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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 02:33:35 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[15 नवम्बर तक चीनी का आयात कोटा हो सकता है वापस]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/15-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने 20 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी करके भारतीय मिलर्स एवं रिफाइनर्स को 31 अक्टूबर 2026 तक विदेशों से टैरिफ रेट कोटा प्रणाली (टीआरक्यू) के अंतर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति प्रदान की थी। अब इस चीनी के आयात की समय सीमा 31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसके लिए 19 अक्टूबर को एक आधिकारिक अधिसूचना भी जारी की गई।&nbsp;</span></p><p>19 अक्टूबर को ही विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा एक अन्य अधिसूचना भी जारी की गई जिसमें कहा गया कि जो मिलर्स / रिफाइनर्स अपने लिए आवंटित कोटे की चीनी का आयात करने में असमर्थ है या आयात करने के इच्छुक नहीं है वे नियमानुसार सरकार को अपना आयात कोटा 15 नवम्बर 2026 तक वापस (सरेंडर) कर सकते हैं। </p><p>कोटा सरेंडर करने के लिए मिलर्स / रिफाइनर्स को कुल लोटाने योग्य मात्रा की चीनी के सीआईएफ (कॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ्राईट) मूल्य के 0.5 प्रतिशत की समतुल्य राशि का भुगतान करना आवश्यक है। इस शर्त का निर्धारण पहले ही किया जा चुका है। कोटा सरेंडर करने की अन्य सभी शर्त पूर्ववत रहेंगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38847</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 20:00:32 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की समयसीमा 31 दिसम्बर तक बढ़ी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-31-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के अंतर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 अक्टूबर 2026 से दो माह के लिए बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2026 तक निर्धारित कर दिया है। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा 19 अक्टूबर 2026 को जारी एक अधिसूचना के अनुसार 20 अगस्त 2026 को 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की देने हेतु अधिसूचना जारी की गई थी जिसमें मिलर्स / रिफाइनर्स को 31 अक्टूबर तक अपने आवंटित कोटे की चीनी का आयात करने के लिए कहा गया था। इस कोटे का जो शेष भाग बचा हुआ है उसका आयात कुछ शर्तों के साथ अब 31 दिसम्बर 2026 तक करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।</span></p><p>अधिसूचना के अनुसार टीआरक्यू के अंतर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त (ड्यूटी फ्री) आयात के लिए केवल समयावधि में दो माह की बढ़ोत्तरी की गई है जबकि अन्य तमाम शर्तें वहीं रहेंगी जिसे 20 अगस्त 2026 को जारी पहली अधिसूचना में निर्धारित किया गया था। इस नई अधिसूचना का प्रभाव यह होगा कि आयातकों को अब 31 दिसम्बर 2026 तक अपने कोटे की शेष बची चीनी मंगाने का अवसर मिल जाएगा।&nbsp;</p><p>अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून के कारण 2026-27 सीजन के दौरान गन्ना एवं चीनी का उत्पादन उत्साहवर्धक रहने की संभावना नहीं है इसलिए सरकार चाहती है कि इस 10 लाख टन कच्ची चीनी के पूरे कोटे का आयात हो जाए ताकि घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सामान्य&nbsp; बनाने में सहायता मिल सके।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38845</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 19:58:10 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[ऊंचे भावों पर सौंफ में व्यापार कम : मंदे की संभावना नहीं]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। विगत कुछ समय से सौंफ की कीमतों में तेजी का दौर बना हुआ है लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों के कारण वर्तमान में सौंफ का व्यापार प्रभावित हुआ है मगर सूत्रों का कहना है कि कीमतों में अधिक मंदे की संभावना नहीं है क्योंकि एक ओर जहां स्टॉक कम रह गया है वहीं दूसरी तरफ आगामी सीजन के लिए उत्पादक राज्यों में बिजाई घटने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। सौंफ का मुख्यतः उत्पादन गुजरात, राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में भी होता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में देश में सौंफ का बिजाई 92/93 हजार हेक्टेयर का रहा था जोकि वर्ष 2026 के लिए घटकर 85/86 हजार हेक्टेयर का रह गया। चालू सीजन के दौरान उत्पादक केन्द्रों पर पानी की कमी के चलते एवं अन्य जिंसों के भाव ऊंचे होने से आगामी सीजन में 2027 के लिए भी सौंफ के बिजाई क्षेत्रफल में कमी आने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में बिजाई का कार्य शुरू हो गया है जबकि राजस्थान में चालू माह के अंत तक शुरू होने के समाचार है।