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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:43:28 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[आयात के सहारे चीनी की आपूर्ति में 15 प्रतिशत का सुधार संभव]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-15-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। केन्द्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक की समयावधि के लिए 10 लाख टन चीनी के शुल्क मुक्त आयात की जो मंजूरी दी है उससे सितम्बर-नवम्बर के पीक त्यौहारी सीजन के दौरान चीनी की आपूर्ति में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और इसकी कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना भी रहेगी।&nbsp;</span></p><p>एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी के अनुसार टैरिफ रेट कोटा प्रणाली के अंतर्गत इस 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात की स्वीकृति दी गई है। चूंकि घरेलू बाजार भाव रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर चल रहा है इसलिए मिलर्स / रिफाइनर्स जल्दी से जल्दी&nbsp; इसके आयात का हर संभव प्रयास अवश्य करेंगे।&nbsp;</p><p>पिछले तीन-चार साल के दौरान औसतन 70 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा सितम्बर-नवम्बर की तिमाही में आवंटित होता रहा है जबकि इस 10 लाख टन आयातित माल से इस अवधि में चीनी की कुल उपलब्धता 15 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है।&nbsp;</p><p>इस बीच सरकार ने चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ना की क्रशिंग आरंभ करने के लिए कहा है जिससे उस महीने में चीनी का उत्पादन 10 लाख टन तक पहुंच सकता है। आमतौर पर अक्टूबर के तीसरे-चौथे सप्ताह में सीमित मिलें गन्ना की क्रशिंग शुरू करती है जिससे चीनी का उत्पादन 3-4 लाख टन तक ही पहुंच पाता है। </p><p>उद्योग के पास चीनी का सीमित स्टॉक मौजूद है इसलिए सरकार को सोच-समझ कर मासिक बिक्री का कोटा नियत करना पड़ रहा है। लेकिन आयात एवं अक्टूबर के अतिरिक्त उत्पादन के सहारे उसे बिक्री का कोटा बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। चीनी के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में बढ़ोत्तरी होने की संभावना बहुत कम है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36700</guid>				
                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:31:32 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पाकिस्तान से चीनी के आयात की संभावना से इंकार]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। हालांकि घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति प्रदान की है लेकिन मिलर्स-रिफाइनर्स को पाकिस्तान से इसे मंगाने की अनुमति नहीं मिलेगी। पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार पर जो प्रतिबंध लगा हुआ है वह बरकरार रहेगा।&nbsp;</span></p><p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि पाकिस्तान से सम्बन्धित भारत की स्थिति एवं नीति से सभी अवगत हैं। इस तरह की खबर आ रही थी कि पाकिस्तानी चीनी उत्पादक भारतीय बाजार में अपने स्टॉक की आपूर्ति करने के लिए तत्पर है लेकिन प्रवक्ता ने इसकी संभावना से इंकार कर दिया। </p><p>यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब भारत में चीनी का थोक एवं खुदरा बाजार भाव उछलकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और सरकार इसे नियंत्रण में लाने का जोरदार प्रयास कर रही है।</p><p>कच्ची चीनी के आयात के लिए भारत के समक्ष ब्राजील एवं थाईलैंड जैसे देशों का विकल्प मौजूद है जो दुनिया के दो सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश हैं। भारत सरकार अपवाद स्वरूप भी पाकिस्तान से चीनी के आयात पर विचार नहीं कर रही है। 19 अगस्त को पाकिस्तान में 1.05 लाख टन चीनी की बिक्री के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया गया था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36695</guid>				
                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:42:22 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उड़द बाजार में गिरावट जारी, आयात बढ़ने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">दाल मिलों की कमजोर मांग के चलते शुक्रवार को घरेलू बाजार में उड़द की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। व्यापारियों के अनुसार, खपत का सीजन शुरू होने के बावजूद दाल मिलर्स फिलहाल केवल अपनी तत्काल जरूरत के अनुसार ही खरीदारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, आगामी महीनों में आयात बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में बड़ी तेजी के प्रति कारोबारी सतर्क बने हुए हैं। हालांकि, त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ उड़द दाल की मांग में सुधार की उम्मीद है। इससे मौजूदा गिरावट पर कुछ हद तक अंकुश लग सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार में तेज तेजी के मजबूत संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।</span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;"><b>घरेलू आवक कमजोर</b></span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर बनी हुई है। आने वाले दिनों में उड़द मोगर और गोटा की मांग में सुधार की उम्मीद है। कर्नाटक के बागलकोट क्षेत्र में इस वर्ष उड़द की फसल काफी अच्छी बताई जा रही है, जिससे आगे चलकर घरेलू आपूर्ति को कुछ समर्थन मिल सकता है। फिलहाल उड़द दाल की ग्राहकी कमजोर होने के कारण मिलर्स स्टॉक बढ़ाने के बजाय जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। इससे मंडियों में बेहतर माल की मांग होने के बावजूद कीमतों में तेजी का आधार मजबूत नहीं बन पा रहा है।