बारदाने की कमी से गेहूं की सरकारी खरीद प्रभावित होने की संभावना
21-Mar-2026 12:04 PM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्र सरकार ने 2026 के रबी मार्केटिंग सीजन (अप्रैल-जून) में 303 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य नियत किया है लेकिन बारदाना (खाली बोरी) की उपलब्धता जरूरत से कम होने के कारण खरीद की प्रक्रिया आंशिक रूप से प्रभावित होने तथा खरीद में देरी होने की आशंका बढ़ रही है।
इस वर्ष गेहूं की पैकिंग के लिए पंजाब में 14.30 करोड़ बोरी, मध्य प्रदेश में 10 करोड़, हरियाणा में 8.25 करोड़ राजस्थान में 2.50 करोड़ तथा उत्तर प्रदेश में 1.40 करोड़ बोरी सहित कुल 36.45 करोड़ नग बारदाने की जरूरत आंकी गई है
जबकि केन्द्र सरकार द्वारा 23.50 करोड़ बोरी (नए कट्टे) की खरीद की मंजूरी दी गई है। अगर एक बोरी में औसतन 50 किलो गेहूं की दैनिक मान लिया जाए तो इस 36.45 करोड़ बोरी में करीब 182.25 लाख टन गेहूं की पैकिंग हो सकती है।
दरअसल बांग्ला देश से जूट का आयात बंद होने से भारत में बारदाने का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए पीपी बारदाने के उपयोग का विकल्प खुला रखा था मगर खाड़ी युद्ध के कारण इसके आयात में देरी हो रही है।
इसे देखते हुए बारदाने की कमी के लिए सरकार को दोषी नहीं माना जा सकता है। महज आकस्मिक घटना इसके लिए जिम्मेदार है। पीपी बारदाना के आयात में जितनी देरी होगी, गेहूं की खरीद भी उसी गति से प्रभावित हो सकती है।
पीपी बारदाने के लिए कच्चे माल का आयात सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात एवं ओमान जैसे देशों से होता है मगर अभी वहां हालात असामान्य है। उद्योग- व्यापार क्षेत्र को सजग-सतर्क रहने की जरूरत है
क्योंकि यदि सरकारी खरीद में देरी हुई तो खुली (थोक) मंडियों में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ सकती है और इसकी कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना भी रहेगी।