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात भाव&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">वर्तमान में निर्यात एवं लोकल मांग बाजार में अच्छी चल रही है। उल्लेखनीय है कि विगत कुछ समय से मिडिल ईस्ट देशों के हालात अच्छे नहीं होने के कारण सौंफ का निर्यात प्रभावित हो रहा था लेकिन हाल ही में निर्यात मांग में सुधार हुआ है और कीमतें भी बढ़ी है। उल्लेखनीय है कि जून 2026 के दौरान सौंफ का निर्यात भाव 99/100 रुपए प्रति किलो चल रहा था जोकि अगस्त माह में बढ़कर 109/110 रुपए हो गया और सितम्बर माह में 118/119 रुपए पर बोला जाने लगा। जोकि वर्तमान में 142/143 रुपए बोला&nbsp; जा रहा है।</p><p style="text-align: justify; "><b>उत्पादन&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">चालू सीजन के दौरान देश में सौंफ की पैदावार गत वर्ष की तुलना में कम रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 के दौरान उत्पादक केन्द्रों पर सौंफ का उत्पादन 16/17 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) का माना गया है जबकि वर्ष 2025 में उत्पादन 18/19 लाख बोरी का माना गया था।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; ">कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण वर्तमान में मंडियों में आवक काफी कम रह गई है। प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 2500/3000 बोरी की हो रही है जबकि राजस्थान की नागौर एवं मेडता मंडी में आवक 500/700 बोरी की चल रही है। व्यापारियों का कहना है कि कुल उत्पादन का गुजरात की मंडियों में लगभग 75/80 प्रतिशत एवं राजस्थान 70/75 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है। चालू सीजन के दौरान गुजरात में सौंफ का उत्पादन 7/7.50 लाख बोरी एवं राजस्थान 7.5/8 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए गए थे। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों का उत्पादन 1.5/2 लाख बोरी का अनुमान लगाया गया था।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के प्रथम तीन माह अप्रैल-जून से सौंफ का निर्यात मात्रात्मक रूप में 7 प्रतिशत घटा है लेकिन निर्यात भाव अच्छे मिलने के कारण आय में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल-जून - 2026 के दौरान सौंफ का निर्यात 8318 टन का किया गया है और निर्यात से प्राप्त आय 124 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-जून - 2025 में निर्यात 8907 टन का हुआ था और निर्यात से प्राप्त आय 117.43 करोड़ की रही थी। वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान सौंफ का कुल निर्यात 33038 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 421.22 करोड़ की रही थी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38843</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 19:18:36 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बर्मा में कीमतें गिरने और कमजोर मांग से उड़द में गिरावट जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">घरेलू बाजार में दाल मिलों की कमजोर मांग और बर्मा में कीमतों में गिरावट के चलते उड़द के भावों में लगातार नरमी का रुख बना हुआ है। विदेशी बाजार में कीमतें घटने से घरेलू बाजार की धारणा प्रभावित हुई है, वहीं स्टॉकिस्टों की बिकवाली जारी रहने और दाल मिलों की सीमित खरीदारी से बाजार पर दबाव बढ़ा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बर्मा में आज उड़द एफएक्यू (FAQ) के भाव में 5 डॉलर प्रति टन तथा एसक्यू (SQ) के भाव में 10 डॉलर प्रति टन की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद एफएक्यू के भाव घटकर 925 डॉलर प्रति टन और एसक्यू के भाव 995 डॉलर प्रति टन रह गए। विदेशी बाजार में आई इस नरमी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिल रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">घरेलू बाजार में दाल मिलें फिलहाल अपनी जरूरत के अनुसार ही उड़द की खरीद कर रही हैं। मांग कमजोर रहने और स्टॉकिस्टों की बिकवाली का दबाव बने रहने से चेन्नई में उड़द एफएक्यू के भाव ₹150 प्रति क्विंटल तथा एसक्यू के भाव ₹125 प्रति क्विंटल घट गए। वहीं, ब्राजील उड़द में ₹200 प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद चेन्नई में उड़द एफएक्यू के भाव ₹9,350 प्रति क्विंटल, एसक्यू के भाव ₹9,775 प्रति क्विंटल तथा ब्राजील उड़द के भाव ₹9,900 प्रति क्विंटल रह गए।</span></p><p>बाजार विश्लेषण: फिलहाल उड़द बाजार में कमजोर मांग, स्टॉकिस्टों की बिकवाली और बर्मा में घटते भाव प्रमुख दबाव कारक बने हुए हैं। दाल मिलों की सीमित खरीदारी के कारण बाजार में तेजी को समर्थन नहीं मिल रहा है। आगे कीमतों की दिशा मुख्य रूप से विदेशी बाजार के रुझान, घरेलू दाल मिलों की मांग और स्टॉकिस्टों की बिकवाली पर निर्भर करेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38841</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 18:49:04 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कमजोर मांग और आयातकों की बिकवाली से तुवर में गिरावट जारी, चेन्नई लेमन ₹150 टूटी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-150-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">घरेलू बाजार में ग्राहकी का अभाव बने रहने से तुवर की कीमतों में आज भी नरमी का रुख बना हुआ है। तुवर दाल में मांग कमजोर रहने के कारण दाल मिलर्स की लिवाली सीमित बनी हुई है, जिससे बाजार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पा रहा है। वहीं, आयातकों द्वारा अफ्रीकी देशों और बर्मा की तुवर की बिकवाली बढ़ाए जाने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है।