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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 14:54:37 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[अक्टूबर से प्रत्येक माह चीनी के उत्पादन पर रहेगी सरकारी नजर]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने अक्टूबर 2026 से आरंभ होने वाले नए मार्केटिंग सीजन में प्रत्येक चीनी के घरेलू उत्पादन एवं स्टॉक पर नजर रखने और इसका नियमित आंकलन- विश्लेषण करने का फैसला किया है। इस बीच खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि मिलों को उचित मूल्य पर बाजार में चीनी बेचना आवश्यक है अन्यथा सरकार को कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एहतियाती कदम उठाना पड़ेगा।&nbsp;</span></p><p>खाद्य मंत्रालय के मुताबिक चीनी की कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए नीति निर्माण की प्रक्रिया सुधारने के उद्देश्य से उत्पादन एवं स्टॉक तथा वितरण-विवरण पर नियमित नजर रखना आवश्यक है। जुलाई-अगस्त के दौरान चीनी के दाम में अकस्मात अप्रत्याशित तेजी आ गई थी जिससे सरकार अब काफी सजग-सतर्क हो गई है और यह ऐसी व्यवस्था निर्मित करना चाहती है ताकि उसकी पुनरावृत्ति न हो सके।&nbsp;</p><p>चीनी मिलों को प्रत्येक माह के वास्तविक उत्पादन एवं बिक्री का सटीक आंकड़ा सरकार को उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया है। हालांकि पिछले कुछ दिनों के अंदर चीनी के एक्स फैक्टरी मूल्य में जोरदार गिरावट आई है और थोक भाव भी घटकर नीचे आया है अगर खुदरा कीमतों में ज्यादा कमी नहीं आई है। 10 सितम्बर को अखिल भारतीय स्तर पर चीनी का औसत खुदरा मूल्य 60.20 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया जो 9 सितम्बर के मूल्य 60.31 रुपए प्रति किलो से कुछ ही नीचे था। चीनी का एक्स फैक्टरी मूल्य 4700 से 5100 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। थोक भाव में 50-100 रुपए प्रति क्विंटल का उतार चढ़ाव देखा जा रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37406</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 13:44:20 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वियतनाम एवं ब्राजील से भी बढ़ सकता है कालीमिर्च का आयात]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मंगलोर। इंडियन पीपर एंड स्पाईस ट्रेड एसोसिएशन के डायरेक्टर का कहना है कि त्यौहारी सीजन की मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए देश में कालीमिर्च का पर्याप्त स्टॉक शायद उपलब्ध नहीं है और अगला उत्पादन भी कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं इसलिए विदेशों से इसका आयात का प्रयास किया जा रहा है। दक्षिणी राज्यों में बारिश काफी कम हुई है।&nbsp;&nbsp;</span></p><p>एसोसिएशन के अनुसार भारतीय आयातक फिलहाल श्रीलंका से कालीमिर्च के आयात को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि एक तो वहां इस बार इसका शानदार उत्पादन हुआ है और भारत में एक निश्चित मात्रा में इसका शुल्क मुक्त तथा रियायती शुल्क पर आयात किया जा सकता है और दूसरे वहां से माल मंगाने में समय तथा शिपमेंट खर्च कम लगता है। वर्तमान समय में कालीमिर्च का भाव श्रीलंका में करीब 6900 डॉलर प्रति टन और भारत में 7800 डॉलर प्रति टन चल रहा है।</p><p>यदि घरेलू प्रभाग में कालीमिर्च की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती है तो वियतनाम एवं ब्राजील जैसे देशों में भी इसका आयात बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है। फिलहाल कालीमिर्च का निर्यात ऑफर मूल्य वियतनाम में 6000 डॉलर प्रति टन और ब्राजील में 5800 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है।&nbsp;</p><p>केरल के इडुक्की जिले में उत्पादक अब कालीमिर्च के बजाए छोटी इलायची के उत्पादन की तरफ मुड़ रहे हैं क्योंकि इसकी कीमतों में अच्छी तेजी आ रही है। ग्वाटेमाला में फसल कमजोर होने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची की मांग काफी मजबूत हो गई है।&nbsp;</p><p>व्यापार विश्लेषकों के अनुसार जोरदार भारतीय मांग के कारण श्रीलंका में कालीमिर्च का भाव ऊंचा हो गया है जबकि शानदार उत्पादन होने से वहां इसका दाम नरम रहना चाहिए था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37404</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 13:23:06 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सस्कैचवान में 7 सितम्बर तक महज 27 प्रतिशत क्षेत्र में फसलों की कटाई पूरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-7-27-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सस्काटून। कनाडा के सबसे प्रमुख कृषि उत्पादक प्रान्त- सस्कैचवान में नियमित रूप से हो रही वर्षा के कारण विभिन्न फसलों की कटाई-तैयारी में काफी बाधा पड़ रही है। कृषि विभाग के अनुसार प्रांतीय स्तर पर इस वर्ष 1 अगस्त से 7 सितम्बर तक केवल 27 प्रतिशत क्षेत्र में फसलों की कटाई संभव हो सकी जो इसके पंचवर्षीय औसत 58 प्रतिशत एवं दस वर्षीय औसत 50 प्रतिशत से काफी कम है।