<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss  xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">

    <channel>
        <atom:link type="application/rss+xml" rel="self" href="https://igrain.in/feeds"/>
        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:29:00 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[विभिन्न फसलों के बीज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने का दावा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार का दावा है कि देश में खरीफ के साथ-साथ रबी कालीन फसलों के भी बीज का पर्याप्त भंडार मौजूद है तथा आकस्मिक स्थिति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इसके आरक्षित स्टॉक की व्यवस्था की गई है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">यदि किसी क्षेत्र में सूखा अथवा बाढ़ के प्रकोप से पहली बिजाई की फसल प्रभावित होगी तो वहां दोबारा खेती के लिए तत्काल किसानों को उपयुक्त फसल का बीज उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे किसानों को राहत मिल सकती है।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय कृषि मंत्री का कहना है कि बीजों की आपूर्ति एवं उपलब्धता के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इस बार मानसून कमजोर रह सकता है जैसा की मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है। </p><p>कम बारिश वाले इलाकों में ऐसी फसलों की खेती पर जोर दिया जाए जिसे सिंचाई के लिए अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत पड़ती है। तमाम फसलों के बीज, उपयुक्त, उपयोगी एवं प्रमाणित होने चाहिए।</p><p>खरीफ सीजन में मुख्यतः धान, अरहर (तुवर), उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, कपास तथा जूट आदि की खेती होती है जबकि सीमित क्षेत्र में कई अन्य फसलों की बिजाई भी की जाती है। धान की फसल को सिंचाई के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33402</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:40:56 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो के संकट से निपटने के लिए केन्द्र की जोरदार तैयारी शुरू]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। अल नीनो मौसम चक्र के संभावित प्रकोप तथा मानसून सीजन के दौरान बारिश कम होने की संभावना जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए केन्द्र सरकार ने जोरदार तैयारी आरंभ कर दी है। केन्द्रीय कृषि मंत्री इसके लिए ज्यादा तत्पर और सक्रिय हैं। उनका कहना है कि हर हाल में किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।&nbsp;</span></p><p>कृषि मंत्री के अनुसार यह समय घबराने या चिंतित होने का नहीं बल्कि आवश्यकता के अनुरूप ठोस एवं व्यावहारिक&nbsp; तैयारी करने का है। जिन राज्यों / जिलों में बारिश कम होने की संभावना है वहां विशेष निगरानी एवं त्वरित एक्शन की जरूरत है। अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही सरकार का ध्यान बीजों की आपूर्ति पानी की उपलब्धता, नमी तथा वैकल्पिक फसल योजना पर केन्द्रित है ताकि किसानों को सही समय पर सहायता प्रदान की जा सके।&nbsp;</p><p>कृषि मंत्री के मुताबिक, फिलहाल देश भर के प्रमुख बांधों एवं जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य है और इससे खरीफ फसलों की खेती को अच्छा सहारा मिल सकता है। कृषि मंत्री ने किसानों तक मोबाइल एडवायजरी पहुंचाने रोगों-कीड़ों&nbsp; के बारे में सूचना उपलब्ध करवाने तथा सही फसल का चुनाव करने की सलाह देने पर जोर देते हुए कहा है कि आयात या आपदा कालीन योजना सिर्फ कागजों एवं फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि वास्तविक धरातल पर इसका सार्थक एवं सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ना चाहिए।</p><p>केन्द्रीय कृषि किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मानसून अल नीनो, पानी की उपलब्धता, बीजों की व्यवस्था एवं संभावित संकट से निपटने के लिए राज्य सरकारों की तैयारी जैसे मुद्दों पर गम्भीरतापूर्वक चिंतन-मनन किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। उनका कहना था कि केन्द्र सरकार अपनी ओर से पूरी तैयारी कर रही है और राज्यों से भी इस मामले में गंभीरता की उम्मीद करती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33400</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:37:50 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वर्ष 2021 के बाद इस बार गेहूं की सर्वाधिक सरकारी खरीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-2021-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 350 लाख टन के करीब पहुंच गई है जो पिछले पांच साल का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पूर्व 2021-22 के रबी मार्केटिंग सीजन में 433 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई थी। उसके बाद खरीद की स्थिति अनियमित रही।