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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 10:48:31 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[अप्रैल-जून की तिमाही में म्यांमार से कृषि उत्पादों का शानदार निर्यात]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">यंगून। एक अग्रणी प्राइवेट व्यापारिक एवं निर्यातक संस्था- म्यांमार पल्सेस, बीन्स, मैज एन्ड सीसेम सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल- जून 2026 के दौरान म्यांमार से दलहनों, बीन्स, मक्का एवं तिल आदि का कुल निर्यात बढ़कर 10 लाख टन से ऊपर पहुंच गया जिससे 53.80 करोड़ डॉलर से अधिक की आमदनी प्राप्त हुई।&nbsp;</span></p><p>इस तिमाही के दौरान म्यांमार से दुनिया के 26 से ज्यादा देशों को उपरोक्त उत्पादों का निर्यात किया गया जिसमें भारत, थाईलैंड एवं चीन मुख्य रूप से शामिल हैं। भारत को तुवर एवं उड़द, थाईलैंड को मक्का तथा चीन को मूंग एवं तिल का भारी निर्यात किया जाता है।&nbsp;</p><p>म्यांमार में धान के बाद दलहनों एवं बीन्स की खेती सबसे अधिक क्षेत्रफल में होती है। देश के कुल कृषि योग्य भूमि के करीब 20 प्रतिशत भाग में इसकी बिजाई की जाती है। म्यांमार चावल का भी एक महत्वपूर्ण निर्यातक देश है मगर वह इस एसोसिएशन के दायरे से बाहर है। म्यांमार से उड़द एवं तुवर का सर्वाधिक निर्यात भारत को किया जाता है जो स्वयं इसका सबसे प्रमुख उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। एशिया तथा यूरोप के कई अन्य देशों को भी म्यांमार से कृषि उत्पादों का निर्यात होता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34998</guid>				
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:55:23 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी मिलों को मासिक कोटे का कम से कम 90 प्रतिशत मात्रा बेचने का निर्देश]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-90-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। घरेलू प्रभाग में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने उद्योग पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी मिलों के स्टॉक की धारिता की सीमा पर काफी सख्त नियम लागू कर दिया है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> इसके तहत मिलों को प्रत्येक माह नियत फ्री सेल कोटे के कम से कम 90 प्रतिशत भाग की आपूर्ति बाजार में अनिवार्य रूप से करने का निर्देश दिया गया है। नए नियम के अनुसार यदि मिलर्स किसी एक माह में इस नियत स्तर से कम चीनी की बिक्री करते हैं तो अगले महीने के उसके कोटे में आनुपातिक कटौती कर दी जाएगी।&nbsp;</span></p><p>खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों को पत्र के माध्यम से इस नियम और निर्णय की सूचना भेज दी है। पहले यदि मिलर्स निर्धारित कोटे के 90 प्रतिशत भाग से कम चीनी बेचते थे तब भी उसे किसी दंड का सामना नहीं करना पड़ता था। इस दंड या सजा से बचने के लिए मिलर्स को उस माह की 20 तारीख तक सरकार को इसकी सूचना देनी पड़ती थी। लेकिन सरकार ने अब इस प्रावधान को खत्म कर दिया है।&nbsp;</p><p>सभी चीनी मिलों को सूचित किया जाता है कि यदि कोई चीनी मिल या मिल समूह द्वारा किसी एक माह में नियत फ्री सेल कोटे के सापेक्ष 90 प्रतिशत से कम चीनी डिस्पैच की जाती है तो अगले महीने उसे उसी प्रतिशत मात्रा में चीनी का कोटा आवंटित किया जाएगा जितनी मात्रा का वास्तव में उपयोग किया गया है। </p><p>इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई प्लांट किसी महीने में 80 प्रतिशत कोटा का उपयोग करता है तो अगले महीने उसे 80 प्रतिशत कोटा ही आवंटित किया जाएगा। सरकार का यह नियम 9 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुका है और अगली सूचना तक लागू रहेगा। अगले महीने से त्यौहारी सीजन आरंभ होने जा रहा है जिसमें चीनी की मांग एवं खपत बढ़ सकती है। </p><p>यदि मार्केट में आपूर्ति की स्थिति जटिल हुई तो कीमतों में उछाल आने की संभावना रहेगी। मध्य जून के बाद से ही चीनी का घरेलू बाजार भाव ऊंचा एवं मजबूत बना हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34996</guid>				
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रूस द्वारा डोन - अजोज चैनल बंद करने से खाद्यान्न का शिपमेंट प्रभावित]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मास्को। रूस ने यूक्रेनी हमलों को देखते हुए अपने डोन -अजोज चैनल (जल मार्ग) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है जिससे खाद्यान्न सहित अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात शिपमेंट प्रभावित होने की आशंका है। इस जल मार्ग के जरिए रूस से करीब 25 प्रतिशत जून का निर्यात होता है। सीमा प्रहरियों ने शॉपर्स को केर्च स्ट्रेट का मार्ग अपनाने के लिए कह दिया है।&nbsp;</span></p><p>रूस से निर्यात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पेरिस स्थित यूरोनेक्स्ट एक्सचेंज में गेहूं का वायदा भाव 4 प्रतिशत तक बढ़कर गत 6 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। डोन-अजोज का जलमार्ग रूस के लिए काफी महत्वपूर्ण एवं सुविधाजनक माना जाता है। </p><p>यह रास्ता डोन नदी से अजोज सागर तक जाता है। जलमार्ग के उपयोग से गेहूं का परिवहन खर्च कम बैठता&nbsp; है। ध्यान देने की बात है कि रूस दुनिया में गेहूं का सबसे प्रमुख निर्यातक एवं तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वहां से इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का शिपमेंट बाधित होने पर अन्य निर्यातक देशों को फायदा होगा। रूस का गेहूं सबसे सस्ते दाम पर उपलब्ध रहता है।&nbsp;</p><p>अजोज सागर एवं काला सागर को जोड़ने वाला केर्च स्ट्रेट भी कुछ घंटो के लिए बंद रखा जा रहा है। फिलहाल यह नहीं बताया गया है कि इस स्थिति को कब तक कायम रखा जाएगा। रूस का दो अग्रणी गेहूं उत्पादक राज्य-रोस्तोप तथा क्रॉसनीडोर अजोज सागर के पास ही अवस्थित हैं।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34992</guid>				