&nbsp;</span></p><p>कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सस्कैचवान में चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान 7 सितम्बर 2026 तक शीतकालीन गेहूं की 87 प्रतिशत, फॉल राई की 94 प्रतिशत, जौ की 41 प्रतिशत, ड्यूरम गेहूं की 38 प्रतिशत, वसंतकालीन गेहूं की 13 प्रतिशत, जई की 14 प्रतिशत तथा कैनेरी सीड की 11 प्रतिशत फसल काटी गई। </p><p>इसी तरह तिलहन फसलों में सरसों की&nbsp; 50 प्रतिशत, अलसी की 3 प्रतिशत, सोयाबीन की 7 प्रतिशत तथा कैनोला की 9 प्रतिशत फसल की कटाई पूरी हुई। दलहन फसलों में 84 प्रतिशत क्षेत्र में मसूर तथा 79 प्रतिशत क्षेत्र में मटर की फसल काटी जा चुकी थी जबकि चना (काबुली) की फसल केवल 24 प्रतिशत क्षेत्र में काटी गई। कटाई के दौरान ही वर्षा होने लगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37402</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 13:15:29 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मुनाफावसूली से चना कमजोर, लेकिन बड़ी गिरावट की संभावना कम]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">बढ़े भावों पर मुनाफावसूली बिक्री बढ़ने तथा लिवाली कमजोर पड़ने से आज चना की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कमजोर मांग के दबाव में दिल्ली चना बाजार में 100रुपए&nbsp; प्रति क्विंटल की गिरावट रही। गिरावट के बाद दिल्ली में मध्य प्रदेश लाइन चना के भाव 6,500/6,525 रुपए प्रति क्विंटल तथा राजस्थान लाइन के भाव 6,600रुपए&nbsp; प्रति क्विंटल रह गए।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसी प्रकार, देश की अन्य प्रमुख मंडियों में भी चना के भाव में 50 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज की गई। पिछले दिनों की तेजी के बाद ऊंचे भाव पर स्टॉकिस्टों एवं व्यापारियों की ओर से मुनाफावसूली बढ़ने से बाजार पर दबाव बना, जबकि कमजोर लिवाली के कारण भावों में करेक्शन देखने को मिला।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, उत्पादक मंडियों में चना की आवक सीमित बनी हुई है, जिससे बाजार में घरेलू आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। दूसरी ओर, आयातित चना की आयात पड़ताल महंगी पड़ रही है, जिसके कारण आयातित चना में डिस्पैरिटी अधिक बनी हुई है। महंगे आयात के चलते आयातित माल की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है और घरेलू बाजार को इससे समर्थन मिल रहा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बाजार में मौजूदा गिरावट को फिलहाल तेजी के बाद आया करेक्शन माना जा रहा है। सीमित घरेलू आवक, महंगे आयात और आयातित चना में अधिक डिस्पैरिटी को देखते हुए चना की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है। आगे निचले स्तरों पर मांग निकलने तथा घरेलू आपूर्ति की स्थिति बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेगी।</span></p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37400</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:48:28 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मुंबई पोर्ट पर कंटेनर की शॉर्टेज से मसूर में तेजी, कनाडा मसूर ₹6,500 पर पहुंची]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-6-500-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुंबई पोर्ट पर कंटेनरों की लगातार बनी हुई शॉर्टेज के कारण आयातित मसूर की आवक और सप्लाई प्रभावित हो रही है। वहीं, आयातकों की बिकवाली कमजोर पड़ने तथा दाल मिलर्स की ओर से मांग मजबूत बने रहने से मुंबई मसूर बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बाजार में सीमित उपलब्धता के बीच खरीदारी बढ़ने से कनाडा मसूर के भाव में 100 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया मसूर में 50 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी रही। तेजी के बाद मुंबई में कनाडा मसूर के भाव बढ़कर 6,500 रुपए प्रति क्विंटल तथा ऑस्ट्रेलिया मसूर के भाव 6,400 रुपए प्रति क्विंटल हो गए।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">पोर्ट पर कंटेनरों की कमी के चलते आयातित माल की डिलीवरी और बाजार में नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, उपलब्ध स्टॉक के मुकाबले मांग बेहतर होने से आयातकों पर बिकवाली का दबाव भी कम हुआ है। इसके चलते मसूर के भाव को लगातार समर्थन मिल रहा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">आगे बाजार की दिशा पोर्ट पर कंटेनरों की उपलब्धता, आयातित माल की आवक तथा दाल मिलर्स की मांग पर निर्भर रहेगी। यदि कंटेनर की शॉर्टेज और सप्लाई की समस्या बनी रहती है तथा लिवाली मजबूत रहती है, तो मसूर की कीमतों को आगे भी समर्थन मिलने की संभावना है।</span></p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37398</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:10:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आपूर्ति की जटिलता से चावल का निर्यात ऑफर मूल्य तेज]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। आपूर्ती एवं उपलब्धता की स्थिति कुछ जटिल होने तथा आयातक देशों की मांग मजबूत रहने से चावल का निर्यात ऑफर मूल्य बढ़कर पिछले करीब एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। खरीफ कालीन धान के क्षेत्रफल में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक की गिरावट आने तथा अल नीनो के प्रभाव से मानसून का प्रदर्शन कमजोर रहने से चावल के उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ रही है।