&nbsp;</span></p><p>लेकिन इस वर्ष की कुल खरीद में यूआरएस गेहूं का अंश सामान्य औसत क्वालिटी वाले माल से ज्यादा है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान जैसे राज्यों में बेमौसमी वर्षा, आंधी-तूफान तथा कहीं-कहीं ओलावृष्टि के प्रकोप से गेहूं के दाने की क्वालिटी खराब हो गई। </p><p>इसे देखते हुए केन्द्र को राज्य सरकारों के विशेष आग्रह पर गेहूं की गुणवत्ता से सम्बन्धित नियमों-शर्तों में ढील देनी पड़ी और बदरंग, चमकहीन तथा टूटे-चिपटे दाने वाले अनाज की भारी खरीद करनी पड़ी। </p><p>गेहूं की कुल सरकारी खरीद में यूआरएस वाले माल की भागीदारी 236 लाख टन या 67 प्रतिशत रही। केवल मध्य प्रदेश में खरीदा गया गेहूं सामान्य या अच्छी क्वालिटी का रहा।</p><p> वहां अब भी खरीद की प्रक्रिया जारी है। गेहूं की थोड़ी बहुत सरकरी खरीद राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में भी हो रही है जो कुछ समय तक जारी रहेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33398</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:49:07 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अमरीका से अखरोट के निर्यात में जबरदस्त बढ़ोत्तरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">लास एंजिल्स। कैलफोर्निया वालनट बोर्ड की नई शिपमेंट रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में छिलका युक्त अखरोट के निर्यात में जोरदार इजाफा हुआ और चीन सहित अन्य प्रमुख खरीदार देशों की इसमें अच्छी दिलचस्पी रही। लेकिन 2026-27 सीजन के लिए इसके निर्यात प्रदर्शन का परिदृश्य ज्यादा उत्साहवर्द्धक रहने की संभावना नहीं है। चीन के बाजार पर नजर रखने की जरूरत रहेगी। भारत में भी इसका आयात किया जाता है।&nbsp;</span></p><p>बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2025 में कैलिफोर्निया से केवल 43 लाख पौंड अखरोट का निर्यात हुआ था जो अप्रैल 2026 में पांच गुणा से ज्यादा उछलकर 237 लाख पौंड पर पहुंच गया। </p><p>इस तरह अमरीका के घरेलू प्रभाग में भी कैलिफोर्निया से अप्रैल में करीब 29 लाख पौंड अखरोट भेजा गया जो अप्रैल 2025 के डिस्पैच की मात्रा 13 लाख पौंड के दोगुने से ज्यादा रहा। इस तरह अप्रैल में कैलिफोर्निया से कुल 266 लाख पौंड अखरोट को देश-विदेश में भेजा गया जो अप्रैल 2025 की मात्रा 56 लाख पौंड के पांच गुणा से भी अधिक रहा।&nbsp;</p><p>पिछले साल की तुलना में चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान कैलिफोर्निया से अखरोट की कुल निकासी दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई। घरेलू प्रभाग के लिए बिक्री में 48 प्रतिशत का इजाफा हुआ। तुर्की इसका सबसे प्रमुख खरीदार बना रहा जहां अमरीकी अखरोट के निर्यात में करीब पांच गुणा की वृद्धि हुई। </p><p>इसके अलावा मध्य पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के अनेक देशों ने भी अच्छी मात्रा में अमरीकी अखरोट मंगाया। इसमें इराक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अल्जीरिया, मोरक्को एवं लेबनान आदि शामिल है। इस सम्पूर्ण क्षेत्र में अखरोट का निर्यात वर्ष 2025 के 347 लाख पौंड से पांच गुणा से ज्यादा बढ़कर 1729 लाख पौंड पर पहुंच गया।&nbsp;</p><p>2024-25 की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान कैलिफोर्निया से अखरोट का निर्यात तुर्की, इटली, संयुक्त अरब&nbsp; अमीरात, अल्जीरिया, लेबनान, मोरक्को, इराक एवं वियतनाम जैसे देशों में काफी बढ़ गया मगर भारत एवं स्पेन में घट गया। अन्य देशों में स्थिति बेहतर रही।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33396</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:46:16 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रबी कालीन धान की सरकारी खरीद में तेलंगाना की 60 प्रतिशत भागीदारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-60-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख धान- चावल उत्पादक राज्य- तेलंगाना के मुख्यमंत्री का कहना है कि रबी&nbsp; मार्केटिंग सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर धान की जितनी खरीद होती है उसमें अकेले तेलंगाना का योगदान 60 प्रतिशत के करीब रहता है। सरकार द्वारा इस बार 63.65 लाख टन धान खरीदा गया है और इसके मूल्य भुगतान के तौर पर सीधे किसानों के बैंक खाते में 11,903 करोड़ रुपए जमा करवाए गए हैं।</span></p><p>मुख्यमंत्री के मुताबिक बेमौसमी वर्षा एवं आंधी-तूफान के कारण जहां फसल क्षतिग्रस्त हो गई थी वहां भी सरकार ने किसानों को नुकसान से बचाने के लिए करीब 10 हजार टन गीला धान खरीद लिया।&nbsp;</p><p>वर्तमान समय में देश का कोई भी अन्य राज्य धान की खरीद में तेलंगाना का मुकाबले करने की स्थिति में नहीं है। तेलंगाना में खरीफ के साथ-साथ रबी (यासंगी) सीजन में भी धान का विशाल उत्पादन होता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025-26 सीजन के दौरान तेलंगाना में खाद्यान्न का सकल उत्पादन बढ़कर 236.87 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। </p><p>तेलंगाना सरकार द्वारा किसानों को हर तरह का सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे राज्य में धान के साथ-साथ मक्का और कपास के उत्पादन में भी जोरदार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। तेलंगाना केन्द्रीय पूल में चावल का योगदान देना वाला एक अग्रणी राज्य है। वहां दोनों सीजन में इसकी सरकारी खरीद होती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33394</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:00:16 