रूई की कीमत नरम पड़ने के बावजूद कपास का रकबा बढ़ने के आसार
11-Jun-2026 07:32 PM
अहमदाबाद। सीमा शुल्क स्थगित होने के बाद से रूई के घरेलू बाजार भाव में आंशिक नरमी का माहौल बना हुआ है जबकि मानसून की चाल भी धीमी है। गुजरात एवं मध्य प्रदेश में मानसून अभी नहीं पहुंचा है जबकि महाराष्ट्र के भी सीमित क्षेत्रों में इसकी पहुंच हुई है। लेकिन दक्षिणी राज्यों में अच्छी बारिश हुई है और हो रही है। गुजरात में कपास की खेती के प्रति किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है जबकि वहां नर्मदा नदी का पानी भी सिंचाई उद्देश्य के लिए नहरों में छोड़ा जा रहा है।
उत्तरी क्षेत्र के पंजाब एवं हरियाणा में इस बार कपास के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट आई है लेकिन राजस्थान में बिजाई क्षेत्र तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। मध्यवर्ती या पश्चिमी संभाग में भी कपास का रकबा काफी बढ़ सकता है।
वहां गुजरात और महाराष्ट्र जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी इस महत्वपूर्ण-रेशेदार एवं व्यावसायिक (नकदी) फसल की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। दक्षिणी राज्यों में भी तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कपास के क्षेत्रफल में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि रूई के आयात पर लगे सीमा शुल्क को 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए स्थगित किया गया है और इस अवधि में आयातकों को 11 प्रतिशत के शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। अक्टूबर से कपास की नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी। यदि उस समय थोक मंडी भाव नीचे रहा तो भी किसानों को ज्यादा कठिनाई नहीं होगी।
सरकार ने 2026-27 के सीजन हेतु रूई का न्यूनतम समर्थन मूल्य 557 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है जिससे मीडियम रेशेवाली श्रेणी का समर्थन मूल्य बढ़कर 8267 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों का समर्थन मूल्य बढ़कर 8667 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है और किसानों से इस समर्थन मूल्य पर रूई खरीदने के लिए सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) तैयार रहेगी।