&nbsp;</span></p><p>व्यापार विश्लेषकों के अनुसार वर्षा की कमी को देखते हुए चावल के उत्पादन का अनुमान घटाया जा रहा है। अगस्त में सामान्य औसत से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई। सितम्बर में भी मानसूनी वर्षा कम होने की संभावना है। अभी तक वर्षा की कमी 16 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है।&nbsp;</p><p>चालू सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत टूटे भारतीय गैर बासमती सेला कच्चा (सफेद) चावल का निर्यात ऑफर मूल्य सुधरकर 368-373 डॉलर प्रति टन हो गया।&nbsp;&nbsp;</p><p>दूसरी ओर वितयनाम के 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 440-445 डॉलर प्रति टन पर स्थिर रहा। वहां ग्रीष्म-पतझड़ कालीन धान की कटाई लगभग समाप्त हो चुकी है और चावल की आपूर्ति की गति धीमी पड़ने लगी है। वैसे वियतनामी चावल की मांग भी घट रही है। हालांकि फिलीपींस में चावल का आयात बढ़ रहा है मगर उसके आयातक वियतनाम के साथ-साथ अन्य देशों से भी इसे मंगा रहे हैं। चालू वर्ष की पूरी अवधि में वियतनाम से करीब 77.40 लाख टन चावल का निर्यात होने का अनुमान है।&nbsp;</p><p>बांग्ला देश में चावल का भाव ऊंचा है जिसे नीचे करने के लिए सरकार को कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार ने सुगंधित चावल के निर्यात कोटे में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है। इस चावल के 45,270 टन के निर्यात की स्वीकृति दी गई थी मगर 30 अगस्त तक केवल 2419 टन का शिपमेंट हो सका। थाईलैंड के 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य गत सप्ताह के 483-485 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब 488 डॉलर प्रति टन हो गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37396</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:07:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मिलों से उचित मूल्य पर चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने देश भर की मिलों से त्यौहारी सीजन के दौरान उचित मूल्य पर चीनी की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा है ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अगस्त में चीनी का भाव तेजी से उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था जिसे देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने सितम्बर के प्रथम पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी का भारी भरकम फ्री सेल कोटा जारी कर दिया। जल्दी ही दूसरे पखवाड़े (16-30 सितम्बर) के लिए भी कोटा घोषित होने वाला है।&nbsp;</span></p><p>हालांकि स्वदेशी उद्योग के पास चीनी का सीमित स्टॉक बचा हुआ है मगर निर्यात पर प्रतिबंध लगने, 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने तथा मध्य अक्टूबर से गन्ना की क्रशिंग आरंभ होने की संभावना को देखते हुए सरकार को भरोसा है </p><p>कि चीनी की आपूर्ति की स्थिति खासकर त्यौहारी सीजन में काफी हद तक सुगम बनी रहेगी। इस बार एथनॉल निर्माण में गन्ना जूस एवं बी-हैवी शीरा के उपयोग पर पाबंदी लगाई जा सकती है ताकि चीनी के उत्पादन में ज्यादा से ज्यादा इजाफा हो सके।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37393</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 11:24:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[त्यौहारी मांग से कालीमिर्च का भाव मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">कोच्चि। पीक त्यौहारी सीजन से पूर्व दिसावरी मांग बढ़ने से कालीमिर्च की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बनने लगा है। उत्पादन में कुछ कमी आने की संभावना तथा विदेशों से आयातित माल के ऊंचे खर्च का भी घरेलू बाजार पर असर पड़ रहा है। घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से कालीमिर्च का आयात बढ़ाने का प्रयास हो रहा है।&nbsp;</span></p><p>विदेशों और खासकर श्रीलंका से कालीमिर्च के आयात का खर्च बढ़ गया है जिसका कारण आपूर्तिकर्ता देशों में कीमतों में हुई क्षति तथा भारतीय मुद्रा (रुपया) की विनिमय दर में आई कमजोर है। भारत की जोरदार मांग को देखते हुए निर्यातक देशों ने अपनी कालीमिर्च का दाम बढ़ाना शुरू कर दिया है। यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।&nbsp;</p><p>स्थानीय टर्मिनल मार्केट में कालीमिर्च का भाव गार्बल्ड श्रेणी के लिए 724 रुपए प्रति किलो तथा अन गार्बल्ड ग्रेड के लिए 704 रुपए प्रति किलो पर मजबूत बना हुआ है। पिछले दिन मार्केट में करीब 50 टन कालीमिर्च की आवक हुई जिसमें अधिकांश हिस्सा श्रीलंका से आयातित माल का था। इस बार श्रीलंका में कालीमिर्च का बेहतर उत्पादन हुआ है जिससे भारत में इसका आयात बढ़ रहा है।&nbsp;</p><p>दूसरी ओर भारत में मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण कालीमिर्च का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। एक महत्वपूर्ण संस्था- भारतीय कालीमिर्च एवं मसाला व्यापार संघ (इप्सता) के निदेशक का कहना है कि कर्नाटक, केरल (इडुक्की) एवं तमिलनाडु में बारिश कम तथा अनियमित होने से कालीमिर्च का उत्पादन घटने की संभावना है। यद्यपि आमतौर पर इस वर्ष कालीमिर्च का घरेलू उत्पादन 65-70 हजार टन होने का अनुमान लगाया जा रहा है मगर अल नीनो के प्रभाव एवं मानसून की कमजोर स्थिति को देखते हुए भारतीय उत्पादन इससे काफी कम हो सकता है।&nbsp;</p><p>घरेलू प्रभाग में कालीमिर्च की त्यौहारी मांग बढ़ने लगी है जो कमोबेश नवम्बर तक बरकरार रह सकती है। इससे कीमतों में भी तेजी-मजबूती का रुख जारी रहने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37389</guid>				