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[समुद्री सतह का तापमान ऊंचा होने से अल नीनो का खतरा बढ़ा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">बोस्टन। संयुक्त राष्ट्र संघ की अधीनस्थ एजेंसी- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यू एम ओ) का कहना है कि प्रशांत महासागर की निचली सतह का तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है जिससे अल नीनो के उत्पन्न होने तथा आगे बढ़ने की रफ्तार बढ़ गई है। ऐसा लगता है कि यह मौसम चक्र दरवाजे पर खड़ा है और कभी भी दस्तक दे सकता है। संगठन के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो के आने की संभावना बढ़कर 80 प्रतिशत पर पहुंच गई है जबकि नवम्बर के बाद भी इसकी सक्रियता जारी रहने के 90 प्रतिशत आसार हैं।</span></p><p>यह स्थिति भारत के लिए चिंताजनक साबित हो सकती है क्योंकि वहां खरीफ फसलों की बिजाई जून से तथा रबी फसलों की खेती अक्टूबर से शुरू हो जाती है। जुलाई-अगस्त में सर्वाधिक बारिश होती है और खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा बिजाई भी की जाती है। इसी तरह रबी फसलों की अधिकांश बिजाई नवम्बर-दिसम्बर में होती है।&nbsp;</p><p>मौसम सम्बन्धी मॉडल्स से जो संकेत मिल रहा है उससे पता चलता है कि अल नीनो आमतौर पर कम से कम सामान्य रहेगा जबकि इसके मजबूत एवं शक्तिशाली बनने की संभावना भी बरकरार रहेगी। वैसे इसकी सर्वोच्च ताकत एवं समयावधि के बारे में अभी कुछ हद तक अनिश्चितता बनी हुई है। सुपर अल नीनो बनेगा या नहीं अथवा कब तक यह चरम अवस्था पर पहुंचेगा- इस सम्बन्ध में निश्चित रूप से कुछ कहना अभी मुश्किल है।&nbsp;</p><p>दुनिया के अधिकांश मौसम पूर्वानुमान केन्द्र जून, जुलाई एवं अगस्त के दौरान सामान्य औसत से ऊंचा तापमान रहने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। अल नीनो की उत्पत्ति के लिए समुद्री सतह पर जितना गर्मी का आधार बिंदु जरुरी है वह गर्मी शीघ्र ही उस स्तर तक पहुंच जाएगी। कुछ देशों में जरूरत से काफी ज्यादा गर्मी पड़ सकती है जिससे वहां सूखे का संकट&nbsp; अधिक गंभीर हो सकता है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33392</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:35:03 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्र में भी पानी का अभाव]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। मई में देश के अधिकांश भागों में मानसून पूर्व की वर्षा का अभाव रहने से बांधों जलाशयों में पानी का स्तर घटकर काफी नीचे आ गया है। इससे खरीफ फसलों की अगैती बिजाई पर असर पड़ सकता है। उत्तरी क्षेत्र के 11 प्रमुख जलाशयों में 7694 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 19.836 बीसीएम का करीब 39 प्रतिशत है। वैसे यह जल भंडार अन्य क्षेत्रों से बेहतर है। कुल भंडारण क्षमता के मुकाबले पानी का स्टॉक पंजाब के बांधों में 59 प्रतिशत, राजस्थान में 44 प्रतिशत तथा हिमाचल प्रदेश में 33 प्रतिशत मौजूद है।&nbsp;</span></p><p>इसी तरह देश के पश्चिमी संभाग में 53 प्रमुख बांधों-सरोवरों में जल स्तर घटकर 13.625 बीसीएम पर आ गया है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 38.094 बीसीएम का 36 प्रतिशत है। </p><p>गोवा के एक मात्र जलाशय में केवल 31 प्रतिशत पानी का भंडार बचा हुआ है जबकि महाराष्ट्र में सिर्फ 28 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद है। गुजरात की स्थिति थोड़ी बेहतर है। वहां बांधों-जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता के मुकाबले 45 प्रतिशत पानी का स्टॉक उपलब्ध है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33390</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:59:00 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[ब्राजील से सोयाबीन का निर्यात नए ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">परानागुआ। लैटिन अमरीकी देश- ब्राजील से चालू वर्ष के दौरान मई के अंत तक सोयाबीन का कुल निर्यात तेजी से बढ़कर 516 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर (इस अवधि तक के लिए ) पहुंच गया जो वर्ष 2025 की समान अवधि के रिकॉर्ड शिपमेंट 515 लाख टन से भी 1 लाख टन ज्यादा है। मई का महीना समाप्त होने से पहले ही इस बार यह उपलब्धि हासिल हो गई थी। इससे वैश्विक बाजार और खासकर चीन में ब्राजीलियन सोयाबीन की जबरदस्त मांग का स्पष्ट संकेत मिलता है।&nbsp;</span></p><p>विदेशी व्यापार सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन का निर्यात नए-नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचता जा रहा है। मई के तीसरे सप्ताह तक वहां से सोयाबीन का निर्यात 113.80 लाख टन पर पहुंच गया था। इस तरह वहां से रोजाना औसतन 7.59 लाख टन सोयाबीन का शिपमेंट हो रहा है। यदि यह सिलसिला आगे भी बरकरार रहा तो मई में कुल निर्यात बढ़कर 151.80 लाख टन पर पहुंच जाएगा। इससे पूर्व मई 2023 के दौरान ब्राजील से कुल 156.58 लाख टन सोयाबीन का रिकॉर्ड निर्यात हुआ था।