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 12:44:14 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रबी जिंसों का कमजोर भाव]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">खरीफ कालीन फसलों पर अल नीनो, कमजोर मानसून एवं खाद-बीज के संकट का बादल मंडरा रहा है जिससे कुछ महत्वपूर्ण जिंसों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर रबी कालीन जिंसों का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तुलना में 3 से 8 प्रतिशत तक नीचे चल रहा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> मक्का का दाम तो एमएसपी से 24 प्रतिशत नीचे आ सकता है। रबी सीजन के तीन महत्वपूर्ण उत्पाद- चना, मसूर एवं जौ की कीमत एमएसपी से नीचे है। लेकिन सरसों का भाव काफी ऊपर चल रहा है जिससे इसकी खेती में रबी सीजन के दौरान किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">गेहूं का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास ही चल रहा है। किसानों की दृष्टि से मक्का का प्रदर्शन सबसे कमजोर माना जा रहा है। गेहूं तथा मसूर का दाम लगभग सामान्य चल रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">सरसों का एमएसपी 6200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है जबकि इसका औसत थोक मंडी भाव इससे 8 प्रतिशत ऊपर या 6674 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था। यह भाव अप्रैल-जून की तिमाही का औसत स्तर है जबकि अब यह और भी उछलकर 7227 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है जो एमएसपी से 17 प्रतिशत ऊंचा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">8 जुलाई तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने से ज्ञात होता है कि गेहूं को छोड़कर अन्य रबी फसलों का भाव पिछली तिमाही के औसत स्तर से ऊंचा हो गया। इससे किसानों को राहत मिल रही है।&nbsp;</span></p><p>अप्रैल-जून की तिमाही में रबी फसलों की जोरदार कटाई-तैयारी एवं थोक मंडियों में आवक होती है इसलिए कीमतों पर कुछ दबाव रहता है। अब आपूर्ति का ऑफ सीजन शुरू होने वाला है जबकि मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। आगे त्यौहारी सीजन आने वाला है जिससे विभिन्न जिलों की खपत एवं कीमत बढ़ सकती है। चना की खपत त्यौहारी सीजन में अक्सर तेजी से बढ़ जाती है। रबी फसलों की बिजाई पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34989</guid>				
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:45:24 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चावल के वैश्विक उत्पादन में गिरावट आने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। एशियाई देशों में अल नीनो के प्रभाव से बारिश कम होने की संभावना एवं रासायनिक उर्वरकों की सीमित उपलब्धता और ऊंची कीमत को देखते हुए अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने 2026-27 सीजन के दौरान चावल का वैश्विक उत्पादन घटकर 53.1718 करोड़ टन पर अटक जाने का अनुमान लगाया है जो 2025-26 के अनुमानित उत्पादन 54.573 करोड़ टन से काफी कम है। इससे पूर्व 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में कुल 54.235 करोड़ टन चावल का वैश्विक उत्पादन आंका गया था।</span></p><p>उस्डा की नई मासिक (जुलाई) रिपोर्ट के अनुसार बकाया स्टॉक के साथ 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में चावल की कुल वैश्विक उपलब्धता 73.538 करोड़ टन रह सकती है जो 2025-26 सीजन के कुल स्टॉक 73.686 करोड़ टन से कम है। </p><p>लेकिन उस्डा ने चावल का वैश्विक कारोबार (आयात-निर्यात) 2025-26 सीजन के 603.30 लाख टन से बढ़कर 2026-27 के सीजन में 627.80 लाख टन पर पहुंचने की उम्मीद व्यक्त की है। कुछ महत्वपूर्ण आयातक देशों में घरेलू उत्पादन घटने से चावल का आयात बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी।</p><p>रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 53.867 करोड़ टन चावल का वैश्विक उपयोग होने का अनुमान है जो 2026-27 के सीजन में बढ़कर 54.280 करोड़ टन पर पहुंच सकता है। इसके फलस्वरूप चावल का वैश्विक बकाया स्टॉक 19.281 करोड़ टन से घटकर 19.258 करोड़ टन रह जाने की संभावना है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34987</guid>				
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:18:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्पादन घटने की संभावना के बावजूद कनाडा में मटर की अच्छी उपलब्धता]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">वैंकुवर। सरकारी एजेंसी- स्टैट्स कैन के आंकड़ों से प्राप्त होता है कि विगत वर्ष की तुलना में इस बार कनाडा में मटर के बिजाई क्षेत्र में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है और इसकी फसल को कीड़ों-रोगों के प्रकोप का गंभीर खतरा भी बना हुआ है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">व्यापार विश्लेषकों के अनुसार बेसक अभी फसल की हालत सामान्य एवं सन्तोषजनक बनी हुई है लेकिन जुलाई के शेष दिनों से लेकर मध्य अगस्त तक का मौसम इसके उत्पादन की दशा एवं बाजार की दिशा को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</span></p><p>कृषि विषेशज्ञों का कहना है कि यदि मटर की उपज दर औसत स्तर की रही तब भी बिजाई क्षेत्र में आई कमी के कारण इसकी पैदावार में कोई दहशत या घबराहट का माहौल नहीं है बल्कि व्यापारी एवं निर्यातक कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। </p><p>कनाडा में अगले महीने से जब मटर का नया मार्केटिंग सीजन (अगस्त- 2026- जुलाई- 2027) आरंभ होगा तब इसका विशाल पिछला बकाया स्टॉक मौजूद रहेगा। यह स्टॉक उत्पादन में आने वाली गिरावट की भरपाई आसानी से कर देगा। </p><p>इससे कीमतों में और साथ ही साथ मटर की मांग एवं आपूर्ति में काफी हद तक संतुलन बना रह सकता है। 