलता]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई का भाव काफी ऊंचा एवं तेज होने से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग फिलहाल सरकारी स्टॉक की खरीद में भारी दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके फलस्वरूप केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में खरीदी गई रूई के आधे से ज्यादा स्टॉक की बिक्री करने में सफलता मिल चुकी है।&nbsp;</span></p><p>न्यूयार्क स्थित इंटर कांटीनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) में जुलाई डिलीवरी के लिए रूई का वायदा भाव बढ़कर 80 सेंट प्रति पौंड से ऊपर पहुंच गया है और इस तरह मार्च के आरंभ से लेकर अब तक इसमें लगभग 30 प्रतिशत का जोरदार उछाल आ चुका है।&nbsp;</p><p>भारतीय कपास निगम द्वारा 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 105 लाख गांठ रूई की खरीद की गई जो 2024-25 सीजन की कुल खरीद 100.16 लाख गांठ से करीब 5 लाख गांठ अधिक रही। रूई की प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है।&nbsp;</p><p>सीसीआई के चेयरमैन-सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के अनुसार निगम द्वारा अभी तक 55 लाख गांठ से कुछ अधिक रूई की बिक्री की जा चुकी है। टेक्सटाइल मिलों एवं व्यापारियों द्वारा इसकी खरीद में जबरदस्त सक्रियता दिखाई जा रही है। </p><p>पिछले दो महीने से सरकारी रूई का उठाव नियमित रूप से हो रहा है। विदेशों से इसका आयात महंगा बैठ रहा है जबकि सरकारी रूई अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध है। आगे भी खरीद-बिक्री की प्रक्रिया जारी रहेगी।&nbsp;</p><p>निगम ने 21 अप्रैल को अपनी रूई के बिक्री मूल्य में 200 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) का इजाफा कर दिया। पिछले एक सप्ताह के दौरान बिक्री मूल्य में कुल 800 रुपए प्रति कैंडी की बढ़ोत्तरी कर दी गई।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31652</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:40:42 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[फरवरी में अर्जेन्टीना से सोयामील का निर्यात 33 प्रतिशत घटा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-33-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">ब्यूनस आयर्स। लैटिन अमरीकी देश- अर्जेन्टीना से फरवरी 2026 में सोयामील का कुल निर्यात 13.30 लाख टन पर अटक गया जो जनवरी 2026 के शिपमेंट 20.10 लाख टन से 33 प्रतिशत तथा फरवरी 2025 के निर्यात 18.20 लाख टन से 27 प्रतिशत कम रहा।&nbsp;</span></p><p>जर्मनी के हैम्बर्ग नगर से प्रकाशित होने वाले तिलहन-तेल विषय के विश्व प्रसिद्ध न्यूज लेटर- ऑयल वर्ल्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी 2026 के दौरान अर्जेन्टीना से सोयामील का निर्यात यूरोपीय संघ में घटकर 2.70 लाख टन रह गया जो जनवरी 4.60 लाख टन एवं फरवरी 2025 में 3.40 लाख टन रहा था। </p><p>इसी तरह एशियाई देशों में इसका निर्यात फरवरी 2026 में लुढ़ककर 5.80 लाख टन पर सिमट गया जो जनवरी के शिपमेंट 10 लाख टन तथा फरवरी 2025 के निर्यात 8.40 लाख टन से काफी कम था। एशियाई देशों में इंडोनेशिया एवं तुर्की में निर्यात बढ़ा।</p><p> कुल मिलाकर अर्जेन्टीना से 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में 108.70 लाख टन सोयामील का निर्यात हुआ जबकि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में 117.80 लाख टन का शिपमेंट हुआ था। अर्जेन्टीना सोयामील का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31650</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:36:15 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दूसरी छमाही में पाम तेल की वैश्विक आपूर्ति घटने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। दुनिया में पाम तेल के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- इंडोनेशिया में 1 जुलाई 2026 से बायोडीजल निर्माण में 50 प्रतिशत क्रूड पाम तेल (सीपीओ) के अनिवार्य मिश्रण का नियम (बी 50 प्रोग्राम) लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे वहां पाम तेल का निर्यात योग्य स्टॉक घट जाएगा और वैश्विक बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल हो जाएगी।&nbsp;</span></p><p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार इंडोनेशिया में बी 50 प्रोग्राम लागू होने, अल नीनो मौसम चक्र का प्रकोप रहने तथा जियो पोलिटिकल टेंशन रहने से पाम तेल बाजार में संकुचन पैदा हो सकता है। इससे कीमतों में कुछ तेजी मजबूती आने की संभावना भी रहेगी।&nbsp;</p><p>इंडोनेशिया एवं मलेशिया दुनिया के दो सबसे प्रमुख पाम तेल उत्पादक एवं निर्यातक देश हैं। पाम तेल का वैश्विक वार्षिक उत्पादन 820 लाख टन के करीब रहता है। भारत में प्रतिवर्ष औसतन 90-95 लाख टन पाम तेल का आयात किया जाता है जिससे घरेलू जरूरत पूरी होती है।