&nbsp;&nbsp;</p><p>सरकारी एजेंसी कोनाब की अप्रैल रिपोर्ट में 2026 के दौरान ब्राजील से सोयाबीन के सकल निर्यात का अनुमान 1155 लाख टन से बढ़ाकर 1160 लाख टन निर्धारित किया गया था जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। </p><p>उद्योग-व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का अनुमान इससे भी 10 लाख टन ज्यादा यानी 1170 लाख टन का है। वर्ष 2025 के दौरान ब्राजील से कुल 1080 लाख टन सोयाबीन का शिपमेंट हुआ था जिसमें इस बार 80-90 लाख टन का इजाफा हो सकता है।</p><p> उल्लेखनीय है कि ब्राजील दुनिया में सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश है जबकि चीन इसका सबसे प्रमुख खरीदार है। ब्राजील से लगभग 70 प्रतिशत सोयाबीन का निर्यात चीन को होता है।&nbsp;</p><p>रिकॉर्ड उत्पादन के कारण ब्राजील में चालू वर्ष के अंत में सोयाबीन का बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर 103 लाख टन पर पहुंच सकता है। घरेलू क्रशिंग एवं विदेशों में निर्यात भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। वहां सोयाबीन फसल की कटाई-तैयारी समाप्त हो चुकी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33388</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:35:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की जरूरत के अनुमान में कटौती]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन के दौरान पहले यूरिया एवं डीएपी जैसे प्रमुख रासायनिक उर्वरकों की कुल मांग 260 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था लेकिन स्थिति की समीक्षा के बाद उसे 10 लाख टन घटाकर 250 लाख टन निर्धारित कर दिया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव का कहना है कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो मौसम चक्र का प्रकोप रहने की संभावना है जिसे देखते हुए कृषि मंत्रालय से उर्वरकों की जरूरत की पुनर्समीक्षा करने का आग्रह किया गया था। राज्यों के साथ कृषि मंत्रालय ने इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श किया और उसके परिणाम के आधार पर यूरिया एवं डीएपी की मांग का अनुमान 10 लाख टन घटा दिया गया है।&nbsp;</span></p><p>समीक्षा के बाद खरीफ सीजन के लिए यूरिया की मांग का अनुमान 194 लाख टन से 4 लाख टन घटाकर 190 लाख टन तथा डीएपी की जरूरत का अनुमान 66 लाख टन से 6 लाख टन घटाकर 60 लाख टन निर्धारित किया गया है। खरीफ सीजन के लिए सभी किस्मों एवं संवर्गों के रासायनिक उर्वरकों की मांग अब 383.90 लाख टन रहने की संभावना व्यक्त की गई है जबकि वर्तमान समय में 199.80 लाख टन या 52 प्रतिशत उवर्रकों का स्टॉक मौजूद है। आमतौर पर यह स्टॉक 33 प्रतिशत के आसपास रहता है।&nbsp;</p><p>इसके साथ-साथ उर्वरकों का घरेलू उत्पादन एवं आयात भी जारी है। इससे खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। पश्चिम एशिया में संकट उत्पन्न होने के बाद से सरकार को अभी तक 132.40 लाख टन उर्वरकों का अतिरिक्त स्टॉक बनाने में सफलता मिली है जबकि शेष स्टॉक पहले से मौजूद था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33386</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:41:14 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सीजन की पहली तिमाही में 55 लाख टन सरसों की जोरदार आवक]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-55-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जयपुर। थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा होने के कारण सरसों उत्पादक किसानों को इस वर्ष शानदार आमदनी प्राप्त हो रही है इसलिए वे अपने स्टॉक की बिक्री में काफी दिलचस्पी और सक्रियता दिखा रहे हैं। ऊंचे दाम के बावजूद सरसों की खरीद में व्यापारियों एवं तेल मिलर्स का उत्साह बरकरार है।&nbsp;</span></p><p>जयपुर (राजस्थान) के चांदपोल की अनाज मंडी में अवस्थित प्रसिद्ध एवं विश्वसनीय प्रतिष्ठान- मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के प्रबंध निदेशक अनिल चतर द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही यानी मार्च-मई 2026 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर थोक मंडियों में 54.50 लाख टन तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर 50 हजार टन के साथ कुल 55 लाख टन सरसों की विशाल आवक हुई। प्राइवेट मंडियों में मार्च में 19 लाख टन तथा अप्रैल में 20 लाख टन सरसों का स्टॉक पहुंचा जबकि मई में थोक मंडियों में 15.50 लाख टन तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर 50 हजार टन के साथ 16 लाख टन सरसों की आपूर्ति होने का अनुमान लगाया गया है।&nbsp;</p><p>सीजन के आरंभ में 2 लाख टन सरसों का पिछला स्टॉक था जबकि चालू सीजन में 114.25 लाख टन के उत्पादन के साथ इसकी कुल उपलब्धता 116.25 लाख टन पर पहुंची। इसमें से 55 लाख टन की आवक होने के बाद किसानों के पास 61.25 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ है। सरकारी एजेंसियों के पास 50 हजार टन का स्टॉक उपलब्ध है क्योंकि पुराने स्टॉक की बिक्री पहले ही हो चुकी थी।