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान कनाडा में शानदार उत्पादन होने के मटर के दाम पर भारी दबाव बना रहा। </p><p>चीन ने मार्च 2026 में कनाडाई मटर के आयात पर लगे 100 प्रतिशत के भारी-भरकम सीमा शुल्क में काफी कटौती कर दी जिससे वहां निर्यात तेजी से बढ़ने लगा अन्यथा कनाडा में मटर का बकाया स्टॉक और भी बढ़ सकता था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34953</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 20:30:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सोयाबीन एवं मूंगफली की बिजाई पर सरकार की गहरी नजर]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। खरीफ सीजन की दो सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सोयाबीन तथा मूंगफली की बिजाई पर केन्द्रीय कृषि मंत्रालय का ध्यान विशेष रूप से केन्द्रित है। इसकी खेती का आदर्श समय तेजी से बीतता जा रहा है लेकिन बिजाई की गति में अपेक्षित तेजी नहीं देखी जा रही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">दरअसल मूंगफली के तीन शीर्ष उत्पादक राज्यों- गुजरात, राजस्थान एवं कर्नाटक में मानसून या तो देर से पहुंचा या फिर शुरूआती चरण में काफी कमजोर रहा। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जून में इस बार भीषण गर्मी का प्रकोप रहने से खेतों की मिटटी में नमी का भारी अभाव देखा गया जबकि बड़े पैमाने पर सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद राजस्थान में किसानों ने भारी उत्साह दिखाते हुए मूंगफली का रकबा बढ़ा दिया।&nbsp;</span></p><p>गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं तेलंगाना में मूंगफली की बिजाई की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। उधर राजस्थान में सोयाबीन की खेती में किसानों की दिलचस्पी कम देखी गई। </p><p>मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में बिजाई सामान्य होने की उम्मीद है मगर राजस्थान में रकबा पिछड़ सकता है। गुजरात में भी सोयाबीन का क्षेत्रफल बढ़ने की उम्मीद कम है। </p><p>आंध्र प्रदेश के किसानों में इसकी खेती के लिए आकर्षण बरकरार है। सोयाबीन की बिजाई 20 जुलाई तक आसानी से हो सकती है जबकि मूंगफली की खेती जुलाई के अंत तक हो सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34951</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 20:27:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पश्चिम एशिया में संकट के बावजूद वैश्विक अर्थ व्यवस्था रहेगी सामान्य]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">दुबई। ईरान तथा अमरीका के बीच नए सिरे से घमासान युद्ध शुरू हो जाने के कारण ईरान सहित पश्चिम एशिया, मध्यपूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में कोहराम मचा हुआ है और खासकर एशिया तथा यूरोप के अधिकांश देशों का आयात-निर्यात प्रभावित होने की आशंका है लेकिन इसके बावजूद तमाम वैश्विक संस्थाओं को उम्मीद है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गतिशीलता जारी रहेगी और वैश्विक अर्थ व्यवस्था पर कोई खास प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।&nbsp;</span></p><p>ईरान-अमरीका के बीच शांति समझौता होने के बाद जून में पेट्रोलियम एवं उर्वरकों के दाम में कमी आ गई थी लेकिन अब इसका भाव पुनः तेज होने लगा है। इसे देखते हुए चार वैश्विक संस्थाओं- अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईए), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) विश्व बैंक समूह (डब्ल्यू&nbsp; बी जी) तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू टी ओ) ने आगाह किया है कि मौजूदा माहौल अनिश्चितता से भरा हुआ है और आगे का परिदृश्य भी बेहतर रहने में संदेह है।</p><p> वैसे फिलहाल वैश्विक अर्थ व्यवस्था काफी हद तक स्थिर बनी हुई है और लगभग सभी जरुरी उत्पादों का दाम नियंत्रण में है। पेट्रोलियम एवं रासायनिक उर्वरकों की कीमतों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं मगर खाद्य एवं कृषि उत्पादों के दाम में जोरदार वृद्धि नहीं देखी जा रही है।