                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 11:05:10 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी मिलों को त्यौहारी सीजन में आपूर्ति बढ़ाने का निर्देश]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार से समूचे देश की मिलों को त्यौहारी सीजन के दौरान चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए कहा है। केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि सरकार चीनी के मासिक उत्पादन की निगरानी करेगी ताकि कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के लिए सही नीति लागू करने में मदद मिल सके।&nbsp;</span></p><p>आधिकारिक सूत्रों के अनुसार त्यौहारी सीजन में मिलों को उचित दाम पर चीनी की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है अन्यथा कीमतों को स्थिर बनाने के लिए सरकार एहतियाती उपाय करने के लिए बाध्य हो जाएगी। </p><p>उल्लेखनीय है कि ब्राजील के बाद भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वहां अगस्त में चीनी का भाव उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था जिससे सरकार को 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के साथ-साथ कुछ अन्य कदम भी उठाने पड़े थे। अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37374</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:49:02 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूस-यूक्रेन से आपूर्ति घटने का गेहूं के वैश्विक बाजार पर असर]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">पेरिस। हालांकि रूस तथा यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से ही युद्ध जारी है लेकिन अब इसकी भयंकरता काफी बढ़ गई है। दोनों देश एक-दूसरे के बंदरगाहों एवं व्यापारिक जहाजों पर भीषण हमले कर रहे हैं जिससे काला सागर के जलमार्ग से गेहूं सहित अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात शिपमेंट ठप्प पड़ने लगा है। मालूम हो कि रूस दुनिया में गेहूं का सबसे प्रमुख निर्यातक और तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यूक्रेन से भी विशाल मात्रा में गेहूं का निर्यात किया जाता है।&nbsp;</span></p><p>रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध आरंभ होने के बाद वसंतकालीन गेहूं का वायदा भाव उछलकर 14 डॉलर प्रति बुशेल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था लेकिन बाद में उतनी ही तेजी से तीन वर्षों तक घटता भी रहा। अक्टूबर 2025 में यह घटकर 5.45 डॉलर प्रति बुशेल पर आ गया था।&nbsp;</p><p>वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान गेहूं के वायदा मूल्य में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया जबकि जुलाई से इसमें तेजी मजबूती का एक नया दौर आरंभ हो गया। बाजार को अंततः काला सागर से शिपमेंट बाधित होने की गंभीरता का एहसास हुआ और वहां हलचल तेजी से बढ़ने लगी। एक सप्ताह के अंदर ही गेहूं के वायदा मूल्य में 60 सेंट प्रति बुशेल का उछाल आ गया। वर्तमान समय में भाव 7.65 से 7.75 डॉलर प्रति बुशेल के बीच चल रहा है।</p><p>समीक्षकों के अनुसार गेहूं के दाम में आई तेजी का कारण सिर्फ रूस-यूक्रेन से शिपमेंट में कमी आना नहीं है बल्कि कुछ अन्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। प्रतिकूल मौसम के कारण इस वर्ष अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी एवं अर्जेन्टीना जैसे देशों से गेहूं का उत्पादन घटने की संभावना है। गेहूं के वैश्विक उत्पादन अनुमान में भी भारी कटौती की जा रही है। गेहूं के वैश्विक उत्पादन अनुमान में भी भारी कटौती की जा रही है। इससे आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। रूस-यूक्रेन के पास गेहूं का विशाल निर्यात योग्य स्टॉक तो मौजूद है मगर जब तक काला सागर क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हो जाते है तब तक वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता का संकट बना रह सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37372</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:46:38 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भारत में कनाडा से पीली मटर का आयात बढ़ने के आसार]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। कनाडा के एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक ने कहा है कि भारत में पिछले दो सप्ताहों के दौरान (अगस्त 2026 में) पीली मटर का भाव तेजी से बढ़कर जून 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। काला सागर क्षेत्र से मटर का शिपमेंट प्रभावित हो रहा है जबकि अन्य देशों में भी इसका सीमित स्टॉक मौजूद है। प्रमुख उत्पादक देशों में इस वर्ष मटर&nbsp; के उत्पादन में करीब 15 लाख टन की गिरावट आने का अनुमान है जिसमें कनाडा भी शामिल है।