</span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;"><b>बंदरगाह स्टॉक कम, लेकिन आयात बढ़ने की संभावना</b></span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">बंदरगाहों पर उड़द का स्टॉक फिलहाल कम बताया जा रहा है। खपत का सीजन शुरू होने से आने वाले दिनों में दाल की मांग बढ़ने की संभावना है। हालांकि, घरेलू मांग बढ़ने के साथ आयात में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। यही वजह है कि बाजार में मांग बढ़ने के बावजूद कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।</span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;"><b>ब्राजील से अगस्त-सितंबर में बढ़ेगी आपूर्ति</b></span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">ब्राजील से उड़द का आयात अगस्त के दौरान छोटी-छोटी खेपों में जारी रहने की संभावना है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में अपेक्षाकृत बड़ी खेप आने की उम्मीद है। सितंबर में ब्राजील की आपूर्ति बढ़ने के साथ महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी अच्छी घरेलू आपूर्ति मिलने की संभावना है। इसके बाद अक्टूबर से मध्य प्रदेश और राजस्थान की उत्पादक मंडियों में नई उड़द की आवक शुरू होने की उम्मीद है। यदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम अनुकूल बना रहता है, तो आगे घरेलू आवक और उत्पादन की स्थिति बेहतर हो सकती है।</span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;"><b>आयात में अभी भी गिरावट</b></span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चालू वर्ष जनवरी से जून के दौरान उड़द का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 19 प्रतिशत से अधिक घटकर करीब 2.27 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में आयात लगभग 2.81 लाख टन था।</span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;"><b>बाजार का रुख</b></span></div><div style="text-align: justify;"><span style="font-size: 1rem;">कुल मिलाकर, कमजोर घरेलू आवक, कम बंदरगाह स्टॉक और आगामी त्योहारी सीजन से मांग में सुधार की संभावना उड़द बाजार को सहारा दे सकती है। लेकिन ब्राजील से बढ़ती आपूर्ति, आगे संभावित आयात वृद्धि और फिलहाल दाल मिलों की सीमित खरीदारी को देखते हुए बाजार में बड़ी तेजी की संभावना कम है। निकट अवधि में उड़द बाजार में गिरावट सीमित रहने और मांग में सुधार होने पर स्थिरता आने की संभावना अधिक दिखाई देती है। नई फसल की आवक और आयातित माल की उपलब्धता आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</span></div></p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36693</guid>				
                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:38:40 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सरकार की सख्ती एवं व्यापारियों की मुनाफावसूली से चीनी में नरमी के आसार]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चीनी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी से चिंतित सरकार ने एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसके तहत चीनी मिलों एवं डीलर्स स्टॉकिस्टों की गतिविधियों पर गहरी नजर रखते हुए बाजार की निगरानी की जा रही है और नए नियम लागू किए जा रहे हैं। दूसरी ओर विदेशों से 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के आयात की अनुमति दी गई है जिस पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा।&nbsp;</span></p><p>उल्लेखनीय है कि जोरदार तेजी के बाद देश में और खासकर महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में 21 अगस्त को चीनी के रिसेल&nbsp; मूल्य में 400-500 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई। समझा जाता है कि शुल्क मुक्त आयात की अनुमति के निर्णय का चीनी बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ने लगा है।&nbsp;</p><p>उद्योग समीक्षकों के अनुसार चीनी की मांग बेहद कमजोर पड़ गई है क्योंकि डीलर्स-स्टॉकिस्टों को लगता है कि चीनी की रिसेल (बिक्री) का भारी दबाव घरेलू बाजार पर पड़ सकता है जिससे कीमतों में नरमी आ सकती है। ऐसी स्थिति में ऊंचे दाम पर चीनी खरीदना घाटे का कारण बन सकता है। कच्ची चीनी का आयात जल्दी से जल्दी शुरू हो सकता है। जीएसटी तथा खाद्य विभाग के अधिकारी लगातार अपना शिकंजा कसते जा रहे हैं। कुछ डीलर्स ने चीनी की मुनाफावसूली (बिक्री) आरंभ कर दी है।&nbsp;</p><p>चीनी के खुदरा मूल्य में नरमी आने में कुछ समय लग सकता है। कुछ इकाइयों में चीनी का टेंडर मूल्य अब भी 6400-6500 रुपए प्रति क्विंटल के शीर्ष स्तर पर चल रहा है। रिसेल चीनी का तात्पर्य उस चीनी से है जिसे एजेंट या व्यापरियों ने टेंडर के माध्यम से पहले 5500-5800 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था मगर अभी तक उसका उठाव नहीं किया था। जब 20 अगस्त को चीनी का भाव काफी ऊंचा हो गया तब 21 अगस्त को उससे कम दाम पर इसकी बिक्री आरंभ कर दी। </p><p>कर्नाटक में चीनी के वेयरहाउस की जांच-पड़ताल शुरू हो गई है और केन्द्र सरकार द्वारा स्टॉक धारिता नियमों को सख्त बनाए जाने के बाद बल्क खरीदारों ने अपना स्टॉक खुले बाजार में उतारना आरंभ कर दिया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36690</guid>				
                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:08:58 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भीलवाड़ा में दलहन फसलों पर कीड़ों-रोगों का प्रकोप]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलावाड़ा जिले में पीले मोजैक कीट का प्रकोप फैलने से दलहन फसलों पर असर पड़ रहा है जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। कृषि विभाग इस बात की पुष्टि कर चुका है कि वायरस से उत्पन्न यह रोग दलहनों के पौधे को प्रभावित कर रहा है। राजस्थान के इस आदिवासी बहुत जिले में इस बार खरीफ सीजन के दौरान उड़द एवं मूंग की अच्छी खेती हुई है और फसल की हालत भी अब तक संतोषजनक बनी हुई थी लेकिन अब यैलो मोजैक रोग के आयात से इसे क्षति होने की आशंका है।&nbsp;</span></p><p>उड़द की फसल पर इस कीट का प्रकोप ज्यादा देखा जा रहा है जिससे उसमें पीलापन आने लगा है। कहीं-कहीं फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि किसानों ने खेतों को साफ करना शुरू कर दिया है।&nbsp;</p><p>जिला कृषि विभाग सम्पूर्ण स्थिति की निगरानी कर रहा है। फसल नुकसान का आंकड़ा एकत्रित करके राज्य सरकार को उसकी रिपोर्ट भेजने की तैयारी की जा रही है। इस बार भीलवाड़ा जिले में करीब 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलों की खेती हुई है। वहां उड़द का रकबा कुछ ज्यादा है जबकि मूंग की बिजाई भी अच्छी हुई है। फसल पर दवाओं का छिड़काव हो रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36685</guid>				