&nbsp;</p><p>पश्चिम एशिया में जब तक लड़ाई जारी रहेगी तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा बना रहेगा लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका और ईरान के बीच लड़ाई की अवधि ज्यादा लम्बी नहीं होगी और इसलिए अर्थ व्यवस्था पर भी अधिक असर नहीं पड़ेगा। </p><p>रूस और यूक्रेन के बीच पिछले करीब साढ़े चार साल से युद्ध जारी है मगर इससे वैश्विक अर्थ व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। ईरान-अमरीका युद्ध का असर उससे व्यापक हो सकता था मगर यह सीमित अवधि में खत्म हो सकता है। दरअसल इस लड़ाई में ईरान के साथ-साथ अमरीका को भी जबरदस्त आर्थिक नुकसान हो रहा है इसलिए वह जल्दी ही इसे समाप्त करना चाहेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34949</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 20:23:45 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[हल्दी के भाव गत वर्ष की तुलना में अधिक : उत्पादक केन्द्रों पर बिजाई बढ़ी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। वर्तमान में हल्दी के भाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। वायदा एवं हाजिर बाजारों में भाव तेजी के साथ बोले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि स्टॉक कम रह जाने के कारण एवं स्टॉक भी मजबूत हाथों में होने के कारण माल की आवक कमजोर बनी हुई है। जबकि लोकल में मसाला निर्माताओं एवं निर्यातकों की लिवाली अच्छी चल रही है। सूत्रों का मानना है कि अभी कीमतों में ओर तेजी संभव है। क्योंकि मई फसल आने में अभी 6/7 माह का समय शेष है जबकि स्टॉक खपत की तुलना में कम है।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify;"><b>बिजाई अधिक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify;">उत्पादक केन्द्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार चालू सीजन के दौरान भी उत्पादक राज्यों में हल्दी की बिजाई अधिक क्षेत्रफल पर की गई है। तमिलनाडु में बिजाई का क्षेत्रफल 25/30 प्रतिशत अधिक होने के समाचार मिल रहे हैं जबकि निजामाबाद लाईन पर बिजाई 10/15 प्रतिशत अधिक होने के अनुमान है। मराठवाड़ा में सांगली लाइन पर भी बिजाई 10/15 प्रतिशत बढ़ने के समाचार है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र मराठवाड़ा लाइन पर अभी तक 80/85 प्रतिशत बिजाई काकार्य पूरा हो चुका। व्यापारियों का कहना है कि नान्देड़ लाइन पर बिजाई 30/35 प्रतिशत अधिक एवं हिंगोली लाइन&nbsp; पर 40/45 प्रतिशत अधिक हुई है जबकि बसमत नगर लाइन पर बिजाई 20/25 प्रतिशत बढ़ने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। हालांकि बिजाई क्षेत्रफल में वृद्धि होने के समाचार मिल रहे है लेकिन आगामी दिनों में बारिश की क्या स्थिति रहती है इस पर निर्भर करेगा। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भी देश में हल्दी की बिजाई 30/35 प्रतिशत अधिक क्षेत्रफल पर की गई थी लेकिन नवम्बर माह में हुई बेमौसमी बरसात से फसल को नुकसान हुआ था। जिस कारण पैदावार में आशानुरूप वृद्धि नहीं हुई।&nbsp;</p><p style="text-align: justify;"><b>भाव अधिक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify;">वर्तमान में हल्दी के भाव गत वर्ष की तुलना में अधिक चल रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष जुलाई 2025 के शुरू में दिल्ली बाजर में हल्दी सिंगल पॉलिश गट्ठा का भाव 138/140 रुपए चल रहा था जोकि वर्तमान में 164/165 रुपए बोला जा रहा है। इरोड मंडी में गत वर्ष इसी समयावधि में फली का भाव 138/140 रुपए चल रहा था जोकि वर्तमान में 170/172 रुपए बोला जा रहा है। अन्य मंडियों में भी हल्दी के भाव गत वर्ष की तुलना में 25/30 रुपए प्रति किलो ऊंचे चल रहे हैं।&nbsp;</p><p style="text-align: justify;"><b>स्टॉक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify;">जानकारों का कहना है कि वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों एवं खपत केन्द्रों पर हल्दी का स्टॉक 45/46 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र मराठवाड़ा में स्टॉक 18/20 लाख बोरी होने के अनुमान है। एक अनुमान के अनुसार खपत एवं निर्यातकों को मिलाकर प्रति माह 7/8 लाख बोरी की आवश्यकता होती है। जबकि आगामी 7 माह की खपत के लिए 50/55 लाख बोरी की आवश्यकता होगी।&nbsp;</p><p style="text-align: justify;"><b>मन्दा नहीं&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify;">जानकार सूत्रों का कहना है कि हल्दी की कीमतों में हाल-फिलहाल मंदे की संभावना नहीं है। अभी भाव ओर बढ़ने के अनुमान लगाए जा रहे है। व्यापारिक सूत्रों का मानना है कि आगामी दिनों में दिल्ली बाजार में हल्दी के भाव 180/185 रुपए प्रति किलो बन जाने चाहिए। वर्तमान में भाव 164/165 रुपए का चल रहा है।&nbsp;</p><p style="text-align: justify;"><b>निर्यात&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">वर्ष 2026-27 के प्रथम माह अप्रैल के दौरान हल्दी का निर्यात हालांकि मात्रात्मक रूप में 1 प्रतिशत बढ़ा है लेकिन भाव ऊंचे होने के कारण आय में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-2025 के दौरान हल्दी का निर्यात 14957 टन का हुआ है था और निर्यात से प्राप्त आय 227.42 करोड़ की रही थी जबकि अप्रैल- 2026 में हल्दी का निर्यात 15039.21 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 256.79 करोड़ की रही। वर्ष&nbsp; 2025-26 के दौरान हल्दी का निर्यात 175896 टन का रहा और प्राप्त आय 2887.18 करोड़ की रही।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34947</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 19:26:45 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सामान्य कोटा के कारण चीनी बाजार में नरमी की संभावना कम]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चालू माह (जुलाई) के लिए केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने जो 22 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा जारी किया है वह इसकी मांग एवं खपत को देखते हुए सामान्य प्रतीत होता है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बेशक देश के विभिन्न भागों में मानसून की सक्रियता के कारण बारिश हो रही है लेकिन मौसम ज्यादा ठंडा नहीं हुआ है इसलिए आइसक्रीम एवं कोल्ड ड्रिंक्स निर्माण&nbsp; के लिए चीनी की मांग मजबूत बनी हुई है। घरेलू उपयोग के लिए भी चीनी की मांग देखी जा रही है।