</span></p><p>हालांकि, आयातित तुवर के मुकाबले देसी तुवर में बिकवाली का दबाव अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है, लेकिन दाल मिलर्स की सीमित खरीदारी के कारण बाजार में तेजी की धारणा कमजोर पड़ रही है।</p><p>कमजोर लिवाली के चलते अफ्रीकी तुवर की विभिन्न किस्मों में आज ₹100 प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चेन्नई में लेमन तुवर के भाव ₹150 प्रति क्विंटल घट गए। गिरावट के बाद मुंबई में मोजाम्बिक सफेद तुवर ₹7,950–8,100 प्रति क्विंटल, गजरी तुवर ₹7,850–8,350 प्रति क्विंटल, मलावी तुवर ₹7,200–7,900 प्रति क्विंटल तथा अरुषा तुवर ₹8,400 प्रति क्विंटल रह गई। वहीं, चेन्नई में लेमन तुवर के भाव घटकर ₹9,400 प्रति क्विंटल पर आ गए।</p><p><b>बाजार विश्लेषण:</b></p><p> फिलहाल तुवर बाजार में कमजोर ग्राहकी, दाल मिलर्स की सीमित लिवाली और आयातकों की बढ़ती बिकवाली प्रमुख दबाव कारक बने हुए हैं। आयातित तुवर की उपलब्धता और बिकवाली बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जबकि देसी तुवर में अपेक्षाकृत कम बिकवाली से इसे कुछ समर्थन मिल सकता है। आगामी दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से दाल की मांग, आयातित माल की बिकवाली और दाल मिलर्स की खरीदारी पर निर्भर करेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38839</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कमजोर ग्राहकी से चना बाजार में गिरावट जारी, दिल्ली में ₹125 तक टूटे भाव]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-125-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">घरेलू बाजार में ग्राहकी का अभाव बने रहने से चना की कीमतों में आज भी नरमी का रुख बना हुआ है। चना दाल और बेसन में मांग कमजोर रहने के कारण दाल मिलर्स की लिवाली सीमित बनी हुई है, जिससे चना बाजार को समर्थन नहीं मिल पा रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">वहीं, नाफेड की बिडिंग में कम भावों पर कारोबार होने का असर भी बाजार की धारणा पर दिखाई दे रहा है। फिलहाल मांग में सुधार नहीं होने और दाल मिलर्स की खरीद कमजोर रहने से चना की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">दाल मिलर्स की कमजोर मांग के चलते दिल्ली में चना के भाव ₹100 से ₹125 प्रति क्विंटल तक घट गए। गिरावट के बाद मध्य प्रदेश लाइन का चना ₹7,200–7,225 प्रति क्विंटल तथा राजस्थान लाइन का चना ₹7,275–7,300 प्रति क्विंटल रह गया। जयपुर में भी चना के भाव ₹100 घटकर ₹7,400 प्रति क्विंटल पर आ गए। अन्य प्रमुख बाजारों में भी मंदी का रुख देखने को मिला। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">कमजोर लिवाली के कारण कटनी में चना ₹125 घटकर ₹7,200–7,250 प्रति क्विंटल रह गया। अकोला में भी ₹125 की गिरावट के साथ भाव ₹7,550–7,575 प्रति क्विंटल पर आ गए। आयातित चना बाजार में भी मांग कमजोर रहने से कीमतों पर दबाव बना रहा। मुंबई में तंजानिया चना ₹50 घटकर ₹7,250–7,300 प्रति क्विंटल तथा ऑस्ट्रेलियाई चना ₹7,400 प्रति क्विंटल रह गया। मुंद्रा में ऑस्ट्रेलियाई चना का भाव ₹7,300 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।</span></p><p>बाजार विश्लेषण: चना बाजार में फिलहाल मांग की कमी प्रमुख कमजोरी बनी हुई है। चना दाल और बेसन की बिक्री में सुधार नहीं होने से दाल मिलर्स की खरीद सीमित है। साथ ही, नाफेड की बिडिंग में कम भावों का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। आगे कीमतों की दिशा दाल मिलों की मांग, नाफेड की बिक्री और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगी। मांग में सुधार नहीं होने तक बाजार में दबाव बने रहने की संभावना है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38837</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 18:24:45 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मक्का के औद्योगिक उपयोग में नियमित वृद्धि की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। मक्का अब केवल मोटे अनाजों के संवर्ग का एक सामान्य उत्पाद नहीं रह गया है बल्कि औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन भी बन गया है। कुछ वर्ष पूर्व तक मक्का का उपयोग खाद्य उद्देश्य, पशु आहार पोल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण में हो रहा था मगर अब एथनॉल उत्पादन में इसका सर्वाधिक इस्तेमाल होने लगा है इसके फलस्वरूप निर्यात उद्देश्य के लिए मक्का का स्टॉक कम बच रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">सरकारी तौर पर मक्का के उत्पादन संवर्धन को भारी प्रोत्साहन दिया जा रहा था। इसके चलते इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण मोटे अनाज का उत्पादन 2024-25 सीजन के 434 लाख टन से उछलकर 2025-26 के सीजन में 550 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।&nbsp;</span></p><p>मक्का में एक रणनीतिक एनर्जी पावर हाउस बनने की क्षमता है। कृषि उत्पादों से जैव ऊर्जा प्रदान करने में पहले गन्ना आगे था मगर अब मक्का उससे काफी आगे निकल चुका है। इसी तरह पॉल्ट्री उद्योग तथा स्टार्च निर्माण में भी मक्का की खपत दिनों दिन बढ़ रही है।