News Capsule/न्यूज कैप्सूल: DDGS आयात पर 5 लाख टन की संभावित सीमा, फिलहाल डिस्टिलर्स को राहत
10-Feb-2026 01:24 PM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: DDGS आयात पर 5 लाख टन की संभावित सीमा, फिलहाल डिस्टिलर्स को राहत
★ भारत–अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील के तहत अमेरिका से DDGS के आयात पर पहले चरण में 5 लाख टन की सीमा तय हो सकती है। इससे घरेलू डिस्टिलरी उद्योग को फिलहाल राहत मिली है।
★ भारत में अभी मक्का और चावल आधारित एथेनॉल से लगभग 25–30 लाख टन DDGS उत्पादन होता है।
★ 5 लाख टन का कोटा कुल घरेलू उत्पादन का लगभग 10% है।
★ अगर आयात 15–20 लाख टन तक बढ़ा, तो घरेलू मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
★ DDGS की मौजूदा लैंडेड कीमत ₹23–25 प्रति किलो है, जो भारतीय कीमतों के करीब है। अमेरिकी DDGS की गुणवत्ता (कम अफ्लाटॉक्सिन) बेहतर मानी जाती है, इसलिए यह कीमत और क्वालिटी दोनों में प्रतिस्पर्धा करेगा।
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सोयामील और तेलहन बाजार पर असर
★ DDGS पोल्ट्री फीड में सोयामील का सीधा विकल्प है।
★ अभी DDGS ₹23–24/kg जबकि सोयामील करीब ₹45/kg है।
★ ज्यादा आयात से सोयामील के दाम दब सकते हैं, जिससे सोयाबीन किसानों को MSP से ऊपर कीमत मिलना मुश्किल हो सकता है।
★ पिछले दो खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की मंडियों में सोयाबीन भाव MSP से ज्यादा नहीं निकल पाए।
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सोयाबीन तेल पर भी नजर
★ 2024-25 में भारत ने रिकॉर्ड 54.7 लाख टन सोयाबीन तेल आयात किया।
★ अर्जेंटीना (28.9 लाख टन) और ब्राजील (11.4 लाख टन) प्रमुख सप्लायर रहे।
★ अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ 4% (1.8 लाख टन) रही।
★ यदि अमेरिकी सोयाबीन तेल को शून्य शुल्क (सिर्फ 5% कृषि उपकर) पर अनुमति मिलती है, तो अर्जेंटीना के क्रूड सोया तेल और पाम तेल के दाम पर दबाव आ सकता है।
★ हालांकि अमेरिकी तेल आमतौर पर अर्जेंटीना/ब्राजील से $30–40 प्रति टन महंगा होता है, इसलिए ड्यूटी लाभ सीमित रह सकता है।
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निष्कर्ष
★ 5 लाख टन DDGS कोटा फिलहाल नियंत्रित असर डालेगा।
★ बड़ा कोटा आने पर डिस्टिलरी, तेल मिलों और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।
★ उपभोक्ताओं के लिए सस्ता खाद्य तेल सकारात्मक रहेगा।