&nbsp;</span></p><p>उत्तरी कर्नाटक एवं तमिलनाडु में जुलाई-अगस्त के दौरान गन्ना क्रशिंग का विशेष सत्र आयोजित होता है और इस सेशन में 3-4 लाख टन तक चीनी का निर्माण हो जाता है। </p><p>लेकिन इस बार जून में वहां वर्षा का अभाव होने से गन्ना की फसल प्रभावित हुई जिससे चीनी का उत्पादन उम्मीद से कम होने की संभावना है। पहले माना जा रहा था कि 2025-26 के पूरे मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में चीनी का कुल उत्पादन 280 लाख टन के आसपास पहुंच जाएगा लेकिन अब इसमें संदेह पैदा हो गया है।&nbsp;&nbsp;</p><p>2026-27 के सीजन में भी गन्ना एवं चीनी का उत्पादन घटने की संभावना है। उद्योग के पास चीनी का बकाया अधिशेष स्टॉक भी सीमित रहेगा। अगले महीने से त्यौहारी सीजन आरंभ होने वाला है। जून में चीनी का भाव 6-7 प्रतिशत तेज रहा। जुलाई में भी इसमें नरमी आने की संभावना बहुत कम है। इससे मिलों को राहत मिलेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34945</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:24:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मध्यवर्ती भारत में मानसून की स्थिति कमजोर पड़ने के संकेत]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नागपुर। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 8 जुलाई को देश में 12.2 मि०मी० बारिश हुई जो सामान्य औसत स्तर 8.8 मि०मी० से 59 प्रतिशत ज्यादा रही। लेकिन 1 जून से 8 जुलाई 2026 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कुछ वर्षा घटकर 195.5 मि०मी० पर अटक गई जो दीर्घकालीन औसत (एलपीए) 230.4 मि०मी० से 15 प्रतिशत कम रही।&nbsp;</span></p><p>चालू माह के शुरुआती 8 दिनों के दौरान देश के मध्यवर्ती एवं पश्चिमोत्तर भाग में सामान्य औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई जहां क्रमश: 18.5 मि०मी० तथा 9.5 मि०मी० वर्षा हुई। पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में 11.6 मि०मी० बरसात हुई जो सामान्य औसत के लगभग बराबर रही। दक्षिण भारत में भी 6.3 मि०मी० की सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग के मुताबिक मध्यवर्ती भारत में मानसून पिछले कुछ दिनों से सक्रिय था लेकिन अब इसकी सक्रियता, गतिशीलता एवं तीव्रता काफी घटने की संभावना है। इससे महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मानसून की चाल सुस्त पड़ गई है और अगले कुछ दिनों तक सुस्त ही बनी रह सकती है। </p><p>पिछले दिनों की जोरदार वर्षा से महाराष्ट्र के कई दिनों में किसानों को अब खरीफ फसलों की बिजाई में अच्छी सहायता मिलने की उम्मीद है। गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रांतों में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश के पश्चिमोत्तर भाग और इससे सटे उत्तर प्रदेश के हिस्सों के ऊपर एक पूर्व व्यवस्थित कम दाब का क्षेत्र बना हुआ था जो अब उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र की और बढ़ रहा है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जोरदार बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ-साथ आसपास के राज्यों में भी मूसलाधार वर्षा होने की संभावना है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34943</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:00:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उर्वरकों के ऊंचे दाम में वैश्विक कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। रासायनिक उर्वरकों का भाव ऊंचा होने से दुनिया के अनेक देशों में इसका उपयोग घटने की संभावना है जिसका प्रतिकूल असर कृषि उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन को छोड़कर अन्य अधिकांश देशों को इससे काफी परेशानी हो रही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">भारत में उर्वरक सब्सिडी के लिए अत्यन्त विशाल धनराशि का प्रावधान किया जाता है इसलिए यहां किसानों के हितों की सुरक्षा तो हो जाती है मगर सरकारी खजाने पर दबाव भी काफी बढ़ जाता है। जिन देशों में सब्सिडी की व्यवस्था नहीं है वहां किसानों को बहुत महंगे दाम पर उर्वरक खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है।&nbsp;</span></p><p>गरीब किसान महंगे उर्वरक का भार सहने में असमर्थ हैं इसलिए उन्हें इसका उपयोग घटाने के लिए विवश होना पड़ेगा जिससे फसलों की उपज दर एवं पैदावार में स्वाभाविक रूप से गिरावट आ जाएगी। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण उर्वरकों का आयात-निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। </p><p>एशिया, अफ्रीका एवं लैटिन अमरीका के कम विकसित देशों में उर्वरकों को लेकर किसानों में गहरी चिंता देखी जा रही है। वहां कृषि उत्पादन में गिरावट आने पर विदेशों से खद्यान्न, खाद्य तेल एवं अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों का आयात बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी। </p><p>इस बार कुछ देशों को अल नीनो मौसम चक्र भी परेशान करेगा। 2026-27 के मार्केटिंग सीजन के शेष महीनों में चावल, गेहूं, मक्का, चीनी, दलहन एवं खाद्य तेल का भाव ऊपर नीचे हो सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34941</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:29:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से आगे]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। दक्षिण भारत के दो महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। आंध्र प्रदेश में रकबा 4.81 लाख हेक्टेयर से 39 प्रतिशत या 1.88 लाख हेक्टेयर बढ़कर 6.69 लाख हेक्टेयर तथा तेलंगाना में 52.04 लाख एकड़ से 3.28 लाख एकड़ बढ़कर 55.32 लाख एकड़ पर पहुंच गया है। दोनों राज्यों में बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है।