</p><p> सरकार ने इस बार मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 10 रुपए प्रति क्विंटल का मामूली इजाफा किया है जिससे इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट गया। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान बिहार एवं गुजरात आदि में किसान मक्का की खेती काफी उम्मीद से करते हैं इसलिए उसे निराश नहीं होने देना चाहिए।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38833</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 17:54:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[ब्राजील में सोयाबीन का उत्पादन 12 लाख टन बढ़ने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-12-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">ब्रासीलिया। लैटिन अमरीकी देश- ब्राजील की संघीय एजेंसी कोनाब ने अपनी पहली समीक्षा रिपोर्ट में 2026-27 सीजन के दौरान सोयाबीन का घरेलू उत्पादन बढ़कर 18.16 करोड़ टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जो 2025-26 सीजन के समीक्षित उत्पादन 18.04 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर से 0.7 प्रतिशत या 12 लाख टन अधिक है। उल्लेखनीय है कि ब्राजील दुनिया में सोयाबीन का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है। वहां इसकी बिजाई अभी जारी है।&nbsp;&nbsp;</span></p><p>कोनाब की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 सीजन के दौरान ब्राजील में सोयाबीन का कुल बिजाई क्षेत्र 493 लाख हेक्टेयर (1217 लाख एकड़) पर पहुंचने की संभावना है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर फसल की औसत उपज दर 3683 किलो प्रति हेक्टेयर (54.8 बुशेल प्रति एकड़) पर पहुंच सकी है। पिछले साल की तुलना में चालू सीजन के दौरान सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र में महज 14 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है जो पिछले दो दशक में सबसे कम है। </p><p>दूसरी ओर औसत उपज दर 0.4 बुशेल प्रति एकड़ नीचे रहने का अनुमान लगाया गया है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो 2026-27 सीजन के दौरान ब्राजील में सोयाबीन का सकल उत्पादन 1816 लाख टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।&nbsp;</p><p>ब्राजील में सितम्बर के मध्य से सोयाबीन फसल की बिजाई शुरू हो जाती है जो दिसम्बर के अंत तक जारी रहती है। आमतौर पर मध्य जनवरी से वहां इसकी नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो जाती है जबकि मार्च में यह शीर्ष पर पहुंचती है। सरकारी नियम के अनुसार मध्य मई से पूर्व देश में सोयाबीन फसल की कटाई-तैयारी पूरी हो जानी चाहिए और 15 मई के बाद कहीं भी सोयाबीन का एक भी जीवित पौधा नहीं रहना चाहिए।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38831</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 17:34:09 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दक्षिण भारत में वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहे कम दाब के क्षेत्र के प्रभाव से तमिलनाडु, पांडीचेरी एवं कराईकल में अत्यन्त भारी वर्षा होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर अगले सप्ताह भी एक कम दाब का क्षेत्र बनने तथा सघन होने की संभावना है जिससे वर्षा का दौर आगे भी जारी रहने की उम्मीद है इससे दक्षिणी राज्यों में दूर-दूर तक अच्छी वर्षा हो सकती है।&nbsp;</span></p><p>मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल तटीय पट्टी में दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश के कालावी से लेकर तमिलनाडु के कुड्डालोर तक और सम्पूर्ण पाक स्ट्रेट तक कम ऊंचाई वाले सघन बदल छाए हुए हैं जो निकटवर्ती बंगाल की खाड़ी के ऊपर निर्मित कम दाब के क्षेत्र की वजह से बने हैं। दक्षिणी प्रायद्वीप में उत्तर पूर्व मानसून काफी उग्र रूप में सक्रिय है जिससे कई इलाकों में अत्यन्त जोरदार बारिश हो रही है और आगे भी इसका सिलसिला जारी रह सकता है।&nbsp;</p><p>दक्षिणी-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और इसके समीपवर्ती तमिलनाडु के पास एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है जिससे हवा का तेज प्रवाह भी संभव है। एक ट्रफ उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा जिससे कई क्षेत्रों में भारी वर्षा होने की उम्मीद है। इससे न केवल खरीफ फसलों को राहत मिलेगी बल्कि रबी फसलों की बिजाई के लिए खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश भी मौजूद रह सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38828</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 17:20:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[शुरुआती कारोबार में रुपया 29 पैसे मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-29-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। घरेलू बाजार में मौजूद सकारात्मक धारणा तथा भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग- समर्थन के सहारे भारतीय रुपया आरम्भिक कारोबार&nbsp; के दौरान अमरीकी डॉलर की तुलना में 29 पैसे मजबूत हो गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इससे 1 डॉलर का मूल्य घटकर 94.62 रुपए पर आ गया। रुपए की मजबूती से विदेशी वस्तुओं के आयात का खर्च घटता है जबकि भारतीय उत्पादों के निर्यात से होने वाली आमदनी बढ़ जाती है। लेकिन रुपया के मजबूत होने से भारतीय उत्पादों की खरीद के प्रति विदेशी आयातकों की दिलचस्पी घट जाती है।