&nbsp;</span></p><p>कनाडा में इस वर्ष मटर की औसत उपज दर घटकर 36.7 बुशेल प्रति एकड़ रह जाने की संभावना है। पीली मटर के बिजाई क्षेत्र में 16 प्रतिशत की गिरावट आई और कमजोर उपज दर को देखते हुए इसका कुल उत्पादन गत वर्ष के मुकाबले 27 प्रतिशत घटकर 23.10 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान है। हरी मटर का उत्पादन भी 22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4.50 लाख टन के आसपास रह जाने की संभावना है।&nbsp;</p><p>चीन में कनाडाई मटर की अच्छी मांग बनी हुई है जबकि भारत में पीली मटर के आयात की गति आगामी समय में तेज होने की संभावना है क्योंकि भारतीय आयातकों को रूस यूक्रेन से इसके आयात में ज्यादा सहायता नहीं मिल रही है। इसके फलस्वरूप कनाडा में मटर का भाव कुछ मजबूत होने की उम्मीद है मगर इसमें भारी तेजी आना मुश्किल लगता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37370</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 17:45:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वर्षा की कमी से आगामी रबी फसलों को बढ़ सकता है खतरा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। जून में कमजोर रहने के बाद जुलाई-अगस्त में दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी हद तक मजबूत एवं सक्रिय रहा। सितम्बर के प्रथम सप्ताह के दौरान भी देश के विभिन्न राज्यों में अच्छी वर्षा हुई लेकिन फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष अभी तक मानसून की कुल वर्षा 14 प्रतिशत कम हुई है। मौसम विभाग ने&nbsp; सितम्बर में भी एलपीए के मुकाबले 8-10 प्रतिशत कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। इससे न केवल खरीफ फसलों की उपज दर एवं पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है बल्कि आगामी रबी सीजन की फसलों की बिजाई एवं प्रगति भी प्रभावित होने की संभावना है। अगले महीने से इसकी बिजाई आरंभ होने वाली है।&nbsp;</span></p><p>एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी के अनुसार मानसून की कमजोर वर्षा का ज्यादा प्रतिकूल असर कपास, बाजरा, मक्का, तुवर, मूंगफली एवं सोयाबीन आदि की फसल पर पड़ने की संभावना है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई में बाधा पड़ सकती है और रबी फसलों की सिंचाई के लिए भी कम पानी उपलब्ध रहेगा।&nbsp;</p><p>यद्यपि मौसम विभाग ने सितम्बर में 9 प्रतिशत कम बारिश होने का अनुमान लगाया है मगर एक प्राइवेट मौसम एजेंसी ने वर्षा की कमी 20 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की है। खरीफ फसलों की बिजाई तो लगभग पूरी हो गई है लेकिन कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी से उसकी हालत संतोषजनक नहीं है। सिंचाई सुविधा का भी सीमित सहयोग मिल रहा है। सामान्य औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष खरीफ फसलों की 98 प्रतिशत बिजाई पहले ही हो चुकी है।&nbsp;</p><p>रबी सीजन में मुख्यतः गेहूं, चना, मसूर, मटर, जौ एवं सरसों की खेती होती है जबकि कुछ अन्य ऐसी फसलों का भी उत्पादन होता है जिसकी बिजाई खरीफ सीजन में भी की जाती है। इस बार खरीफ सीजन में धान, मूंग, मक्का, रागी, मूंगफली एवं सोयाबीन आदि का रकबा गत वर्ष से पीछे रह गया। कपास और गन्ना के क्षेत्रफल में भी गिरावट आई है। अल नीनो का खतरा अभी बरकरार है जो रबी फसलों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37368</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 17:20:38 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कनाडा में काबुली चना का कुल स्टॉक 6.50 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-6-50-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">ओटावा। यद्यपि प्रतिकूल मौसम एवं क्षेत्रफल में कमी के कारण इस वर्ष कनाडा में काबुली चना के उत्पादन में एक लाख टन से अधिक की गिरावट आने की संभावना है लेकिन पिछला बकाया स्टॉक 1.50 लाख टन ज्यादा होने से इसकी कुल उपलब्धता बढ़कर 6.50 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है।&nbsp;</span></p><p>2025-26 के सीजन में शानदार उत्पादन होने से कनाडा में चना का स्टॉक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था जबकि 2026-27 के सीजन में विशाल बकाया स्टॉक की वजह से कुल उपलब्धता उससे भी ज्यादा रहने की संभावना है। दूसरी ओर अमरीका में उत्पादन 27 प्रतिशत घटकर 2.25 लाख टन पर सिमटने की संभावना है जिससे वहां इसका आयात बढ़ सकता है। अमरीका कनाडाई काबुली चना का सबसे बड़ा खरीदार है लेकिन अभी दोनों देशों के सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं।&nbsp;</p><p>अन्य आयातक देशों में कनाडाई काबुली चना की मांग संतोषजनक देखी जा रही है। पाकिस्तान में वर्ष 2026 के आरंभिक सात महीनों में चना का आयात बढ़कर 4.72 लाख टन के करीब पहुंच गया लेकिन अब इसके शीर्ष आपूर्तिकर्ता देश ऑस्ट्रेलिया में स्टॉक कम रह गया है। </p><p>वहां उत्पादन भी घटने की संभावना है। रूस से शिपमेंट में बाधा पड़ रही है जिससे कनाडा को कुछ फायदा होने की उम्मीद है। पाकिस्तान में कनाडा से छोटे दाने वाले काबुली चना का आयात बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37366</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 16:37:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कनाडा में मसूर के उत्पादन में भारी गिरावट के संकेत]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विनीपेग। पश्चिमी कनाडा के प्रेयरी संभाग में स्थित दो शीर्ष उत्पादक प्रांतों- सस्कैचवान एवं अल्बर्टा में इस वर्ष मौसम की हालत प्रतिकूल रहने से मसूर की उपज दर एवं पैदावार में गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं जबकि इसकी क्वालिटी भी प्रभावित होने की आशंका है।