&nbsp;</span></p><p>आंध्र प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र 1.78 लाख हेक्टेयर से उछलकर 2.20 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का रकबा 44 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 52 हजार हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 55 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 65 हजार हेक्टेयर हो गया। इसी तरह कपास की बिजाई भी 1.63 लाख हेक्टेयर बढ़कर 2.40 लाख हेक्टेयर पर पहुंची।&nbsp;</p><p>आंध्र प्रदेश के पड़ोसी राज्य- तेलंगाना में यद्यपि धान का उत्पादन क्षेत्र 3.64 लाख एकड़ से बढ़कर 4.22 लाख एकड़, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 3.52 लाख एकड़ से सुधरकर 3.67 लाख एकड़, तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 2.76 लाख एकड़ से बढ़कर 3.38 लाख एकड़ तथा कपास का रकबा 34.59 लाख एकड़ से उछलकर 39.44 लाख एकड़ पर पहुंच गया लेकिन मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 5.24 लाख एकड़ से उछलकर इस बार 2.99 लाख एकड़ पर अटक गया। मोटे अनाजों के संवर्ग में खासकर मक्का का रकबा 4.97 लाख एकड़ से घटकर 2.84 लाख एकड़ रह गया।</p><p>तेलंगाना में सोयाबीन की अच्छी बिजाई हुई है और इसका उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 2.75 लाख एकड़ से बढ़कर इस बार 3.35 लाख एकड़ हो गया। इसी तरह दलहन फसलों में अरहर (तुवर ) का बिजाई क्षेत्र 3.11 लाख एकड़ से सुधरकर 3.19 लाख एकड़ पर पहुंचा। आंध्र प्रदेश में भी तुवर का बिजाई क्षेत्र 26 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 70 हजार हेक्टेयर और मूंगफली का रकबा 43 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 47 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34939</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:05:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कनाडा में काबुली चना की फसल पर कीड़ों-रोगों के प्रकोप की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विनीपेग। यद्यपि कनाडा में काबुली चना की बिजाई समाप्त हो चुकी है और इसका रकबा भी लगभग सामान्य रहा है लेकिन दोनों प्रमुख उत्पादक राज्यों- सस्कैचवान एवं अल्बर्टा में इसकी फसल पर कीड़ों-रोगों के गंभीर प्रकोप की आशंका बनी हुई है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">काबुली चना के दाम में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। चालू मार्केटिंग सीजन (अगस्त 2025-जुलाई 2026) के शुरुआती 10 महीनों में इसका निर्यात प्रदर्शन बेहतर रहा जिससे कीमतों में कुछ हद तक मजबूती या स्थिरता बनी रही जबकि दूसरी ओर शानदार उत्पादन एवं ऊंचे स्टॉक के कारण बाजार भाव पर दबाव भी बना रहा।&nbsp;</span></p><p>यद्यपि कनाडा में भारी वर्षा के बाद अब तापमान ऊंचा होने लगा है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में जमा पानी को सुखाने के लिए और अधिक गर्मी की आवश्यकता है अन्यथा फसल को हानिकारक कीड़ों-रोगों से खतरा बढ़ जाएगा। </p><p>वहां औसत तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है जबकि दिन में कहीं-कहीं यह बढ़कर 20 से 30 डिग्री तक पहुंचने की उम्मीद है। कम धूप मिलने पर फसल की प्रगति में बाधा पड़ने तथा उपज दर नीचे रहने की आशंका है। कनाडा में किसानों के पास काबुली चना का अच्छा खासा स्टॉक अभी मौजूद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34937</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 15:35:15 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक बढ़ने की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। देश भर के बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक अभी कम है केन्द्रीय दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता बढ़ने से आगामी दिनों में जल स्तर में सुधार आने के आसार हैं। इससे खरीफ के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की फसलों की सिंचाई में भी सहायता मिलेगी। जून के पूरे महीने में सामान्य औसत से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई मगर 1 से 9 जुलाई के दौरान 38 प्रतिशत अधिशेष वर्षा दर्ज की गई। उम्मीद की जा रही है कि आगे भी वर्षा का दौर जारी रहेगा जिससे बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक बढ़ जाएगा।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख बांधों-जलाशयों में 59.443 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक मौजूद है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता का 32.4 प्रतिशत है। पिछले साल की समान अवधि में उसमें 36.5 प्रतिशत पानी का भंडार मौजूद था। वर्तमान जल स्तर इस वर्षीय औसत से 7.6 प्रतिशत ज्यादा है। इस वर्ष मानसून-पूर्व की बारिश उम्मीद के अनुरूप नहीं हुई और दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहले महीने में बारिश बहुत कम हुई। इससे बांधों-सरोवरों में पानी का स्टॉक बहुत घट गया। अत्यधिक गर्मी के कारण भी जल स्तर में गिरावट आई। अब इसमें कुछ सुधार के लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं।