News Capsule/न्यूज कैप्सूल: मानसून में सुधार से खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन रकबा अब भी पिछले साल से काफी पीछे

14-Jul-2026 10:09 AM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: मानसून में सुधार से खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन रकबा अब भी पिछले साल से काफी पीछे
★ दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार बढ़ने से 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है। इससे पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई का अंतर घटकर 16 प्रतिशत रह गया, जो एक सप्ताह पहले लगभग 21 प्रतिशत था। हालांकि, बुवाई का रकबा अभी भी इतना कम है कि अंतिम खरीफ उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है।
★ चिंता की एक बड़ी वजह यह भी है कि हाल की अच्छी बारिश के बाद मानसून की गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले 6–7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में वर्षा की गतिविधियां सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है।
★ 10 जुलाई तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार धान, दलहन, मोटे अनाज, तिलहन और कपास सहित सभी प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि से कम है, हालांकि 5 जुलाई की तुलना में अंतर कुछ कम हुआ है।
★ धान, जो खरीफ की सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल है, का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में सामान्य वर्षा होती है तो धान की फसल की भरपाई संभव है। लेकिन दलहन और तिलहन की स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है।
★ 10 जुलाई तक दलहनों की बुवाई पिछले वर्ष से 23.3 प्रतिशत कम रही, जबकि मोटे अनाज का रकबा 22.5 प्रतिशत पीछे है। तिलहनों की बुवाई 1.178 करोड़ हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत कम है। वहीं कपास का रकबा भी 15.3 प्रतिशत कम दर्ज किया गया।
★ दूसरी ओर, जलाशयों में पानी की उपलब्धता में सुधार देखने को मिला है। 9 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान सरकार द्वारा निगरानी किए जाने वाले सभी 166 प्रमुख जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है। पश्चिम भारत के 53 जलाशयों में जल भंडारण 10 वर्षों के औसत से 48 प्रतिशत अधिक है। हालांकि कुल जल भंडारण अभी पिछले वर्ष के स्तर से कम है, लेकिन यह 10 वर्षीय औसत से ऊपर बना हुआ है।
★ 9 जुलाई तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण उनकी लाइव स्टोरेज क्षमता का 32.38 प्रतिशत पहुंच गया, जो एक सप्ताह पहले 26 प्रतिशत था। इससे आने वाले हफ्तों में सिंचाई और खरीफ फसलों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।