&nbsp;</p><p>तिमाही के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर 44 लाख टन सरसों की क्रशिंग होने का अनुमान है। इसके तहत मार्च में 15 लाख टन, अप्रैल में 16 लाख टन तथा मई में 13 लाख टन की क्रशिंग शामिल है। </p><p>इस तरह व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं मिलर्स / प्रोसेसर्स के पास 12.50 लाख टन, किसानों के पास 61.25 लाख टन तथा सरकारी एजेंसियों के पास 50 हजार टन के साथ देश में 1 जून 2026 को कुल 74.25 लाख टन सरसों का स्टॉक उपलब्ध होने का अनुमान लगाया गया है। मिलर्स / व्यापारियों के स्टॉक में पिछला माल भी शामिल है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33384</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:02:43 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[शीघ्र ही देश में दस्तक दे सकता है मानसून]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। पिछले दिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पूरे विश्वास से कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 2-3 दिनों में केरल के दक्षिणी तट पर पहुंच सकता है क्योंकि इसके लिए तमाम मौसमी परिस्थितियां अनुकूल होने लगी हैं। पश्चिमी विक्षोभ की प्रतिगामी हवा का प्रवाह कमजोर पड़ने के बाद मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है।&nbsp;</span></p><p>वैसे आईएमडी ने चालू वर्ष के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने और दीर्घकालीन औसत के मुकाबले वर्षा 90 प्रतिशत ही होने का अनुमान व्यक्त किया है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने फसल मौसम निगरानी तथा संकट प्रबंधन समूहों का गठन किया है तथा राज्यों को आपदा कालीन योजना तैयार करने के लिए कहा है।&nbsp;</p><p>आमतौर पर मानसून का सीजन 1 जून से आरंभ हो जाता है। इस वर्ष मौसम विभाग ने 26 मई को भारत में मानसून के पहुंचने की संभावना व्यक्त की थी लेकिन मौसमी बाधाओं के कारण यह उस समय नहीं आ सका। अब मानसून के आने की तारीख 4 जून तक निश्चित की गई है। </p><p>अभी मानसून उत्तरी श्रीलंका, लक्ष्यद्वीप, कन्याकुमारी से कुछ दूर बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय है इसलिए भारत पहुंचने में इसे ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए। मानसून की वर्षा खरीफ फसलों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण मानी जाती है जिसमें धान, कपास गन्ना, उड़द, तुवर, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली एवं मक्का आदि शामिल है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33382</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:38:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आयात शुल्क स्थगित होने के बाद रूई के दाम में नरमी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। केन्द्र सरकार द्वारा जून से अक्टूबर 2026 तक के पांच महीनों के लिए रूई पर लागू आयात शुल्क को वापस लेने या स्थगित रखने की घोषणा किए जाने के बाद घरेलू बाजार में इसका भाव नरम पड़ने लगा है। हाल के दिनों में रूई के वैश्विक बाजार मूल्य में भी गिरावट आई है। रूई पर पहले 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ था जो अब स्थगित हो गया है। उधर न्यूयार्क स्थित इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) में चालू सप्ताह के प्रथम दिन यानी 1 जून 2026 को रूई के वायदा मूल्य में मामूली सुधार दर्ज किया गया।&nbsp;</span></p><p>उद्योग-व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों का कहना है कि आयात शुल्क के स्थगन की घोषणा होने के बाद भारतीय टैक्स टाइल मिलों ने रूई की खरीद का अनुबंध शुरू कर दिया है। फिलहाल सीमित मात्रा में इसकी बुकिंग की गई है जबकि आगे इसमें अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है।</p><p>इस बीच केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने 1 जून को अपने स्टॉक की रूई के आधार पर बिक्री मूल्य में एक बार फिर 700 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) की कटौती कर दी है। इससे पूर्व दो चरणों में आधार बिक्री मूल्य को कुल 3000 रुपए प्रति कैंडी घटाया गया था। </p><p>लेकिन इस नई कटौती के बावजूद निगम की रूई की खरीद में मिलर्स एवं व्यापारियों की दिलचस्पी कम रही और 1 जून को केवल 700 गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई का कारोबार हो सका। आईसीई में रूई का वायदा भाव 1.68 प्रतिशत सुधरकर 77.44 सेंट प्रति पौंड पर पहुंच गया।&nbsp;</p><p>व्यापार विश्लेषकों के अनुसार खरीदारों की उदासीनता के कारण रूई के घरेलू बाजार मूल्य पर दबाव बना हुआ है। सीमा शुल्क स्थगित होने के बाद अब खरीदारों को नया विकल्प मिल गया है। </p><p>वे चाहे तो विदेशों से सीधे इसका आयात कर सकते हैं अथवा स्वेदशी रिसेलर्स से इसकी खरीद कर सकते हैं। इसमें स्टॉकिस्टों के साथ-साथ भारतीय कपास निगम और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी शामिल हैं। कपास की बिजाई आरंभ होने वाली है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33380</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:56:20 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[म्यांमार से उड़द एवं तुवर का निर्यात गत वर्ष से पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">रंगून। भारत के पूर्वोत्तर पड़ोसी देश- म्यांमार से इस वर्ष उड़द एवं तुवर का निर्यात गत वर्ष से कुछ पीछे चल रहा है। उद्योग-व्यापार संगठनों के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के शुरूआती पांच महीनों में यानी जनवरी-मई 2026 के दौरान म्यांमार से 3,25,491 टन उड़द का निर्यात हुआ जो गत वर्ष के इन्हीं महीनों के शिपमेंट 3,69,471 टन से 43,980 टन कम है।