&nbsp;</p><p>पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का भारी अभाव रहा जबकि दक्षिण भारत एवं पश्चिमोत्तर क्षेत्र में भी वर्षा कम हुई। अब इन संभागों में मानसून की सक्रियता बढ़ गई है जिससे वहां मूसलाधार वर्षा होने लगी है। इससे खेतों एवं छोटे-छोटे जल स्रोतों के साथ-साथ बड़े-बड़े बांधों-जलाशयों, सरोवरों एवं झीलों में भी पानी का स्तर बढ़ने लगा है।&nbsp;</p><p>कुछ दिन पूर्व बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक घटकर उसकी कुल भंडारण क्षमता के 26-27 प्रतिशत पर आ गया था जो अब सुधरकर 32 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है। जुलाई-अगस्त की वर्षा का सहारा मिलने पर जल स्तर में और भी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34935</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:10:12 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अगली फसल पर बाजार की नजर होने से मसूर का कारोबार सुस्त]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">रेगिना। पश्चिमी कनाडा में मसूर का कारोबार पिछले कुछ दिनों से सुस्त देखा जा रहा है जिससे कीमतों में काफी हद तक स्थिरता बनी हुई है। कनाडा में मसूर की बिजाई समाप्त हो चुकी है और अगले महीने (अगस्त) से नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू होने वाली है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">यद्यपि इस बार मसूर के बिजाई क्षेत्र में कुछ कमी आई है। जिससे उत्पादन घट सकता है मगर पिछला बकाया स्टॉक ज्यादा होने से आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रहेगी।&nbsp;</span></p><p>उधर ऑस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन तेजी से उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा है जिससे कनाडा को वैश्विक निर्यात बाजार में उसकी सख्त प्रतिस्पर्धा एवं कठिन चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। रूस एवं कजाकिस्तान में भी उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति का संकट नहीं रहेगा।&nbsp;</p><p>कनाडा में तात्कालिक डिलीवरी के लिए नम्बर 1 ग्रेड की छोटी हरी मसूर का भाव 18 सेंट प्रति पौंड तथा नम्बर 2 श्रेणी की मोटी हरी मसूर का एफओबी फॉर्म मूल्य 24 सेंट प्रति पौंड चल रहा है जबकि इसमें मांग सीमित देखी जा रही है। आगामी नई फसल के लिए मोटी हरी मसूर की थोड़ी-बहुत खरीदारी हो रही है जिससे अनुबंध मूल्य 24 सेंट प्रति पौंड पर स्थिर बना हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34933</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:25:05 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पश्चिम एशिया में घमासान युद्ध से भारतीय निर्यातक चिंतित]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। पश्चिम एशिया में एक बार फिर ईरान और अमरीका के बीच घमासान युद्ध आरंभ हो गया है। एक तरफ अमरीका ईरान के विभिन्न शहरों एवं ठिकानों पर बमबारी कर रहा है तो दूसरी ओर ईरान भी खाड़ी क्षेत्र के देशों- कुवैत, बहरीन, जॉर्डन एवं कतर आदि में अवस्थित अमरीकी सैन्य बेस तथा अन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। शीघ्र ही इस युद्ध में इजरायल के भी शामिल हो जाने की संभावना है जिससे इसकी विकरालता और भी बढ़ जाएगी और युद्ध की अवधि भी लम्बी हो सकती है।</span></p><p>दरअसल युद्ध का आरंभ जिस कारण से हुआ वह भारत को परेशान कर रहा है। ईरान ने चेतावनी दी थी कि जिस जहाज को होर्मुज स्ट्रेट पार करना है उसे ईरान द्वारा बताए गए रास्ते से जाना होगा अन्यथा उस पर अटैक किया जा सकता है। जब इस चेतावनी को नजर अंदाज करके तीन टैकर्स (जहाज) ने अमरीका द्वारा निर्धारित मार्ग से गुजरने का प्रयास किया तब ईरान ने उस पर हमला करके उसे नष्ट कर दिया। इससे अमरीका भड़क गया और उसने ईरान पर अटैक कर दिया। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमरीकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन एवं मिसाइल से हमला शुरू कर दिया। इस तरह दोनों देशों में घमासान युद्ध आरंभ हो गया।&nbsp;</p><p>होर्मुज स्ट्रेट का जलमार्ग विवाद का प्रमुख आधार बना हुआ है जबकि यह रास्ता भारतीय आयात-निर्यात के लिए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। अमरीकी सेना ईरान के चावहार सहित ऐसे बंदरगाहों को भी निशाना बना रही है जिसके रास्ते भारत बड़े पैमाने पर कारोबार करता है। चावहार पोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय उत्पाद पहले वहीं पहुंचता है और फिर वहां से अफगानिस्तान सहित कई अन्य देशों को भेजा जाता है।&nbsp;</p><p>पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारत से बड़ी मात्रा में बासमती चावल, चाय एवं मसाला आदि का निर्यात होता है जबकि वहां से पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रासायनिक उर्वरक एवं सूखे मेवों का विशाल मात्रा में आयात किया जाता है। अफगानिस्तान से ड्राई फ्रूट्स का आयात अक्सर ईरान के रास्ते ही भारत में होता है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने तथा चावहार बंदरगाह के बंद होने से भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ती जा रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34931</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:06:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वाशिम में सामान्य बारिश, तुवर की बुवाई पिछले वर्ष के बराबर; मूंग-उड़द का रकबा घटा, हल्दी की खेती में बढ़ी रुचि]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">वाशिम (महाराष्ट्र): वाशिम क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की स्थिति अब तक सामान्य बनी हुई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई सुचारु रूप से जारी है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार तुवर (अरहर) की बुवाई लगभग पिछले वर्ष के समान स्तर पर हुई है, जिससे इस फसल की स्थिति फिलहाल संतोषजनक मानी जा रही है।