                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 11:25:01 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[खरीफ फसलों की संतोषजनक बिजाई]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">अल नीनो मौसम चक्र के तीव्र प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने तथा बारिश का अभाव होने से खरीफ फसलों की बिजाई पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ने की जो आशंका पहले व्यक्त की जा रही थी वह अभी तक सही साबित नहीं हुई है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">निस्संदेह जून में मानसून का प्रदर्शन कमजोर रहा था लेकिन जुलाई-अगस्त की अच्छी वर्षा से स्थिति संभल गई और भारतीय किसानों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा फायदा उठाने का प्रयास किया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसके फलस्वरूप खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र सुधरते हुए पिछले साल के काफी करीब पहुंच गया है। यदि धान, मक्का, रागी एवं मूंग को छोड़ दिया जाए तो अन्य खरीफ फसलों का बिजाई क्षेत्र या तो गत वर्ष के आसपास या इससे ऊपर पहुंच गया है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">इसमें अरहर (तुवर), उड़द, मोठ, ज्वार, बाजरा, मूंगफली, तिल एवं कपास आदि शामिल हैं। कुल मिलाकर खरीफ फसलों की बिजाई संतोषजनक ढंग से हुई है और अब भी हो रही है जबकि देश के कई इलाकों में मानसूनी बारिश का दौर भी जारी है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अभी तक फसलों की प्रगति में ज्यादा व्यवधान नहीं आया है और अगर आगामी सप्ताहों के दौरान मौसम तथा मानसून सामान्य रहा तो कुल खरीफ उत्पादन में जोरदार गिरावट आने की संभावना क्षीण पड़ जाएगी। बेशक कुछ क्षेत्रों में मानसून के कमजोर रहने से अब भी वर्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है लेकिन यह ध्यान रखना जरुरी है कि बारिश का सीजन अभी जारी है।&nbsp;</span></p><p>खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 1057 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंचा है जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 1073 लाख हेक्टेयर से लगभग 16 लाख हेक्टेयर कम है। धान का क्षेत्रफल 13 लाख हेक्टेयर और मक्का का रकबा करीब 4 लाख हेक्टेयर पीछे है। </p><p>दूसरी ओर उड़द का उत्पादन क्षेत्र 2.66 लाख हेक्टेयर आगे हो गया है। कुल मिलाकर खरीफ फसलों की अभी तक संतोषजनक बिजाई हुई है और फसलों की प्रगति भी सामान्य ढंग से हो रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36683</guid>				
                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 10:41:34 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में कमी का अंतर 16 लाख हेक्टेयर पर आया]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-16-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। देश के विभिन्न भागों में मानसून की अच्छी बारिश होने से खरीफ कालीन फसलों की बिजाई में नियमित रूप से प्रगति हो रही है जिससे गत वर्ष की तुलना में इस बार इसके उत्पादन क्षेत्र में कमी का अंतर घटकर 16 लाख हेक्टेयर के करीब रह गया है जबकि पिछले सप्ताह 22 लाख हेक्टेयर के आसपास रहा था।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष 21 अगस्त तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 1056.70 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 1072.77 लाख हेक्टेयर से 16.07 लाख हेक्टेयर कम है। इस गिरावट में मुख्यतः धान का योगदान है जिसका उत्पादन क्षेत्र 418.29 लाख हेक्टेयर से 13.19 लाख हेक्टेयर घटकर इस बार 405.10 लाख हेक्टेयर रह गया है। </p><p>इसके अलावा मोटे अनाजों का रकबा भी 179.81 लाख हेक्टेयर से घटकर 176.36 लाख हेक्टेयर, तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 188.69 लाख हेक्टेयर से गिरकर 188.37 लाख हेक्टेयर, गन्ना का बिजाई क्षेत्र 58.87 लाख हेक्टेयर से गिरकर 58.44 लाख हेक्टेयर तथा कपास का क्षेत्रफल 108.73 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 108.45 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 112.14 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 113.63 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।</p><p>दलहन फसलों में अरहर, उड़द एवं मोठ के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि हुई है लेकिन मूंग का रकबा 1.25 लाख हेक्टेयर घट गया है। उड़द के बिजाई क्षेत्र में 2.66 लाख हेक्टेयर का शानदार इजाफा हुआ है।&nbsp;</p><p>मोटे अनाजों में ज्वार एवं बाजरा के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि हुई है जबकि मक्का एवं रागी का रकबा काफी घट गया है। मक्का का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 93.30 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 89.51 लाख हेक्टेयर तथा रागी का रकबा 6.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.81 लाख हेक्टेयर रह गया।