&nbsp;</span></p><p>मुद्रा बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि एक अग्रणी कम्पनी का आईपीओ सार्वजनिक खरीद के लिए जारी होने से बाहर से देश में डॉलर का प्रवाह बढ़ गया जिससे रुपया को मजबूती प्राप्त हुई। </p><p>लेकिन क्रूड खनिज तेल की कीमतों में हुई वृद्धि तथा अमरीकी डॉलर की मजबूती के कारण रुपया की विनिमय दर में सीमित सुधार ही आ सका। इंटर बैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 94.78 के अंक पर खुला और मजबूत होते हुए 94.62 के अंक पर आया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38825</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 16:59:24 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मक्का से निर्मित एथनॉल के मूल्य में कटौती से डिस्टीलरीज नाखुश]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने एक तरफ एथनॉल के निर्माण में गन्ना जूस, शुगर सीरप एवं बी-हैवी शीरा के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है जिससे इस एथनॉल के निर्माण में संलग्न डिस्टीलरीज की परेशानी बढ़ जाएगी तो दूसरी ओर मक्का से निर्मित एथनॉल के खरीद मूल्य में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती भी कर दी है जिससे अनाज आधारित डिस्टीलरीज नाखुश और असंतुष्ट है क्योंकि सरकार के इस निर्णय से उसे आर्थिक नुकसान होगा।&nbsp;</span></p><p>दिलचस्प तथ्य यह है कि मक्का से निर्मित एथनॉल के खरीद मूल्य में हुई कटौती का चीनी उद्योग ने स्वागत किया है। उद्योग ने साथ ही साथ सरकार को आगाह किया है कि किसी भी एथनॉल प्लांट को किसी भी स्तर पर विशेष प्राथमिकता और प्रोत्साहन देने से भेदभाव उत्पन्न होगा इसलिए सभी प्लांटों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।</p><p>ध्यान देने की बात है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू होने के बाद से पहली बार तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा मक्का से निर्मित एथनॉल के खरीद मूल्य में कटौती की गई है। यद्यपि शुरुआती चरण के दौरान 2022-23 के मार्केटंग सीजन के लिए इसका खरीद मूल्य नीचे स्तर पर निर्धारित हुआ था लेकिन बाद के सीजन में इसे क्रमिक रूप से बढ़ाया गया। अब इसे कुछ घटाने का निर्णय लिया गया है।&nbsp;</p><p>हालांकि 2026-27 सीजन के लिए सी-हैवी शीरा से निर्मित एथनॉल की खरीद का मूल्य 57.97 रुपए प्रति लीटर तथा क्षतिग्रस्त अनाज (टूटे चावल) से उत्पादित एथनॉल का मूल्य 64 रुपए प्रति लीटर के पिछले स्तर पर ही बरकरार रखा&nbsp; गया है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन मक्का से निर्मित एथनॉल का मूल्य घटा दिया गया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38813</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 16:30:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों में नई मूंगफली की जोरदार आवक]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">झांसी। उत्तर प्रदेश में खरीफ कालीन मूंगफली के नए माल की जोरदार आपूर्ति शुरू हो चुकी है और किसानों को अपने उत्पाद के भाव भी अच्छे मिल रहे हैं। राज्य की प्रमुख मंडियों- झांसी, महोबा, मऊरानीपुर, बेलाताल एवं हरपालपुर आदि में नई मूंगफली भारी मात्रा में पहुंच रही है और खरीदार इसकी लिवाली में अच्छी दिलचस्पी भी दिखा रहे हैं।&nbsp;</span></p><p>तमाम मंडियों में काफी अच्छी चहल-पहल एवं रौनकता देखी जा रही है। यद्यपि कहीं-कहीं मूंगफली में नमी का अंश सामान्य (स्वीकृत) स्तर से कुछ ज्यादा बताया जा रहा है मगर फिर भी उसकी खरीद-बिक्री में कोई कठिनाई नहीं हो रही है। आमतौर पर इस बार मूंगफली की क्वालिटी काफी अच्छी है क्योंकि मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल रहने से दाने का विकास बेहतर ढंग से हुआ।</p><p>मंडियों में खरीफ सीजन की अन्य दलहन-तिलहन फसलों के नए माल की भी अच्छी आवक होने लगी है। इसमें तिल, उड़द एवं मूंग आदि शामिल है। किसानों एवं व्यापरियों की सक्रियता के कारण इसकी अच्छी खरीद बिक्री भी हो रही है।&nbsp;</p><p>झांसी के भोजला विशिष्ट गपला मंडी में नई मूंगफली की आपूर्ति नियमित रूप से बढ़ती जा रही है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार कुछ दिन पूर्व तक भोजला मंडी में 6 से 8 हजार क्विंटल मूंगफली की औसत दैनिक आवक हो रही थी जो वर्तमान समय में करीब दोगुना बढ़कर 16 हजार क्विंटल के आसपास पहुंच गई है। </p><p>उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती बुंदेलखंड संभाग में मूंगफली की खेती खरीफ सीजन में बड़े पैमाने पर होती है। इस बार वहां शानदार उत्पादन होने के संकेत मिल रहे हैं। </p><p>मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसान भी अपनी मूंगफली बेचने के लिए भोजला मंडी में पहुंच रहे हैं जिससे आढ़त पर इसका अम्बार लगने लगा है। वहां क्वालिटी एवं नमी की उपस्थिति के आधार पर मूंगफली का भाव 5000 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38811</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 16:08:07 