&nbsp;</span></p><p>उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 की सम्पूर्ण अवधि में म्यांमार से कुल 8.46 लाख टन उड़द का निर्यात हुआ था जो वर्ष 2024 के कुल शिपमेंट 9.04 लाख टन से कम था। म्यांमार से उड़द का अधिकांश निर्यात भारत को होता है जहां इस बार मांग कुछ कमजोर देखी जा रही है।&nbsp;</p><p>जहां तक तुवर का सवाल है तो जनवरी-मई 2026 के पांच महीनों में म्यांमार से इसका कुल निर्यात घटकर 1,05,793 टन पर अटक गया जो 2025 के इन्हीं महीनों के शिपमेंट 153097 टन से करीब 47 हजार टन कम रहा। जनवरी-दिसम्बर 2025 के दौरान म्यांमार से कुल मिलाकर लगभग 3.66 लाख टन तुवर का निर्यात हुआ था </p><p>जबकि वर्ष 2024 की पूरी अवधि में इसकी मात्रा 3 लाख टन के आसपास रही थी। म्यांमार से तुवर का सर्वाधिक निर्यात भी भारत को ही किया जाता है। मई 2025 के दौरान म्यांमार से करीब 65 हजार टन उड़द तथा 17 हजार टन से कुछ अधिक तुवर का निर्यात शिपमेंट किया गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33378</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 10:48:47 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं की सरकारी खरीद संशोधित लक्ष्य से भी ऊपर पहुंची]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद 31 मई 2026 तक बढ़कर 349.92 लाख टन पर पहुंच गई जो संशोधित खरीद लक्ष्य 346 लाख टन से करीब 4 लाख टन, पिछले सीजन की समान अवधि की खरीद 298.20 लाख टन से 51.72 लाख टन तथा गत रबी मार्केटिंग सीजन की कुल खरीद 300.35 लाख टन से 49.57 लाख टन अधिक है। गेहूं की वास्तविक खरीद संशोधित लक्ष्य से 1 प्रतिशत आगे निकल चुकी है।&nbsp;</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले रबी मार्केटिंग सीजन की तुलना में इस बार गेहूं की सरकारी खरीद पंजाब में 119.24 लाख टन से सुधरकर 121.63 लाख टन, हरियाणा में 70.83 लाख टन से बढ़कर 81.21 लाख टन, मध्य प्रदेश में 77.75 लाख टन से उछलकर 104.37 लाख टन पर पहुंच गयी। </p><p>इसी तरह उत्तर प्रदेश में 10.25 लाख टन के मुकाबले 17.21 लाख टन तथा राजस्थान में 19.80 लाख टन की तुलना में 24.32 लाख टन गेहूं खरीदा गया। इसके अलावा बिहार में 36 हजार टन, उत्तराखंड में 9 हजार टन, चंडीगढ़ में 10 हजार टन, गुजरात में 59 हजार टन तथा हिमाचल प्रदेश में 4 हजार टन गेहूं खरीदा गया।&nbsp;</p><p>पंजाब-हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद बंद हो चुकी है जबकि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में अभी जारी है। पंजाब में गेहूं की खरीद नियत लक्ष्य के लगभग बराबर हुई जबकि हरियाणा में 13 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 4 प्रतिशत एवं राजस्थान में 3 प्रतिशत अधिक हो चुकी है। </p><p>अन्य प्रांतों में लक्ष्य से कम गेहूं खरीदा गया है मगर हिमाचल प्रदेश इसका अपवाद है। वहां 3 हजार के नियत लक्ष्य की तुलना में 4 हजार टन गेहूं की खरीद हुई। केन्द्र सरकार को गेहूं खरीद का नया लक्ष्य नियत करना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33376</guid>				
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 10:26:38 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कनाडा और अमरीका में मसूर की बिजाई गत वर्ष से पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विनीपेग। ऊंचे बकाया स्टॉक, कमजोर भाव तथा प्रतिकूल मौसम आदि के कारण कनाडा तथा अमरीका में मसूर की बिजाई की गति इस बार गत वर्ष से कुछ धीमी देखी जा रही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अमरीका में मटर की खेती पर किसान अपेक्षाकृत अधिक जोर दे रहे हैं इसलिए मई का महीना समाप्त होने के बावजूद केवल 75 प्रतिशत चिन्हित क्षेत्र में मसूर की बिजाई पूरी हो सकी है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">कनाडा में रकबा 77 प्रतिशत पर पहुंचा है। दोनों देशों में बिजाई क्षेत्र पिछले साल के साथ-साथ पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से भी कम है। इसकी बिजाई में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण पिछले साल जैसा नहीं देखा जा रहा है क्योंकि आमदनी कम हुई है।&nbsp;</span></p><p>कनाडा में खेतों की मिट्टी में नमी का अंश मसूर की औसत उपज दर के लिए पर्याप्त है और हाल के दिनों- सप्ताहों के दौरान वहां अच्छी वर्षा भी हुई है लेकिन अमरीका के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। </p><p>दोनों देशों के सीमित प्रांतों में मसूर की खेती होती है। ऑस्ट्रेलिया में भी इसकी बिजाई जारी है मगर वहां अल नीनो के प्रकोप से फसल के लिए जोखिम बना हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33340</guid>				