&nbsp;</p><p>तिलहन फसलों के संवर्ग में मूंगफली, तिल एवं सूरजमुखी के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि हुई है लेकिन सोयाबीन एवं अरंडी के&nbsp; क्षेत्रफल में गिरावट आ गई है। सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 122.76 लाख हेक्टेयर से गिरकर 121.35 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का बिजाई क्षेत्र 7.42 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.88 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। गुजरात एवं राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में अरंडी की बिजाई कमजोर देखी जा रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36669</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 20:31:10 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कपास का रकबा गत वर्ष से केवल 28 हजार हेक्टेयर पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-28-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। हाल के सप्ताहों में गुजरात, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश जैसे प्रांतों में कपास की बिजाई में अच्छी प्रगति होने से अब इसका रकबा सुधरकर गत वर्ष के अत्यन्त निकट पहुंच गया है। महाराष्ट्र, राजस्थान एवं हरियाणा जैसे राज्यों में कपास की बिजाई कम क्षेत्रफल में हुई है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक एवं पंजाब में भी रकबा सामान्य स्तर से पीछे रह गया।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 21 अगस्त तक कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र 108.45 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 108.73 लाख हेक्टेयर से महज 28 हजार हेक्टेयर कम है। अधिकांश इलाकों में बिजाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।&nbsp;</p><p>उत्तरी क्षेत्र में कपास की अगैती बिजाई अप्रैल-मई में होती है इसलिए वहां नए माल की आवक सितम्बर में ही शुरू हो जाती है। अन्य प्रांतों में नई रूई की आवक अक्टूबर से आने लगती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोत्तरी होने से कपास का रकबा बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36667</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 20:29:02 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[लालमिर्च के भाव मजबूत : अभी मंदे की संभावना नहीं]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। जानकार सूत्रों का कहना है कि भाव ऊंचे होने के कारण वर्तमान में लालमिर्च में निर्यात मांग सीमित चल रही है। लेकिन मंडियों में आवक कम रह जाने एवं लोकल खरीद में सुधार होने के कारण विगत एक सप्ताह के दौरान लालमिर्च की कीमतों में 3/5 रुपए प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए अभी हाल-फिलहाल मंदे की संभावना नहीं है। क्योंकि चालू सीजन के दौरान लालमिर्च का उत्पादन 30/35 प्रतिशत की कमी आने के कारण मंडियों में स्टॉक कम रह गया है जबकि मध्य प्रदेश की नई फसल अक्टूबर माह के अंत तक शुरू होगी। बारिश की कमी से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बिजाई देरी से शुरू हुई है।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify; "><b>स्टॉक कम&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में लालमिर्च का स्टॉक 35/38 लाख बोरी होने के समाचार है जबकि गत वर्ष इसी समयवधि में स्टॉक 45/46 लाख बोरी का था। खम्मम मंडी में भी लालमिर्च का स्टॉक 14/15 लाख बोरी होने के अनुमान है जबकि गत वर्ष स्टॉक 18/20 लाख बोरी का था। वारंगल में भी स्टॉक गत वर्ष की तुलना में 4/5 लाख बोरी कम रहने के समाचार है। वर्तमान में वारंगल में लालमिर्च का स्टॉक 12/13 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>अधिक मंदा नहीं&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">जानकार सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश की नई फसल आने तक बाजार में मंदे की संभावना नहीं है। अगर आगामी दिनों में निर्यात मांग में वृद्धि होती है तो लालमिर्च के भाव सितम्बर माह में 8/10 रुपए प्रति किलो और बढ़ सकते हैं अगर निर्यात मांग नहीं बढ़ती तो वर्तमान भावों में 3/5 रुपए का मन्दा-तेजी चलता रहेगा। वर्तमान में गुंटूर मंडी में लालमिर्च तेजा का भाव 224/225 रुपए चल रहा है जबकि खम्मम में तेजा का भाव 229/230 रुपए बोला जा रहा है। वारंगल में भाव 218/220 रुपए बोला जा रहा है।</p><p style="text-align: justify; "><b>आवक&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण वर्तमान में मंडियों में किसानी माल की आवक काफी कम रह गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुन्टूर मंडी में आवक 14/15 हजार बोरी की रह गई है जबकि वारंगल एवं खम्मम में आवक 4/5 हजार बोरी की हो रही है। भाव ऊंचे होने के कारण निर्यात व्यापार कम है।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>मध्य प्रदेश&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">मध्य प्रदेश में लालमिर्च की बिजाई गत वर्ष की तुलना में दोगुना अधिक क्षेत्रफल पर की गई है। बिजाई के पश्चात मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है। जिस कारण इस वर्ष मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में दोगुना होने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। गत वर्ष मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन 28/30 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष बढ़कर 55/60 लाख बोरी की संभावना है। बशर्तें आगामी दिनों में फसल में रोग न लगे।</p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">लालमिर्च के दाम ऊंचे होने के कारण इस वर्ष लालमिर्च का निर्यात प्रभावित हुआ है चीन की मांग कम रही। बांग्ला देश&nbsp; की खरीद भी सीमित बनी हुई है मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026-27 के प्रथम दो माह अप्रैल-मई-2026 के दौरान लालमिर्च का निर्यात मात्रात्मक रूप में 35 प्रतिशत घटा है लेकिन निर्यात कीमत अधिक मिलने के कारण आय गत वर्ष के बराबर रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल-मई- 2026 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 119438 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 2603 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-मई- 2025 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 185011 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 2592 करोड़ रुपए की हुई थी वर्ष 2025-26 के दौरान लालमिर्च का कुल निर्यात 683681 टन का रहा और प्राप्त आय 10395.59 करोड़ की रही।