</p><p>इस वर्ष इंडोनेशिया में बी 50 प्रोग्राम, मलेशिया में बी 15 एवं थाईलैंड में बी 20 प्रोग्राम लागू होने पर पाम तेल के वैश्विक निर्यात कारोबार में गिरावट आने की संभावना है। अल नीनो मौसम चक्र का असर दक्षिण एशिया (भारत) के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया एवं सुदूर पूर्व एशिया (थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया) पर भी पड़ने की संभावना है। इससे वहां पाम तेल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।</p><p>यह परिस्थिति उस समय उत्पन्न हो रही है जब भारत में विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता काफी ऊंची है और घरेलू प्रभाग में उसका दाम भी तेज चल रहा है। हाल के महीनों में पाम तेल का आयात कम हुआ है लेकिन आगे इसे बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31648</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:32:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बांग्ला देश में मक्का का आयात बढ़ने के संकेत]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मीरपुर। बांग्ला देश में पशु आहार निर्माण (फीड) उद्योग का तेजी से विकास-विस्तार होने के कारण मक्का की मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है। इसको पूरा करने के लिए वहां मक्का का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है और साथ ही साथ विदेशों से इसका आयात भी बढ़ाया जा रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बांग्ला देश पहले मक्का का अधिकांश आयात भारत से करता था लेकिन अब ब्राजील ने भारत का स्थान ले लिया है। इतना ही नहीं बल्कि बांग्ला देश में वर्ष 2018 के बाद पहली बार अमरीका से भी मक्का का आयात शुरू हो गया है। अमरीकी शर्तों के कारण ऐसा हो रहा है।</span></p><p>2025-26 के सीजन में बांग्ला देश के कुल मक्का आयात में अमरीकी माल की भागीदारी 11 प्रतिशत हो गई। लगभग 60 हजार टन अमरीकी मक्का से लदा जहाज जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह में बांग्ला देश के चटगांव बंदरगाह पर पहुंचा था। इसके बाद दो और जहाजों में करीब एक लाख टन अमरीकी मक्का वहां पहुंच गया। </p><p>इस तरह कुल आयात 1.60 लाख टन हो गया। 2025-26 के सीजन में वहां कुल 18 लाख टन मक्का मुख्यतः भारत, ब्राजील एवं अमरीका से मंगाया गया। 2026-27 में आयात 17 लाख टन होने का अनुमान है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31646</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:21:43 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कमजोर मानसून से खरीफ कालीन दलहन का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। वैश्विक दलहन इकोसिस्टम का ऐसी सेंटर माना जाने वाला भारत फिलहाल संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। 2025-26 के खरीफ एवं रबी सीजन में कुछ उतार-चढ़ाव के साथ दलहन फसलों का उत्पादन लगभग सामान्य रहा और पिछले बकाया स्टॉक की वजह से विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता भी कम पड़ी। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">लेकिन अब 2026-27 के खरीफ सीजन में दलहन उत्पादकों के लिए अग्नि परीक्षा शुरू होने वाली है। इस पर गहरी नजर रखने की आवश्यकता है।&nbsp;</span></p><p>भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपयोगकर्ता, प्रोसेसर्स एवं आयातक देश हैं। यहां खरीफ सीजन में अरहर (तुवर), उड़द एवं मूंग तथा रबी सीजन में चना, मसूर एवं मटर का भारी उत्पादन होता है। इसके अलावा कुछ अन्य दलहनों की भी सीमित पैदावार होती है। चना, तुवर, उड़द एवं मूंग के उत्पादन में भारत सबसे आगे है।&nbsp;</p><p>दुनिया के अनेक देश मुख्यतः भारतीय बाजार पर नजर रखते हुए दलहनों का उत्पादन करते हैं क्योंकि भारत बड़े पैमाने पर तुवर, उड़द, मसूर, मटर (पीली) एवं चना (देसी) का आयात करता है। </p><p>यदि भारत में आयात थम जाए तो कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों में दलहनों का उत्पादन काफी हद तक प्रभावित हो सकता है और इसके वैश्विक बाजार मूल्य में भारी गिरावट आ सकती है।&nbsp;</p><p>भारत में दलहनों का कुल उत्पादन 2021-22 में 273 लाख टन पर पहुंचा था जो 2025-26 के सीजन में घटकर 260 लाख टन के आसपास सिमट जाने की संभावना है। दलहनों की कुल घरेलू पैदावार में चना तथा तुवर की संयुक्त भागीदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रहती है।