                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:01:48 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सुपर अल नीनो के खतरे को देखते हुए फसल बीमा योजना पर जोर देना जरुरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। इस वर्ष देश के मानसून पर सुपर अल नीनो का गंभीर खतरा मंडरा रहा है जिससे विभिन्न खरीफ फसलों को नुकसान तथा कृषक समुदाय को आर्थिक घाटा होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अल नीनो के अभाव एवं कमजोर मानसून के कारण वैसे तो सभी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं लेकिन कुछ ऐसी फसलें हैं जिसके लिए बीमा के सहारे किसान काफी हद तक अपने घाटे की भरपाई करने में सक्षम हो सकते हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि चाहे जैसी भी परिस्थिति हो, किसानों को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होना चाहिए।&nbsp;</span></p><p>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत यदि बीमा दावे की कुल राशि उस पर वसूले गए प्रीमियम की कुल रकम के 80 प्रतिशत से कम है तो बीमा कंपनियां सकल प्रीमियम का 20 प्रतिशत भाग अपने पास रखकर शेष राशि सरकार को वापस कर देंगी।</p><p>इस बार स्वयं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने स्वीकार किया है कि दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष देश में मानसून की 90 प्रतिशत बारिश ही संभव हो पाएगी। </p><p>आमतौर पर 96 से 104 प्रतिशत के बीच होने वाली वर्षा को सामान्य माना जाता है जबकि इस बार नीचे में उससे कम से कम 4 प्रतिशत बिंदु कम बारिश हो सकती है।&nbsp;&nbsp;</p><p>कर्नाटक देश का एकलौता ऐसा राज्य है कि जो पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत सामान्य स्कीम की तरफ लौटा है जबकि महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान जैसे अनेक राज्य अभी तक यह निर्णय नहीं ले पाए हैं कि फसल बीमा योजना के तहत "कप एंड कैप" मॉडल को समाप्त किया जाए अथवा बरकरार रखा जाए। </p><p>धान, दलहन, तिलहन एवं कपास जैसी फसलों के लिए इस बार किसानों को बीमा की ज्यादा आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि वर्षा की कमी का सर्वाधिक असर इन्हीं फसलों पर पड़ने की आशंका है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33338</guid>				
                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 19:58:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कुछ इंतजार के बाद मानसून दे सकता है दस्तक]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। दक्षिण-पश्चिम मानसून के बादल केरलम तट से ठीक पीछे लक्ष्यद्वीप एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में न केवल पहुंच गया है बल्कि सघन भी होता जा रहा है। मानसून पूर्व की आंधी-बारिश देश के मध्यवर्ती एवं पूर्वी भाग में सक्रिय है। मौसम विभाग ने 3 जून से अगले चार दिनों तक केरलम एवं माही में अत्यन्त जोरदार बारिश होने की चेतावनी दी है और इसके साथ ही देश की मुख्य भूमि में मानसून का औपचारिक आगमन होगा।</span></p><p>मानसून का वलय (उत्तरी सीमा) कन्याकुमारी के ठीक दक्षिण से लेकर उत्तरी श्रीलंका तक बंगाल की खाड़ी के ऊपर म्यांमार तक फैला हुआ है। लेकिन भारत में पहुंचने के लिए इसे ठोस आधार या सहारा नहीं मिल रहा है। </p><p>आंतरिक भाग से पश्चिम विक्षोभ के कारण जो हवा दक्षिण की ओर प्रवाहित हो रही है वह मानसून को आगे बढ़ने से रोक रही है। उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में इसका असर समाप्त हो जाएगा और तब मानसून का आने का रास्ता भी साफ हो सकेगा।</p><p>मौसम विभाग ने भी इसकी तस्दीक कर दी है कि अगले 2-3 दिनों में लक्ष्यद्वीप केरलम, तमिलनाडु एवं उससे सटे बंगाल की खाड़ी के कुछ क्षेत्रों में मानसून के पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो गई हैं और कुछ इंतजार के बाद मानसून भारत में शीघ्र ही दस्तक देने वाला है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33336</guid>				
                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 17:51:11 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[फसल की कटाई में देरी एवं परिवहन में बाधा के कारण बिहार से मक्का की आपूर्ति धीमी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">बेगूसराय। बिहार को रबी कालीन मक्का का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य माना जाता है। इस वर्ष वहां बिजाई सामान्य हुई और मौसम की हालत भी संतोषजनक रही जिससे उत्पादन कुछ बेहतर होने के आसार हैं।&nbsp;</span></p><p>बिहार से देश के विभिन्न राज्यों को भारी मात्रा में मक्का की आपूर्ति की जाती है और कुछ माल विदेशों- खासकर बांग्ला देश को निर्यात भी किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से राज्य के प्रमुख उत्पादक जिलों में मौसम की हालत अनुकूल नहीं होने से फसल की कटाई-तैयारी में विलम्ब हो रहा है और मंडियों में माल की समुचित आवक नहीं होने से व्यापारियों / अपूर्तिकताओं को अपने क्लाइंट्स को सही समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता को देखते हुए मौसम विभाग ने एक बार फिर बिहार के 6 जिलों में बारिश होने की संभावना व्यक्त की है जिससे मक्का में नमी का अंश बढ़ सकता है।&nbsp;</p><p>समझा जाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर गत सप्ताह तक 1864 रेलवे रैक में मक्का की कुल मांग लंबित थी जिसमें से केवल बिहार में 88 प्रतिशत या 1637 रेल रैक की मांग पेंडिंग थी। राज्य में न केवल रेलवे रैक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं है बल्कि सड़क परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है। बिहार से उत्तर प्रदेश को 404 रैक में मक्का भेजा जाना है जबकि पंजाब को 319, उत्तराखंड को 296 एवं तमिलनाडु को 285 रैकों में मक्का की आपूर्ति की जानी है। इसके साथ-साथ बांग्ला देश के लिए भी 56 रैकों में मक्का की मांग लंबित है।