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36665</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 19:34:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नुकसान के समाचारों से छोटी इलायची उत्पादन प्रभावित]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चालू सीजन के दौरान देश में छोटी इलायची उत्पादन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लेकिन यह सच है कि पूर्वानुमानों की तुलना में उत्पादन कम रहेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में अनुमान लगाया जा रहा था कि इस वर्ष&nbsp; देश में छोटी इलायची का उत्पादन 38/40 हजार के आसपास रहेगा। लेकिन पहले पानी की कमी एवं बाद में अत्यधिक बारिश से फसल को नुकसान हुआ है। जिस कारण कुछ व्यापारियों का मानना है कि उत्पादन 34/35 हजार टन का रहेगा। लेकिन कुछ व्यापारियों का कहना है कि उत्पादन 28/30 हजार टन ही हो पाएगा।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify; ">जानकारों का कहना है कि वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर पहली पीकिंग की नई इलायची शुरू हो चुकी है। लेकिन पानी की कमी के चलते यहां भी पीकिंग की क्वालिटी एवं उत्पादन गत वर्ष की तुलना में प्रभावित हुआ है। अगर आगामी दिनों में समय-समय पर उत्पादक केन्द्रों पर बारिश होती है तो आगामी दिनों में आने वाली पीकिंग की स्थिति अच्छी रहेगी। अगर बारिश नहीं होती है तो आने वाली अन्य पीकिंग में भी नुकसान रहेगा। छोटी इलायची की फसल 5/6 पीकिंग में आती है।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>भाव मजबूत</b></p><p style="text-align: justify; ">वर्तमान में छोटी इलायची के भाव मजबूती के साथ बोले जा रहे है। क्योंकि नए मालों की आवक में विलम्ब होने एवं लोकल में बढ़ती मांग के कारण एक माह के दौरान छोटी इलायची के भाव 100/200 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। वर्तमान में दिल्ली बाजार में छोटी इलायची का क्वालिटीनुसार भाव 2850/4000 रुपए बोला जाने लगा है जबकि नीलामी केन्द्रों पर एवरेज भाव 3100 रुपए एवं अधिकतम भाव 3900/4000 रुपए बोला जा रहा है। भाव ऊंचे होने के कारण वर्तमान में निर्यात व्यापार प्रभावित हुआ है। सूत्रों का कहना है कि आवक में विलम्ब होने के कारण इस वर्ष सितम्बर माह में नए मालों की आवक का दबाव बढ़ेगा। जिस कारण कीमतों में हाल-फिलहाल अधिक तेजी नहीं है लेकिन अगर आगामी दिनों में बारिश की कमी रहती है तो कीमतों में तेजी रहेगी।</p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">वित्त वर्ष 2026-27 के प्रथम दो माह अप्रैल-मई- 2026 के दौरान छोटी इलायची का निर्यात मात्रात्मक रूप से 50 प्रतिशत एवं आय में 46 प्रतिशत बढ़ा है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मई- 2026 में छोटी इलायची का निर्यात 2278 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 536.31 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-मई-2025 के दौरान निर्यात 1520 टन का रहा था और प्राप्त आय 366.71 करोड़ की रही। वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान छोटी इलायची का कुल निर्यात 15050 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 3672 करोड़ की रही।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36663</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 19:18:41 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बारिश की कमी से तुअर उत्पादन पर चिंता, अगले सप्ताह तेजी की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">महाराष्ट्र के प्रमुख तुअर उत्पादक क्षेत्रों में पिछले करीब 20 दिनों से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खरीफ तुअर की फसल पर चिंता बढ़ गई है। लगातार शुष्क मौसम जारी रहने पर अगले कुछ दिनों में बोई गई फसल पर प्रतिकूल असर दिखने की आशंका है।</span></p><p>अगस्त के पहले पखवाड़े तक महाराष्ट्र में तुअर की बुआई में सुधार होने से रकबे को लेकर चिंता कुछ कम हुई थी, लेकिन अब बारिश की कमी ने उत्पादन घटने की आशंका फिर बढ़ा दी है।</p><p>मांग में हल्की मजबूती से बाजार को समर्थन मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा है। ऊंचे भाव पर खरीदारी धीमी पड़ती है, जिससे बाजार में फिर नरमी आती है और मांग बढ़ने लगती है।</p><p>इस बीच, कर्नाटक में तुअर की फसल का परिदृश्य भी कमजोर बना हुआ है। राज्य में बुआई की गति धीमी रही है और बारिश की कमी के कारण पैदावार घटने की आशंका है।</p><p>महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की स्थिति तुअर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो उत्पादन संबंधी चिंताएं और मजबूत हो सकती हैं तथा अगले सप्ताह तुअर की कीमतों में और तेजी की संभावना बन सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36661</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 18:40:47 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[OMSS-D के तहत टूटे चावल का डायनेमिक रिजर्व मूल्य 2,100 रुपये प्रति क्विंटल तय]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/omss-d-2-100-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने OMSS (D) Policy 2026-27 के तहत जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए टूटे चावल (Broken Rice) का डायनेमिक रिजर्व मूल्य 2,100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</span></p><p>विभाग द्वारा 21 अगस्त 2026 को जारी पत्र के अनुसार, यह रिजर्व मूल्य कच्चे और उबले (Parboiled) दोनों प्रकार के टूटे चावल पर लागू होगा।</p><p>यह मूल्य 30 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाली नीलामियों के लिए प्रभावी रहेगा। नीलामी में वास्तविक लिफ्टिंग की अवधि चाहे जो भी हो, 30 सितंबर तक आयोजित सभी संबंधित नीलामियों पर 2,100 रुपये प्रति क्विंटल का रिजर्व मूल्य लागू रहेगा।