&nbsp;</span></p><p>मसूर फसल की कटाई-तैयारी कनाडा में जारी है। शुरुआती रुझानों में इसकी औसत उपज दर 30 बुशेल प्रति एकड़ आंकी गई है जो सामान्य औसत से नीचे है। दरअसल मसूर के प्रमुख उत्पादक इलाकों में बसंत काल के दौरान अत्यन्त मूसलाधार बारिश हुई जबकि ग्रीष्मकाल में भयंकर गर्मी का प्रकोप देखा गया। इतना ही नहीं बल्कि फसल की कटाई-तैयारी के दौरान भी वहां बेमौसमी वर्षा होने से किसानों की कठिनाई बढ़ गई। इससे फसल को काफी क्षति होने की आशंका है। कटाई की गति धीमी देखी जा रही है।&nbsp;</p><p>पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान कनाडा में लाल मसूर के उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत एवं हरी मसूर की पैदावार में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन हरी मसूर का भारी-भरकम पिछला बकाया स्टॉक मौजूद है इसलिए कुल उपलब्धता में ज्यादा कमी नहीं आएगी। इसकी कुल आपूर्ति 8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16.60 लाख टन पर आने की संभावना है। लाल मसूर का स्टॉक करीब 12 प्रतिशत घटकर 20 लाख टन से नीचे आने का अनुमान है। छोटी हरी मसूर का स्टॉक बड़ी (मोटी) हरी मसूर से ज्यादा रहने की उम्मीद है।</p><p>मसूर की मांग फसल की कटाई पूरी होने का इंतजार नहीं कर रही है। भारत में जनवरी से ही प्रत्येक माह मसूर का आयात पंचवर्षीय औसत से ज्यादा हो रहा है। भारत में मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में 3.91 लाख टन मसूर का रिकॉर्ड आयात हुआ जो गत वर्ष की समान अवधि के आयात की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा रहा। चूंकि मानसून की बारिश 13 प्रतिशत कम हुई है और तुवर के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में सूखे का प्रकोप देखा जा रहा है इसलिए वहां हरी मसूर का आयात बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37364</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 16:34:49 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[इंडोनेशिया में अगले वर्ष बी 60 प्रोग्राम लागू करने का प्लान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-60-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जकार्ता। इंडोनेशिया में वर्ष 2027 से बायोडीजल के निर्माण में पाम तेल के अनिवार्य उपयोग का स्तर बढ़ाकर 60 प्रतिशत नियत करने का प्लान बनाया जा रहा है और इसके लिए आवश्यक तैयारी भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल वहां जैव ईंधन के निर्माण में 50 प्रतिशत पाम तेल का प्रयोग हो रहा है। इससे उसके प्रभाग में पाम तेल की मांग एवं खपत बढ़ जाएगी।&nbsp;</span></p><p>उल्लेखनीय है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में अवस्थिति इंडोनेशिया दुनिया में पाम तेल का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक&nbsp; देश है। भारत में पाम तेल का सर्वाधिक आयात इंडोनेशिया से ही होता है। वहां घरेलू मांग एवं खपत बढ़ने से पाम तेल के निर्यात योग्य स्टॉक में कमी आ सकती है।&nbsp;</p><p>बी 60 प्रोग्राम लागू करने के लिए फिलहाल इंडोनेशिया में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) की आपूर्ति एवं उत्पादन क्षमता का आंकलन विश्लेषण किया जा रहा है। इंडोनेशिया के राष्ट्र्पति ने पहले कहा था कि अगर बी-50 प्रोग्राम का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हुआ तो सरकार इसके अगले चरण यानी बी 60 प्रोग्राम पर विचार करेगी। इस प्रोग्राम के लिए सीपीओ की अधिक मात्रा की जरूरत पड़ेगी और इसलिए इसके उत्पादन की क्षमता परखने की कोशिश हो रही है। वह निर्यात को भी बरकरार रखना चाहता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37362</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[एथनॉल निर्माण में गन्ना जूस एवं शीरा के उपयोग पर लग सकता है नियंत्रण]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चीनी की बैलेंस शीट में आ रही जटिलता एवं मानसून की कमजोर स्थिति के कारण गन्ना के उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए लगता है कि केन्द्र सरकार 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में एथनॉल के निर्माण में गन्ना जूस तथा बी हैवी शीरा के उपयोग को नियंत्रित करने का निर्णय ले सकती है। खुदरा बाजार में अब भी चीनी का भाव काफी ऊंचे स्तर पर है जिससे आम उपभोक्ताओं की कठिनाई बरकरार है। समझा जाता है कि 30 सितम्बर को स्वदेशी उद्योग के पास महज 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच जाएगा। यदि अक्टूबर के लिए 25 लाख टन का फ्री सेल कोटा जारी किया गया तो सितम्बर में क्या होगा ?</span></p><p>जानकार सूत्रों के अनुसार सरकार एथनॉल के उत्पादन में गन्ना जूस एवं हैवी शीरा के उपयोग को रोकने का मन बना चुकी है और जल्दी ही इसके लिए नया आदेश जारी कर सकती है। उद्योग को भी इस बात की आशंका है। डिस्टीलरीज को सरकारी निर्णय से झटका लग सकता है लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए उसे यह झटका बर्दाश्त करना ही पड़ेगा।