उर्वरक संकट दूर करने पर जोर
21-Mar-2026 12:36 PM
पहले ईरान- इजरायल युद्ध जल्दी समाप्त होने की उम्मीद की जा रही थी जिससे खाड़ी क्षेत्र के देशों से रासायनिक उर्वरकों एवं पेट्रो रसायनो का आयात नियमित रूप से जारी रहने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन अब बदलते हालात को देखते हुए भारत सरकार चिंतित हो रही है।
पिछले 21-22 दिन से युद्ध जारी है और निकट भविष्य में इसके बंद होने की संभावना दिखाई नहीं पड़ती है। इसके फलस्वरूप पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों से उर्वरकों का आयात ठप्प पड़ गया है। उधर चीन ने भी इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी है।
उर्वरक उत्पादन के लिए कच्चे माल का अभाव होने लगा है। जून से भारत में खरीफ फसलों की बिजाई आरंभ होने वाली है और उससे पूर्व देश के सभी प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में उर्वरकों एवं कीटनाशी रसायनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है
ताकि किसानों को सही समय पर अपनी गतिविधि आरंभ करने में आसानी हो। वैसे भी इस बार जुलाई-सितम्बर के दौरान अल नीनो मौसम चक्र के सक्रिय रहने की आशंका है जो कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकता है। ऐसी हालत में उर्वरकों का अभाव खतरनाक साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कृषि मंत्रालय को उर्वरकों एवं रसायनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जरुरी उपाय करने के लिए कहा है।
पीएमओ ने कृषि मंत्रालय से यह भी कहा है कि कृषि क्षेत्र को किस तरह की चुनौतियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है
इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई जाए ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके। उर्वरक आयात के लिए भारत ने रूस, मोरक्को एवं बेलारूस जैसे देशों से बातचीत आरंभ कर दी है।