</span></p><p>इसके विपरीत, मूंग और उड़द की बुवाई में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार इन दोनों दलहनी फसलों का रकबा गत वर्ष की तुलना में करीब 50 प्रतिशत कम है। किसानों का रुझान इस बार दलहनों की बजाय अधिक लाभ देने वाली नकदी फसलों की ओर देखने को मिल रहा है।</p><p>विशेष रूप से हल्दी की खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ा है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार इस वर्ष हल्दी की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत अधिक हुई है। बेहतर भाव की उम्मीद और अनुकूल बाजार संभावनाओं के कारण किसानों ने हल्दी का रकबा बढ़ाया है।</p><p>व्यापारिक जानकारों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सामान्य बना रहता है तो खरीफ फसलों की बढ़वार अच्छी रहने की संभावना है। वहीं, मूंग और उड़द के घटते रकबे का असर आगे चलकर इन फसलों की उपलब्धता और बाजार भाव पर देखने को मिल सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34929</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:40:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मलेशिया में पाम तेल का स्टॉक 25.44 लाख टन पर पहुंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-25-44-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">कुआलालम्पुर। उत्पादन एवं आयात में भारी वृद्धि होने से मलेशिया में पाम तेल का बकाया अधिशेष स्टॉक तेजी से बढ़ गया। यद्यपि निर्यात में भी इजाफा हुआ लेकिन फिर भी बकाया स्टॉक ऊपर रहा।&nbsp;</span></p><p>सरकारी संस्था- मलेशियन पाम ऑयल बोर्ड (एम्पोब) की नई रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 के दौरान देश में क्रूड पाम तेल का उत्पादन मई की तुलना में 8.08 प्रतिशत बढ़कर 16,38,777 टन पर पहुंच गया जबकि विदेशों से पाम तेल उत्पादों का आयात भी 135.33 प्रतिशत उछलकर 1,03,113 टन पर पहुंचा। इससे वहां पाम तेल की आपूर्ति एवं उपलब्धता में भारी बढ़ोत्तरी हो गई।&nbsp;</p><p>एम्पोब की रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 के अंत में मलेशिया में पाम तेल का कुल बकाया स्टॉक बढ़कर 25,44,066 टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया जो मई की समाप्ति के समय मौजूद स्टॉक से 4.78 प्रतिशत अधिक रहा। </p><p>समीक्षाधीन माह के दौरान वहां क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का स्टॉक 3.75 प्रतिशत सुधरकर 15,32,697 टन पर तथा प्रोसेस्ड (रिफाइंड) पाम तेल / पामोलीन का स्टॉक 5.94 प्रतिशत बढ़कर 12,11,369 टन पर पहुंचा। इसी तरह पाम कर्नेल तेल का स्टॉक भी 2.55 प्रतिशत सुधरकर 3,38,209 टन पर पहुंच गया।&nbsp;</p><p>जून में मलेशिया से कुल 12,04,013 टन पाम तेल उत्पादों का निर्यात हुआ जो मई के शिपमेंट से 6.19 प्रतिशत अधिक रहा। बेहतर निर्यात के कारण पाम तेल के बकाया अधिशेष स्टॉक में सीमित बढ़ोत्तरी हुई। इंडोनेशिया के बाद मलेशिया संसार में पाम तेल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यात देश है। भारत में वहां से भारी मात्रा में पाम तेल का आयात होता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34926</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:21:55 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[देश के डेढ़ दर्जन राज्यों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। मौसम विभाग ने देश के 18 राज्यों में जोरदार बारिश का अलर्ट जारी किया है। मानसून अब सम्पूर्ण देश को&nbsp; कवर कर चुका है और फिलहाल अनेक राज्यों में मूसलाधार बारिश हो रही है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बिहार पहले सूखे की चपेट में नजर आ रहा था मगर 9 जुलाई से उसके विभिन्न जिलों में जोरदार वर्षा हो रही है जिससे किसानों को खासकर धान की रोपाई में काफी सहायता मिलेगी। अन्य पूर्वी राज्यों में भी वर्षा हो रही है।&nbsp;</span></p><p>दक्षिण-पश्चिम मानसून का एक सिरा देश के उत्तरी एवं पश्चिमोत्तर भाग में सक्रिय है जिससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश सहित अन्य समीपवर्ती राज्यों में बारिश का दौर जारी है। </p><p>इसी तरह दिल्ली- एनसीआर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी भारी बारिश होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि 8 जुलाई तक देश के पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भाग में सामान्य औसत से करीब 41 प्रतिशत कम मानसूनी बारिश हुई थी जिससे गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई थी। पश्चिमोत्तर राज्यों में 9 प्रतिशत एवं दक्षिणी प्रायद्वीप में 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। </p><p>लेकिन अब यह कमी काफी घटने और कहीं-कहीं समाप्त हो जाने की उम्मीद है। मौसम विभाग का कहना है कि देश के तीन भाग में मौजूद समुद्र में स्थिति अभी अनुकूल बनी हुई है जिससे मानसून की सक्रियता एवं गतिशीलता अगले कुछ दिनों तक बरकरार रह सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/34924</guid>				
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:44:56 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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