&nbsp;</p><p>लेकिन एथनॉल निर्माण में में सी-हैवी शीरा के उपयोग पर रोक लगने की संभावना बहुत कम या नगण्य है। वर्ष 2023 में भी सरकार ने इस तरह का आदेश जारी किया था जिससे घरेलू प्रभाग में चीनी के अभाव का संकट टालने में सहायता मिली थी। इस्मा के उपाध्यक्ष का कहना है कि चीनी उद्योग सी हैवी शीरा का उपयोग करने के लिए तैयार है जिसमें सुक्रोज का नगण्य अंश होता है। एथनॉल निर्माण में इसका उपयोग आसानी से किया जा सकता है। सरकार का ध्यान चीनी का उत्पादन बढ़ाने पर केन्द्रित है क्योंकि इसका घरेलू बाजार भाव काफी ऊंचे स्तर पर है।&nbsp;</p><p>2026-27 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी के उत्पादन में पर्याप्त इजाफा होना आवश्यक है। इस बार हालात बिगड़ने से सरकार को 10 लाख टन कच्ची (चीनी) के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए बाध्य होना पड़ा। वह अगले सीजन में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होने देना चाहेगी। इसके साथ-साथ चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने पर ही कीमतों को नियंत्रित रखा जा सकेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37360</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 15:19:30 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा बढ़ने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने मई में जून से अक्टूबर तक रूई के आयात को शुल्क मुक्त रखने की घोषणा की थी लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को कम से कम दिसम्बर 2026 तक बढ़ाया जा सकता है। इससे देश के वस्त्र उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है। रूई पर पहले 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ था जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया।&nbsp;</span></p><p>रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा बढ़ाने के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं उससे लगता हैं कि सरकार को इस तरह का फैसला लेना पड़ सकता है। </p><p>कपास का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से करीब 70 हजार हेक्टेयर पीछे चल रहा है और कुछ राज्यों में बारिश की कमी से फसल को नुकसान होने की आशंका भी है। वैश्विक बाजार में रूई का भाव ऊंचा हो गया है। </p><p>भारतीय वस्त्र उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पादों के दाम को प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने के लिए सस्ती रूई प्राप्त होना आवश्यक है। देश में रूई का अभाव होने से विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता बनी रहेगी और इसलिए सीमा शुल्क में छूट देना भी जरुरी होगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37358</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 13:25:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अगस्त 2026 तक 278 लाख टन चीनी का घरेलू उत्पादन]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-2026-278-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। शीर्ष उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने कहा है कि 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में देश के अंदर करीब 279 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है। अक्टूबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक देशभर की मिलों द्वारा करीब 277.50 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया&nbsp; जबकि चालू माह (सितम्बर) में लगभग 1.50 लाख टन चीनी का अतिरिक्त उत्पादन हो सकता है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">कर्नाटक और तमिलनाडु में गन्ना क्रशिंग का विशेष सत्र अभी जारी है। इन दोनों दक्षिण राज्यों में जुलाई से सितम्बर तक गन्ना की स्पेशल क्रशिंग होती है। देश के अन्य उत्पादक राज्यों में क्रशिंग बहुत पहले बंद हो गई थी जो अक्टूबर से चालू हो सकती है।&nbsp;</span></p><p>इस्मा की रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक और तमिलनाडु में फिलहाल करीब 17 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग हो रही है और इसका सिलसिला सितम्बर के अंत तक जारी रहने की संभावना है। अक्टूबर से 2026-27 का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ हो जाएगा। अब तक प्रचलित रुख के आधार पर इस्मा ने 2025-26 सीजन की सम्पूर्ण अवधि में चीनी का कुल घरेलू उत्पादन 279 लाख टन होने का अनुमान लगाया है।&nbsp;</p><p>उल्लेखनीय है कि 2024-25 सीजन के दौरान देश में महज 261 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था मगर 79 लाख टन का विशाल पिछला बकाया स्टॉक मौजूद रहने से इसकी कुल उपलब्धता 340 लाख टन के करीब पहुंच गई थी। 2025-26 सीजन के आरंभ में बकाया स्टॉक घटकर 50 लाख टन के आसपास रह गया। 279 लाख टन के अनुमानित उत्पादन के साथ चीनी की कुल उपलब्धता 330 लाख टन के करीब रहने की संभावना है। इसमें से लगभग 8.25 लाख टन चीनी का निर्यात हो गया।