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दक्षिण भारत में और अधिक बारिश की आवश्यकता]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। हालांकि उत्तर-पूर्व मानसून 16 अक्टूबर से ही दक्षिण भारत में सक्रिय है और वहां आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल एवं पांडीचेरी जैसे राज्यों में अच्छी वर्षा भी हुई है जिससे खरीफ फसलों को सूखे से कुछ राहत मिली है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">लेकिन कृषि विषेशज्ञों का कहना है कि दक्षिणी प्रायद्वीप में अभी और बारिश की आवश्यकता है। दरअसल दक्षिण पश्चिम मानसून के सीजन में उपरोक्त राज्यों में वर्षा सामान्य औसत से काफी कम हुई और तापमान काफी ऊंचा रहा जिससे खेतों की मिटटी में नमी गायब होने लगी। इससे खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति में बाधा पड़ी।&nbsp;</span></p><p>कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के अधिकांश भाग को पहले ही सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। इन दोनों प्रांतों में खासकर तुवर, गन्ना, कपास एवं सोयाबीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। </p><p>सूखे की वजह से इन फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है। इतना ही नहीं बल्कि नमी के अभाव के कारण वहां रबी फसलों की बिजाई में भी काफी देर होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।</p><p> दक्षिणी राज्यों में हाल की बारिश से स्थिति में कुछ सुधार हुआ है मगर महाराष्ट्र में सूखे की हालत चिंताजनक बनी हुई है। उत्तरी भारत का परिदृश्य अपेक्षाकृत बेहतर है और यहां रबी फसलों की बिजाई सही समय पर आरंभ हो चुकी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38803</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 15:45:42 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूस से निर्यात में भारी गिरावट के कारण गेहूं के मूल्य में तेजी की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मास्को। रूस एवं यूक्रेन के बीच जारी भयंकर जंग के कारण इन दोनों देशों से अन्य कृषि उत्पादों के साथ गेहूं का निर्यात शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इससे वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति- उपलब्धता की स्थिति जटिल होने तथा कीमतों में तेजी आने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि रूस दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा निर्यातक एवं तीसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है जबकि यूक्रेन से भी भारी मात्रा में गेहूं का निर्यात होता है।</span></p><p>एशिया तथा अफ्रीका के अनेक देश रूस से विशाल मात्रा में गेहूं का आयात करते हैं जिसमें मिस्र, तुर्की, बांग्ला देश एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) आदि मुख्य रूप से शामिल है। </p><p>रूस से करीब 70 प्रतिशत कृषि उत्पादों का निर्यात शिपमेंट काला सागर क्षेत्र के बंदरगाहों एवं जलमार्ग से होता है जो अभी लगभग बंद है। </p><p>रूस और यूक्रेन पिछले कुछ महीनों से एक-दूसरे के बंदरगाहों और माल-वाहक जहाजों पर भीषण बमबारी कर रहे हैं जिससे वह समुद्री मार्ग अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। </p><p>जहां तक यूक्रेन का सवाल है तो वहां से भी गेहूं के निर्यात में जबरदस्त गिरावट आ रही है। यूक्रेन से करीब 85 प्रतिशत कृषि उत्पादों का शिपमेंट काला सागर के जलमार्ग से होता है। </p><p>सामान्य मासिक औसत की तुलना में अगस्त 2026 के दौरान रूस से गेहूं के निर्यात में 60 प्रतिशत एवं यूक्रेन से शिपमेंट में 66 प्रतिशत की भारी कमी आ गई।</p><p> सितम्बर में भी निर्यात प्रदर्शन काफी कमजोर रहा और अक्टूबर में भी स्थिति में ज्यादा सुधार आने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। जो देश रूस-यूक्रेन से गेहूं की आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर थे उन्हें अब दूसरे निर्यातक देशों से इसका आयात करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38801</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 15:28:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भारतीय बंदरगाहों पर खाद्य तेलों के स्टॉक में अच्छी बढ़ोत्तरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। हालांकि घरेलू प्रभाव में खाद्य तेलों का भाव ऊंचा एवं तेज है लेकिन इसका कारण आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल होना नहीं बल्कि त्यौहारी सीजन की मजबूत मांग एवं निर्यातक देशों में ऊंची कीमत माना जा रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">सूरजमुखी तेल के आयात में भारी गिरावट आ रही है लेकिन सोयाबीन तेल का आयात बढ़ रहा है। पाम तेल का आयात लगभग सामान्य ढंग से हो रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">केन्द्र सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 5-10 प्रतिशत की कटौती कर दी है लेकिन कीमतों पर इसका कोई खास असर नहीं देखा जा रहा है। सरसों तेल एवं मूंगफली तेल के दाम में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है।