&nbsp;</p><p>हालांकि रबी सीजन के दौरान बिहार सहित कई अन्य राज्यों में भी मक्का का अच्छा उत्पादन होता है मगर पशु आहार, पॉल्ट्री फीड, स्टार्च निर्माण एवं एथनॉल उत्पादन का ध्यान बिहार के मक्का पर ही केन्द्रित रहता है। तमिलनाडु जैसे सुदूर दक्षिणी प्रान्त के खरीदार यदि बिहार से मक्का की भारी लिवाली कर रहे है तो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहारी मक्का पर उसकी निर्भरता बरकरार है। अगर बिहार से मक्का की निकासी में बाधा पड़ती है तो प्रमुख खपतकर्ता क्षेत्रों में इसकी कीमतों में कुछ तेजी आ सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33334</guid>				
                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 17:47:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों के लिए कृष्णा का पानी देर से रिलीज होगा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विजयवाड़ा। चालू वर्ष के दौरान कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में खरीफ फसलों की बिजाई प्रक्रिया शुरू होने में कम से कम 15 दिनों की देर हो जाने की संभावना है क्योंकि बिजाई के लिए सिंचाई का पानी इस बार 1 जुलाई को ही कृष्णा और गोदावरी नदी से रिलीज करने का निर्णय लिया गया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसका कारण अल नीनो मौसम चक्र के प्रति बढ़ती चिंता, दक्षिण-पश्चिम मानसून का लेट से आगमन और कृष्णा बेसिन के प्रमुख जलाशयों में पानी का नगण्य प्रवाह बताया जा रहा है।&nbsp;</span></p><p>सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए पानी जारी करने हेतु 1 जुलाई की तिथि निश्चित की है जबकि पिछले साल 15 जून से ही पानी रिलीज करने की प्रक्रिया आरंभ हो गई थी। </p><p>इससे पूर्व वर्ष 2024 में 10 जुलाई को, वर्षा 2023 में 7 जून को, वर्ष 2022 में 10 जून को तथा वर्ष 2021 में 5 जुलाई को नदियों से पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।&nbsp;</p><p>कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में चार जिले- कृष्णा, एनटीआर, गुंटूर एवं एलुरु अवस्थित हैं जहां करीब 13 लाख एकड़ कृषि भूमि है और इसमें मुख्यतः धान की खेती होती है। </p><p>धान की नर्सरी लगाने तथा रोपाई सुनिश्चित करने के लिए सही समय पर नदियों से पानी छोड़ा जाना आवश्यक है। यद्यपि गोदावरी डेल्टा में निश्चित समय पर पानी छोड़ा गया मगर कृष्णा नदी का जल स्तर नीचे है। मध्य जुलाई तक अच्छी वर्षा होने पर पानी छोड़ने में दिक्कत नहीं होगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33332</guid>				
                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:34:29 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मटर का निर्यात मांग सामान्य - मसूर के विशाल स्टॉक से बढ़ी चिंता]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">वैंकुवर। कनाडा से मसूर एवं मटर के निर्यात का प्रदर्शन तो संतोषजनक है मगर विशाल उत्पादन से लाल मसूर का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है जो किसानों के लिए चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है।&nbsp;</span></p><p>पिछले सप्ताह चीन के आयातकों की थोड़ी-बहुत सक्रियता रहने के बावजूद वैश्विक बाजार में मटर का भाव काफी हद तक स्थिर बना रहा। कनाडा के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में मौसम की हालत मटर की फसल के लिए अनुकूल नहीं है और इसकी बिजाई की गति भी गत वर्ष से धीमी देखी जा रही है। फिर भी किसान मटर की बिजाई कर रहे हैं।</p><p>उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार यूरोप के अनेक देशों में हाल के दिनों में मौसम की चरम अवस्था देखी गई। उसके अधिकांश भागों में तापमान बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जिससे मटर की उपज दर एवं क्वालिटी पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ सकता है। </p><p>इसके फलस्वरूप यूरोप में इस वर्ष मटर सहित अन्य दलहनों का आयात बढ़ने के आसार हैं। जहां तक भारत का सवाल है तो यह सरकारी तौर पर 2025-26 सीजन के लिए दलहन फसलों के उत्पादन का जो तीसरा अग्रिम अनुमान जारी किया गया है उससे वैश्विक बाजार हैरान तो है मगर चिंतित नहीं है क्योंकि 2026-27&nbsp; के सीजन में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। </p><p>इस वर्ष अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने की संभावना है जिससे वर्षा की हालत अनिश्चित एवं अनियमित रह सकती है और बारिश का वितरण भी असमान हो सकता है।</p><p>हालांकि भारत में मटर एवं मसूर का उत्पादन रबी सीजन में होता है और इसकी फसल पहले ही कट चुकी है लेकिन अगर खरीफ सीजन में अरहर (तुवर) एवं उड़द का उत्पादन प्रभावित होता है तो दलहनों के कुल आयात में बढ़ोत्तरी की संभावना उत्पन्न हो सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/33330</guid>				
                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:12:52 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

</rss>