&nbsp;</p><p>चीनी की कुल वार्षिक घरेलू खपत 285 लाख टन के करीब होती है। इसे देखते हुए लगता है कि 2025-26 सीजन के अंत में उद्योग के पास चीनी का कुल पिछला बकाया स्टॉक 35 लाख टन के करीब रह सकता है। इससे चीनी की आपूर्ति की स्थिति जटिल हो सकती है। </p><p>अक्टूबर का फ्री सेल कोटा जारी होने पर उद्योग के पास चीनी का स्टॉक घटकर अत्यन्त निचले स्तर पर आ सकता है। वैसे 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात एवं अक्टूबर के मध्य से नया उत्पादन शुरू होने पर स्थिति में कुछ सुधार आ सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37356</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 13:05:39 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गुजरात में एमएसपी पर दलहन-तिलहन की खरीद का निर्णय]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">अहमदाबाद। गुजरात सरकार ने इस वर्ष खरीफ कालीन मूंगफली, सोयाबीन, मूंग तथा उड़द की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर करने का निर्णय लिया है और इसके लिए आज यानी 10 सितम्बर 2026 से किसानों का रजिस्ट्रेशन भी आरंभ हो गया है। गुजरात के कृषि मंत्री ने कहा है कि सरकार के इस निर्णय से राज्य के दलहन-तिलहन उत्पादकों को एमएसपी का लाभ हासिल हो सकेगा।&nbsp;</span></p><p>एमएसपी पर अपने दलहन-तिलहन के स्टॉक की बिक्री करने के इच्छुक किसानों का रजिस्ट्रेशन 10 सितम्बर से आरंभ होकर 9 अक्टूबर तक जारी रहेगा। कृषि मंत्री के मुताबिक किसान आधार प्रामाणिकता के माध्यम से अपने फार्मर आईडी का इस्तेमाल करते हुए ई-ग्राम केन्द्रों पर मुफ्त में यानी नि: शुल्क अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके साथ-साथ किसानों को पंजीकरण के लिए दो और विकल्प दिए गए हैं।</p><p>खरीफ कालीन दलहन-तिलहन की खरीद केन्द्र सरकार की पीएम-आशा (प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान) स्कीम के अंतर्गत की जाएगी जिसका उद्देश्य किसानों को वित्तीय संरक्षण प्रदान करना है। 2026-27 सीजन के लिए मूंगफली का एमएसपी 7517 रुपए, मूंग का 8780 रुपए, उड़द का 8200 रुपए तथा सोयाबीन का 5708 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37354</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 12:24:20 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वर्षा की कमी से आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों की बिजाई घटी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विजयवाड़ा। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश में मानसून की बारिश कम होने से खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार धीमी रही और अब यह अंतिम चरण में पहुंच गई है। आंध्र प्रदेश में धान, कपास एवं दलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।&nbsp;</span></p><p>राज्य कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में इस वर्ष 9 सितम्बर तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 22.81 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 25.20 लाख हेक्टेयर से करीब 2.40 लाख हेक्टेयर कम है। राज्य के कई भागों में बारिश की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। वहां मानसून इस बार कमजोर रहा है।&nbsp;</p><p>आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गत वर्ष की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश प्रदेश में धान का उत्पादन क्षेत्र 13.91 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 12.01 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 2.10 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.51 लाख हेक्टेयर, तिलहनों का क्षेत्रफल 2.05 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 1.94 लाख हेक्टेयर तथा कपास का रकबा 4.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.10 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 2.70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.08 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।</p><p>मोटे अनाजों में मक्का का रकबा 1.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.07 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी तरह बाजरा एवं रागी का बिजाई क्षेत्र भी गत वर्ष से कुछ पीछे रह गया। इसकी खेती कम क्षेत्रफल में होती है।&nbsp;</p><p>दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 2.41 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.62 लाख हेक्टेयर और उड़द का बिजाई क्षेत्र 20 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 37 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा। मूंग के रकबे में भी थोड़ी वृद्धि हुई।&nbsp;</p><p>तिलहन फसलों के संवर्ग में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 1.62 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.47 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि अरंडी का बिजाई क्षेत्र 28 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 30 हजार हेक्टेयर हो गया। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में तिल एवं सोयाबीन की बिजाई भी सीमित क्षेत्रफल में हुई है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/37349</guid>				
                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:57:44 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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