&nbsp;</span></p><p>उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारतीय बंदरगाहों पर 30 सितम्बर 2026 को कुल 11,67,970 टन खाद्य तेलों का स्टॉक मौजूद था जो 15 अक्टूबर 2026 को 12.66 प्रतिशत बढ़कर 13,15,838 टन पर पहुंच गया। </p><p>इसके तहत क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का स्टॉक 4,97,590 टन से सुधरकर 5,32,497 टन, आरबीडी पामोलीन का स्टॉक 18,717 टन से सुधरकर 22,936 टन, क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल (सीडी एसबीओ) का स्टॉक 4,10,848 टन से उछलकर 4,66,410 टन और क्रूड सूरजमुखी तेल का स्टॉक 2,29,241 टन से बढ़कर 2,74,946 टन पर पहुंच गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38792</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:56:53 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भारत एवं यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-100-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारत तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच द्विपक्षीय व्यापार में नियमित रूप से भारी बढ़ोत्तरी हो रही है और अब यह 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। दोनों देश अपनी रणनीतिक भागीदारी की अहमियत को अच्छी तरह समझते हैं जिससे कारोबार तथा निवेश के नए-नए अवसर सामने आ रहे हैं। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">हालांकि ईरान अमरीका युद्ध के कारण पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र में अशांति-अस्थिरता का महोल बना हुआ है लेकिन संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत का व्यापार लगातार जारी है।&nbsp;</span></p><p>चालू सप्ताह के प्रथम दिन यूएई के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री ने एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल के साथ भारत का दो दिवसीय दौरा किया था। 19-20 अक्टूबर के इस भारत प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश से सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और बाधाओं तथा चुनौतियों की पहचान करके उसे समाप्त करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।&nbsp;</p><p>उल्लेखनीय है कि भारत से यूएई को अन्य वस्तुओं के अलावा बासमती चावल तथा मसालों का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जाता है जबकि वहां से भारत में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस सहित कुछ अन्य उत्पाद मंगाए जाते हैं। </p><p>प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में द्विपक्षीय या पारस्परिक सहयोग में हो रही नियमित प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।&nbsp;</p><p>भारत ओर यूएई के बीच व्यापारिक सम्बन्ध काफी गहरे एवं मजबूत बने हुए हैं और कारोबार का दायरा बढ़ता जा रहा है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38790</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:34:16 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[प्रीमियम क्वालिटी के गैर बासमती धान की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। प्रीमियम क्वालिटी (फाइन या 'ए' ग्रेड) गैर बासमती धान का भाव फिलहाल सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तुलना में कम से कम 1000 रुपए प्रति क्विंटल ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को तो आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है लेकिन आम उपभोक्ताओं को चावल का ऊंचा दाम चुकाना पड़ेगा।&nbsp;</span></p><p>व्यापार विश्लेषकों के अनुसार अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश कम होने के कारण सोना मसूरी एवं कोलम जैसी लोकप्रिय किस्मों के फाइन ग्रेड वाले धान का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके फलस्वरूप कीमतों में भारी तेजी देखी जा रही है। वर्तमान समय में 'ए' ग्रेड धान का भाव उछलकर 3600-3700 रुपए प्रति क्विंटल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है जो एमएसपी की तुलना में कम से कम 1000 रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा है। फाइन ग्रेड के धान का यह अब तक का सबसे ऊंचा मूल्य स्तर है।&nbsp;</p><p>आंध्र प्रदेश की कुछ मंडियों में बीपीटी धान का मॉडल मूल्य फिलहाल 3600 से 4500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है जो नया रिकॉर्ड स्तर है। इसी तरह कर्नाटक की अधिकांश थोक मंडियों में इस धान का भाव 3000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊंचा चल रहा है। कहीं-कहीं यह 5200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है जो 2461 रुपए प्रति क्विंटल के एमएसपी से बहुत ऊंचा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38788</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 12:57:28 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी का उत्पादन 270-280 लाख टन के बीच होने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-270-280-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी ने 2026-27 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन 270-280 लाख टन के बीच होने का अनुमान लगाया है जो 2025-26 सीजन के उत्पादन के लगभग बराबर ही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">पिछले मार्केटिंग सीजन में एथनॉल के निर्माण में लगभग 30 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना अवयवों का इस्तेमाल हुआ था जबकि चालू सीजन के लिए सरकार ने इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। 