</p><p>यह निर्णय OMSS (D) Policy 2026-27 में 17 अगस्त 2026 को किए गए संशोधन के बाद लिया गया है। विभाग ने बताया कि DRP समिति की 20 अगस्त 2026 को हुई बैठक में जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए टूटे चावल का रिजर्व मूल्य तय किया गया।</p><div><br></div>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36659</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 18:37:48 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[हल्दी में तेजी, जीरा स्थिर; तंग आपूर्ति और मौसम चिंता से हल्दी को सहारा]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">NCDEX पर शुक्रवार को हल्दी वायदा में तेजी जारी रही। सीमित आपूर्ति, घटते कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक और अल नीनो से जुड़ी मौसम संबंधी चिंताओं के कारण हल्दी की कीमतों को समर्थन मिला। वहीं धनिया वायदा में गिरावट रही, जबकि काली मिर्च में हल्की तेजी दर्ज की गई। जीरा लगभग स्थिर रहा।</span></p><p><b style="font-size: 1rem;">हल्दी 2% से अधिक चढ़ी</b></p><p>NCDEX पर सबसे सक्रिय अक्टूबर हल्दी अनुबंध 1.92% से अधिक बढ़कर 22,100 रुपये प्रति 100 किलोग्राम पर बंद हुआ। प्रतिकूल मौसम के कारण पैदावार घटने की आशंका से उत्पादन अनुमान कम रहने की चर्चा है, जिससे कीमतों को मजबूती मिल रही है।</p><p>हालांकि, हल्दी में तेजी पर कुछ हद तक अंकुश लग सकता है क्योंकि इस साल बुआई क्षेत्रफल में करीब 16% की वृद्धि का अनुमान है और यह पांच साल के औसत 1.88 लाख हेक्टेयर से ऊपर रहने की संभावना है।</p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>जीरा स्थिर</b></span></p><p>NCDEX पर सबसे सक्रिय सितंबर जीरा अनुबंध 20,705 रुपये प्रति 100 किलोग्राम पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भू-राजनीतिक तनाव से लॉजिस्टिक्स और पारंपरिक खरीदारों की मांग प्रभावित हो रही है।</p><p>तुर्की और सीरिया में बेहतर उत्पादन की संभावनाओं से भारतीय जीरे के निर्यात प्रीमियम पर दबाव है। साथ ही, खरीदार मिस्र और चीन से जीरे की खरीद बढ़ा रहे हैं। हालांकि, हाल की गिरावट के बाद कुछ खरीदारी लौटने से जीरे की कीमतों को सहारा मिल सकता है।</p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>धनिया में गिरावट, काली मिर्च मजबूत</b></span></p><p>सबसे सक्रिय अक्टूबर धनिया अनुबंध 70 रुपए गिरकर 16,210 रुपये प्रति 100 किलोग्राम रहा। घरेलू मसाला निर्माताओं की लगातार खरीदारी के कारण गिरावट सीमित रहने की संभावना है। ऊंचे स्तरों पर बीच-बीच में मुनाफावसूली के बावजूद धनिया में रुख स्थिर से सकारात्मक रह सकता है।</p><p>सितंबर काली मिर्च वायदा मामूली बढ़कर 725.8 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। पिछले वर्ष के उत्पादन और मौजूदा तंग आपूर्ति को देखते हुए मांग-आपूर्ति का अंतर बना हुआ है, जिससे काली मिर्च का दीर्घकालिक परिदृश्य सकारात्मक रहने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36657</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 18:35:01 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद चीनी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सरकार के हालिया हस्तक्षेप के बावजूद शुक्रवार को कई प्रमुख बाजारों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। ऊंची कीमतों पर मांग कमजोर रहने के बावजूद मिलें लगातार ऊंचे भाव पर बिक्री की पेशकश कर रही हैं।</span></p><p>पिछले कुछ सप्ताह से चीनी बाजार में काफी अनिश्चितता बनी हुई है। 40 वर्षों में चीनी की इतनी ऊंची कीमतें पहले कभी नहीं देखी गईं।</p><p>गुरुवार को सरकार ने कच्ची चीनी पर 100% आयात शुल्क हटा दिया और अक्टूबर के अंत तक 10 लाख टन कच्ची चीनी को शून्य शुल्क पर आयात की अनुमति दी। इस कदम से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ने और त्योहारी सीजन से पहले रिकॉर्ड कीमतों पर नियंत्रण आने की उम्मीद थी। हालांकि, इसके बावजूद प्रमुख बाजारों में कीमतों में तेजी जारी रही।</p><p>चीनी की कीमतों में जुलाई से तेजी बनी हुई है, लेकिन अगस्त में सीमित उपलब्धता और थोक उपभोक्ताओं की बढ़ी खरीदारी के कारण तेजी और तेज हो गई। सितंबर में गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी जैसे त्योहार हैं। इसके बाद अक्टूबर में नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा तथा नवंबर में दिवाली और छठ पूजा के कारण मांग अपने चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।</p><p>महाराष्ट्र में मुंबई में चीनी की कीमतों में 520-650 रुपये प्रति 100 किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई, जबकि कोल्हापुर में भाव 650-660 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक बढ़े।</p><p>उत्तर प्रदेश में कीमतों में 50-130 रुपये प्रति 100 किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई।</p><p>बाजार में आगे की दिशा को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है।</p><p>आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा मुख्य रूप से घरेलू आवक, आयात की वास्तविक मात्रा और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगी।</p><p>समय-समय पर मुनाफावसूली बिक्री करते रहें।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36655</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 18:30:43 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से 1.50 लाख हेक्टेयर आगे]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-1-50-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। खरीफ कालीन दलहन फसलों का रकबा लम्बे समय तक गत वर्ष से पीछे रहने के बाद अब आगे हो गया है। उड़द एवं मोठ की बिजाई तो पहले से ही आगे चल रही थी जबकि अब अरहर (तुवर) की बिजाई भी आगे निकल गई है। केवल मूंग का क्षेत्रफल पीछे रह गया है। अन्य दलहनों का रकबा भी कुछ घट गया है।