मोटे अनाज की बुवाई पिछले वर्ष से पीछे, फिर भी किसानों का रुझान बढ़ा; मक्का को एथेनॉल मांग से मिल रहा समर्थन

06-Jul-2026 07:06 PM

देश में 5 जुलाई 2026 तक खरीफ मोटे अनाजों की कुल बुवाई 60.12 लाख हेक्टेयर हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 72.00 लाख हेक्टेयर थी। यह 5 वर्षीय औसत 182.63 लाख हेक्टेयर की तुलना में भी काफी कम है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की देरी और सामान्य से कम वर्षा के कारण अधिकांश राज्यों में बुवाई की गति प्रभावित हुई है। हालांकि, कम पानी की आवश्यकता होने के कारण किसानों का रुझान मोटे अनाजों की ओर लगातार बढ़ रहा है।


मक्का की बुवाई 5 जुलाई तक 33.00 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 35.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी। यह 5 वर्षीय औसत 80.77 लाख हेक्टेयर से काफी कम है। मानसून में देरी के बावजूद किसानों के बीच मक्का की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग और किसानों को पिछले कुछ वर्षों में मिले बेहतर भाव मक्का की खेती को आकर्षक बना रहे हैं। यदि आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो मक्का की बुवाई में तेजी आने की संभावना बनी हुई है।


बाजरा की बुवाई 20.82 लाख हेक्टेयर रही है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 30.00 लाख हेक्टेयर थी। यह 5 वर्षीय औसत 70.94 लाख हेक्टेयर से भी काफी कम है। वहीं ज्वार की बुवाई 4.53 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 4.90 लाख हेक्टेयर से कुछ कम है तथा 5 वर्षीय औसत 14.40 लाख हेक्टेयर से काफी नीचे बनी हुई है।


राजस्थान में समय पर और अच्छी वर्षा होने से मोटे अनाजों, विशेषकर बाजरा और मक्का की बुवाई में अच्छी प्रगति देखने को मिली है। राज्य में बेहतर वर्षा के कारण किसानों ने तेजी से बुवाई की है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रकबे को कुछ सहारा मिला है।


जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मानसून के बीच कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि कई क्षेत्रों में किसान धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के बजाय मक्का, बाजरा और ज्वार जैसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, यदि आने वाले एक-दो सप्ताह में प्रमुख उत्पादक राज्यों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो मोटे अनाजों की बुवाई सामान्य स्तर तक पहुंचना कठिन होगा।