&nbsp;</p><p>इस वर्ष अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने की संभावना है जिससे जून-सितम्बर में खरीफ सीजन के दौरान वर्षा की स्थिति अनिश्चित एवं अनियमित रह सकती है। इससे तुवर, उड़द एवं मूंग की बिजाई तथा प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31644</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:59:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[ब्राजील में उत्पादन घटने की संभावना से चीनी का भाव सुधरा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">न्यूयार्क। लैटिन अमरीकी देश- ब्राजील में इस वर्ष एथनॉल निर्माण में गन्ना का अधिक उपयोग किए जाने की संभावना है जिससे चीनी के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। ब्राजील दुनिया में चीनी का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है इसलिए वहां उत्पादन घटने पर बाजार में मजबूती आना स्वाभाविक ही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">मई अनुबंध के लिए न्यूयार्क एक्सचेंज में पिछले दिन कच्ची चीनी के वायदा मूल्य में 0.01 सेंट (0.07 प्रतिशत) प्रति पौंड तथा लन्दन एक्सचेंज में अगस्त डिलीवरी के लिए सफेद चीनी के वायदा भाव में 4.90 डॉलर प्रति टन (1.17 प्रतिशत) की तेजी दर्ज की गई।</span></p><p>अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने ब्राजील में 2026-27 सीजन के दौरान 425 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया है जो 2025-26 सीजन के उत्पादन से 3 प्रतिशत कम है। </p><p>इसके अलावा चीनी के वैश्विक अधिशेष स्टॉक का अनुमान भी 14 लाख टन से घटाकर 8 लाख टन नियत किया गया है। एक अन्य विश्लेषक ने 2026-27 सीजन के लिए वैश्विक अधिशेष स्टॉक का अनुमान 34 लाख टन से घटाकर 11 लाख टन तथा 2025-26 सीजन के लिए 83 लाख टन से घटाकर 58 लाख टन निर्धारित किया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/31642</guid>				
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:21:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में गेहूं की धीमी खरीद से कृषि मंत्री चिंतित]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">भोपाल। पंजाब के बाद केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान देने वाले दूसरे सबसे प्रमुख राज्य- मध्य प्रदेश में चालू रबी&nbsp; मार्केटिंग सीजन के दौरान इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की सरकारी खरीद की गति काफी धीमी होने से केन्द्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान काफी चिंतित हैं। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने इस सम्बन्ध में राज्य के मुख्यमंत्री से बातचीत करके गेहूं खरीद की रफ्तार बढ़ाने में आ रही दिक्कतों को दूर करने का आग्रह किया है ताकि किसानों को राहत मिल सके।&nbsp;</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन में 20 अप्रैल तक मध्य प्रदेश में केवल 7.26 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद संभव हो सकी जबकि पिछले साल की इसी अवधि में खरीद 47.15 लाख टन पर पहुंच गई थी। </p><p>हालांकि कुछ अन्य राज्यों की भांति मध्य प्रदेश में भी मार्च से ही गेहूं की खरीद करने की अनुमति दी गई थी लेकिन इसका कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आ सका। </p><p>आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में भी गेहूं की सरकारी खरीद गत वर्ष से काफी पीछे चल रही है। इन राज्यों&nbsp; में मौसम की हालत ठीक नहीं थीं।&nbsp;</p><p>समझा जाता है कि मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं की खरीद के लिए सरकारी व्यवस्था में कुछ कमी रह गयी जिससे किसानों को क्रय केन्द्रों पर अपना गेहूं बेचने में कठिनाई हो रही है। </p><p>केन्द्रीय कृषि मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को खरीद की रफ्तार बढ़ाने हेतु यथाशीघ्र पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए कहा है। कई क्रय केन्द्रों पर जूट अथवा प्लास्टिक थैलियों (बोरियों) का अभाव देखा जा रहा है जिससे गेहूं के खरीदे गए स्टॉक की पैकिंग में देरी हो रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 10:31:33 +0530</pubDate>
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                <title><![CDATA[चीन में टूटे चावल का निर्यात करने में सावधानी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। भारत से पहुंचे टूटे चावल की कई खेपों को नामंजूर करने तथा जीएम चावल की उपस्थिति का बहाना करने के बाद चीन ने भारत से 100 प्रतिशत टूटे चावल का आयात पुनः शुरू कर दिया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">लेकिन इस बार भारतीय निर्यातक काफी सजग-सतर्क एवं सावधान है। उल्लेखनीय है कि चीन की सरकार ने तीन भारतीय चावल निर्यातक फर्मों का आयात लाइसेंस भी कोई ठोस कारण बताए बगैर निरस्त कर दिया है।&nbsp;</span></p><p>शिपिंग खर्च बढ़ने के बावजूद भारतीय टुकड़ी चावल का निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल अन्य आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी या आकर्षक स्तर पर चल रहा है इसलिए चीन के आयातक इसकी खरीद करने से स्वयं को रोक नहीं पा रहे हैं। </p><p>भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि देश में जीएम चावल का उत्पादन एवं कारोबार नहीं होता है इसलिए किसी भी खेप में इसका अंश मौजूद रहना संभव नहीं है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:49:47 +0530</pubDate>
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