&nbsp;</span></p><p>नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान 21 अगस्त 2026 तक दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 113.63 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। गत वर्ष इसी अवधि में बिजाई क्षेत्र 112.14 लाख हेक्टेयर रहा था। इस तरह क्षेत्रफल में 1.49 लाख हेक्टेयर का इजाफा हो गया। कुछ क्षेत्रों में बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है।&nbsp;</p><p>सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि गत वर्ष के मुकाबले इस बार अरहर का उत्पादन क्षेत्र 43.44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 43.86 लाख हेक्टेयर, मोठ का बिजाई क्षेत्र 9.17 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 9.22 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का क्षेत्रफल 21.72 लाख हेक्टेयर से उछलकर 24.38 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। </p><p>दूसरी ओर मूंग का रकबा 33.93 लाख हेक्टेयर से घटकर 32.68 लाख हेक्टेयर तथा अन्य दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 3.63 लाख हेक्टेयर से गिरकर 3.27 लाख हेक्टेयर रह गया। तुवर की बिजाई पहले गत वर्ष से बहुत पीछे चल रही थी मगर अब 42 हजार हेक्टेयर आगे हो गई है। यदि आगामी समय में मौसम की हालत अनुकूल रही तो इस महत्वपूर्ण दलहन के उत्पादन में गिरावट आने की आशंका लगभग समाप्त हो जाएगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36653</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:49:07 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अल नीनो के खतरे के बावजूद मानसून की सक्रियता जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। वैश्विक मौसम मॉडल्स से स्प्ष्ट संकेत मिलता है कि विषुवतीय प्रशांत महासागर से उत्पन्न हुआ अल नीनो मौसम चक्र लगातार ताकतवर एवं तीव्र होता जा रहा है जिससे एशिया, दक्षिण अमरीका तथा ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में वर्षा का पैटर्न प्रभावित होने की संभावना है लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय मानसून पर अल नीनो का असर उम्मीद से कम पड़ा है। 1 जून से 20 अगस्त 2026 तक देश में सामान्य औसत के सापेक्ष 13 प्रतिशत कम वर्षा हुई जबकि अकेले जून में वर्षा की कमी 7 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसका मतलब यह हुआ कि जुलाई-अगस्त के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रदर्शन बेहतर रहा और बारिश भी काफी अच्छी हुई।&nbsp;</span></p><p>मानसून को नियमित रूप से समुद्री एवं स्थलीय कम दाब के क्षेत्र तथा डिप्रेशन का सहयोग- समर्थन मिल रहा है। मौसम विभाग पहले ही देश के 23 राज्यों में तेज हवा के साथ भारी वर्षा का अलर्ट जारी कर चुका है। अब उसने कहा है कि दक्षिण भारत के केरल, माही तथा लक्ष्यद्वीप में आगामी दिनों के दौरान दूर-दूर तक भारी या सामान्य बारिश हो सकती है। </p><p>देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर एवं उत्तरी भाग में मानसून की सक्रियता बढ़ने लगी है जिससे वहां जोरदार बारिश होने की उम्मीद है। इससे खरीफ फसलों को फायदा होगा। राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के काफी करीब पहुंच चुका है इसलिए अल नीनो के संभावित असर से कुल उत्पादन में जबरदस्त गिरावट आने की आशंका काफी हद तक दूर हो गई है।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग के मुताबिक 20 अगस्त से 2 सितम्बर तक भारत में सामान्य औसत से कम वर्षा हो सकती है। इससे खरीफ फसलों पर कुछ असर पड़ने की संभावना है। यदि उसके बाद मानसून की गतिशीलता में सुधार आता है तो ज्यादा चिंता की बात नहीं रहेगी। दो बारिश के बीच में 10-15 दिनों का अंतर अक्सर देखा जाता है और फिर यह वर्ष तो अल नीनो का है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36651</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:46:05 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उच्च प्रोटीन युक्त गेहूं की वैश्विक आपूर्ति जटिल रहने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सस्काटून। कनाडा सहित कुछ अन्य निर्यातक देशों में मौसम की हालत अनुकूल नहीं होने से इस बार गेहूं की क्वालिटी प्रभावित होने तथा उसमें प्रोटीन का अंश घटने की संभावना है जिससे विश्व स्तर पर उच्च प्रोटीन युक्त गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति 2026-27 सीजन के दौरान कुछ हद तक जटिल रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है।&nbsp;</span></p><p>उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार मांग एवं आपूर्ति में अंतर रहने से उच्च क्वालिटी के गेहूं का भाव ऊंचा एवं तेज रह सकता है। उनका कहना है कि इस बार पश्चिमी यूरोप के कुछ भागों एवं यूक्रेन में नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का कम इस्तेमाल हुआ और ऊंचे तापमान तथा शुष्क मौसम के कारण फसल अपने नियत समय से पूर्व ही पकने लगी। इसके फलस्वरूप वहां उच्च प्रोटीन वाले मिलिंग ग्रेन के गेहूं की आपूर्ति घट सकती है। </p><p>इससे उसकी कीमतों को मजबूत समर्थन मिलने के आसार है। दूसरी ओर फीड क्वालिटी के गेहूं का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है इसलिए उसके दाम में ज्यादा तेजी आना मुश्किल लगता है।&nbsp;</p><p>पिछले कुछ वर्षों से दोनों श्रेणियों के गेहूं के दाम में अंतर कम देखा जा रहा है लेकिन इस बार अंतर बढ़ने की संभावना है। 14.5 प्रतिशत एवं 13.5 प्रतिशत प्रोटीन के अंश वाले गेहूं का भाव लगभग समान हो गया है। यही स्थिति 13.5 प्रतिशत एवं 13 प्रतिशत प्रोटीन वाले गेहूं की भी देखी जा रही है।</p><p> इससे किसानों को प्रोटीन के उच्च अंश वाले गेहूं का उत्पादन बढ़ाने का समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। कनाडा तथा अमरीका में सामान्य श्रेणी के गेहूं का उत्पादन&nbsp; बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36649</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:59:56 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[डीजीएफटी ने चीनी आयात के नियमों का निर्धारण किया]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के शुल्क&nbsp; मुक्त आयात की अनुमति दी है जिसके लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने नियमों-शर्तों एवं प्रक्रियाओं का निर्धारण कर दिया है। 