2025-26 के सीजन में लगभग 276 लाख टन चीनी का घरेलू उत्पादन आंका गया। यदि एथनॉल निर्माण में गन्ना अवयवों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता तो 2026-27 सीजन में चीनी का उत्पादन काफी घट सकता था।&nbsp;</span></p><p>केन्द्र सरकार ने 2026-27 के आपूर्ति वर्ष (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान सी-हैवी शीरा को छोड़कर अन्य गन्ना अवयवों-गन्ना जूस, शुगर सीरप एवं बी-हैवी शीरा का इस्तेमाल एथनॉल के निर्माण में प्रतिबंधित कर दिया है। इसका उद्देश्य चीनी का उत्पादन बढ़ाना, घरेलू बाजार में इसकी पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता का सुनिश्चित करना और कीमतों में संभावित तेजी पर अंकुश लगाना है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष अगस्त में चीनी का घरेलू बाजार भाव उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था और अब भी काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार है।&nbsp;</p><p>अल नीनो के प्रभाव एवं दक्षिण-पश्चिम मानसून की कम वर्षा के कारण इस वर्ष महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों में गन्ना की फसल को नुकसान होने के संकेत मिल रहे हैं। कुछ अन्य प्रांतों में भी फसल की हालत उत्साहवर्धक नहीं है। इससे गन्ना की औसत उपज दर एवं गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में कमी आ सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38786</guid>				
                <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 12:15:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रबी कालीन मसाला फसलों की बिजाई में घट-बढ़ संभव]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">अहमदाबाद। रबी सीजन के दौरान जिन मसाला फसलों की खेती होती है उसमें जीरा, धनिया, मेथी, सौंफ एवं लहसुन आदि मुख्य रूप से शामिल है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्य- गुजरात, राजस्थान एवं मध्य प्रदेश है। वहां इन मसाला फसलों की बिजाई शीघ्र ही जोर पकड़ने की संभावना है।&nbsp;</span></p><p>जानकारों का मानना है कि पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान जीरा के उत्पादन क्षेत्र में कुछ कमी आ सकती है क्योंकि गुजरात एवं राजस्थान के महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में बारिश कम होने से खेतों की मिटटी में नमी का अभाव देखा जा रहा है। इसके अलावा कमजोर निर्यात प्रदर्शन से जीरा की कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं देखी जा रही है जिससे किसानों का उत्साह कुछ घट सकता है।&nbsp;</p><p>दूसरी ओर धनिया, मेथी, सौंफ एवं सेलेरी के बिजाई क्षेत्र में कुछ इजाफा होने की उम्मीद है। इसी तरह अदरक एवं लहसुन के दाम में आई तेजी से इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षक बढ़ाने के आसार हैं। </p><p>पिछले साल की तुलना में इस वर्ष सितम्बर के दौरान हल्दी का थोक मूल्य 23.37 प्रतिशत तथा सूखी लालमिर्च का भाव 36 प्रतिशत&nbsp; ऊंचा रहा। लेकिन इसकी बिजाई खरीफ सीजन में होती है। अदरक (सौंफ) एवं लहसुन का दाम आगे और बढ़ने की संभावना है।&nbsp;</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38775</guid>				
                <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 13:51:48 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मिस्र में रूस-यूक्रेन से गेहूं का आयात घटने के संकेत]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">काहिरा। अफ्रीकी देश मिस्र (इजिप्ट) में रूस-यूक्रेन से गेहूं के आयात में कमी आ रही है क्योंकि काला सागर का जलमार्ग असुरक्षित हो गया है और वहां से माल वाहक जहाजों का आवागमन ठप्प पड़ गया है।</span></p><p>उल्लेखनीय है कि रूस से गेहूं का सर्वाधिक निर्यात मिस्र को ही होता है जबकि तुर्की दूसरे नम्बर पर रहता है। रूस और यूक्रेन का अधिकांश समुद्री व्यापार काला सागर क्षेत्र के बंदरगाहों से होता है। परम्परागत रूप से मिस्र को दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा आयातक देश माना जाता है।&nbsp;</p><p>दिलचस्प तथ्य यह है कि मिस्र काला सागर क्षेत्र से गेहूं की आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर रहता है और इसलिए अन्य निर्यातक देशों से इसके आयात का ज्यादा प्रयास नहीं करता है।</p><p> रूस-यूक्रेन से आपूर्ति की अनिश्चितता, सामुद्रिक परिवहन खर्च में वृद्धि तथा वैकल्पिक निर्यात की सुविधा के बावजूद मिस्र के आयातक गेहूं मंगाने के लिए तैयार नहीं है और काला सागर क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं मिस्र में लगभग 85 प्रतिशत गेहूं का आयात रूस तथा यूक्रेन से होता है। अगस्त में रूस से गेहूं का निर्यात 60 प्रतिशत घट गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/38773</guid>				
                <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 13:49:28 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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