31 अक्टूबर 2026 तक इस कोटे की चीनी का आयात किया जा सकेगा। सुपात्र एडवांस ऑथराईजेशन (अग्रिम प्राधिकार) धारकों को एक बार के लिए अपने वर्तमान प्राधिकार को टीआरक्यू प्रणाली में बदलने का विकल्प भी दिया गया है।&nbsp;</span></p><p>निर्धारित नियम के अनुसार टीआरक्यू के तहत चीनी आयात हेतु ऑनलाइन आवेदन 21 से 28 अगस्त 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे। केवल उन्ही इकाइयों एवं रिफाइनरीज का आवेदन मान्य होगा जिसके पास कच्ची चीनी को प्रोसेस्ड करने तथा उसे सफेद चीनी अथवा रिफाइंड चीनी में बदलने के लिए निजी क्रियाशील सुविधाएं मौजूद हैं।&nbsp;</p><p>पात्र आवेदकों को डीजीएफटी के आयात प्रबंधन सिस्टम में टैरिफ रेट कोटा सेक्शन में अपना आवेदन करना होगा और उसे अपनी रिफाइनिंग क्षमता का स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस आवेदन के साथ आवेदकों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी 'सहमति से संचालन' (Consent to operate) अथवा रिफाइनिंग क्षमता का प्रमाण देने वाले अन्य सम्बद्ध दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।&nbsp;</p><p>आवेदकों के सभी कागजातों की जांच-पड़ताल की जाएगी और गलत या असंगत जानकारी मिलने पर उसका आयातक-निर्यातक कोड (आईईसी) निलंबित किया जा सकता है। इसके साथ-साथ सम्बद्ध अधिनियम के तहत उस पर दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है। जो आयातक 15 अक्टूबर तक अपने कोटे की चीनी का सम्पूर्ण आयात पूरा करने का वचन देंगे उन्हें कोटा आवंटन में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का इरादा जल्दी से जल्दी आयात सुनिश्चित करना है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36647</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:45:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अगस्त में सोयाबीन का रिकॉर्ड आयात होने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। विभिन्न कारणों से चालू माह (अगस्त) के दौरान देश में सोयाबीन तेल का आयात तेजी से बढ़कर एक नए मासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है। वैश्विक बाजार में सोया तेल का भाव प्रतिस्पर्धी स्तर पर बना हुआ है जबकि रूस-यूक्रेन के बीच भयंकर युद्ध जारी रहने से सूरजमुखी तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित होने के संकेत मिल रहे हैं। इसकी क्षतिपूर्ति सोयाबीन तेल से की जा सकती है। भारत में त्यौहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भी आयात बढ़ाना आवश्यक है।&nbsp;</span></p><p>उद्योग व्यापार समीक्षकों के अनुसार अगस्त 2026 में सोयाबीन तेल का आयात तेजी से उछलकर 6.20 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है जो न केवल अगस्त के लिए बल्कि किसी भी एक माह के लिए आयात का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान अभी तक सोयाबीन तेल का औसत मासिक आयात 4.25 लाख टन रहा है जिसके मुकाबले अगस्त 2026 का आयात 46 प्रतिशत अधिक हो सकता है।&nbsp;</p><p>भारत में सोयाबीन तेल का आयात मुख्यतः अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से होता है जबकि सूरजमुखी तेल रूस एवं यूक्रेन से मंगाया जाता है। रूस एवं यूक्रेन एक-दूसरे के बंदरगाहों तथा व्यावसयिक जहाजों पर भीषण बमबारी कर रहे हैं जिसे सूरजमुखी तेल का शिपमेंट बाधित हो रहा है। जहां तक पाम तेल का सवाल है तो इसका भाव बढ़कर उस स्तर पर पहुंच गया है जहां सोयाबीन तेल इसकी प्रतिस्पर्धी में आ गया है।</p><p>भारत में सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन एक निश्चित सीमा में स्थिर हो गया है जबकि सोया तेल की घरेलू मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सोया तेल के आयात पर भारत की निर्भरता निकट भविष्य में कम या खत्म होने वाली नहीं है।&nbsp;</p><p>सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से कुछ पीछे हो गया है जबकि मौसम एवं मानसून की हालत भी पूरी तरह फसल के लिए अनुकूल नहीं है। इसकी अगैती बिजाई वाली नई फसल की कटाई-तैयारी सितम्बर के तीसरे-चौथे सप्ताह में आरंभ हो सकती है मगर सोया तेल के आयात पर इसका विशेष असर नहीं पड़ेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36644</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 16:08:00 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[नैफेड की भोपाल इकाई द्वारा चना, मसूर एवं सरसों की नीलामी बिक्री का ऑफर]]></title>
                <link><![CDATA[https://igrain.in/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नैफेड) की भोपाल (मध्य प्रदेश) इकाई द्वारा दो अलग-अलग ई-नीलामी के माध्यम से चना, मसूर एवं सरसों की बिक्री का ऑफर दिया गया है। इसके लिए महासंघ द्वारा दो अधिसूचना जारी की गई मगर उसमें बिक्री की मात्रा का विवरण नहीं दिया गया। दोनों नीलामी 11.00 से 11.30 बजे के बीच आयोजित होगी जिसे 11.45 बजे तक बढ़ाया जा सकता है।&nbsp;</span></p><p>एक नीलामी में रबी 2023 एवं 2024 की फसल की नीलामी बिक्री की जाएगी जबकि रबी 2024 के मसूर की नीलामी भी की जाएगी। दोनों दलहनों को मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के अंतर्गत वर्गीकृत किया किया गया है। इसकी नीलामी में रबी 2026 के चना की बिक्री की जाएगी जबकि जबकि रबी 2024 की सरसों की बिक्री भी इस नीलामी में हो सकेगी। इन दोनों जिंसों को मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।&nbsp;</p><p>दोनों नीलामियों के लिए बिडिंग की प्रक्रिया दो चरणों में उत्पन्न होगी। पहला चरण मूल्य तथा सबसे ऊँची बोली लगाने वाले बिडर्स का पता लगाने का होगा जबकि दूसरा चरण बिड-मैचिंग सेशन का होगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/36642</guid>				
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:41:04 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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