खाद्य तेलों के आयात खर्च में भारी वृद्धि होने की सम्भावना
20-May-2026 03:50 PM
मुंबई। घरेलू स्रोतों से कम आपूर्ति होने, वैश्विक बाजार भाव ऊंचा रहने एवं रूपए की विनिमय दर में भारी गिरावट आने के कारण इस वर्ष खाद्य तेलों के आयात खर्च में काफी बढ़ोत्तरी होने की सम्भावना है। मौजूदा मार्केटिंग सीजन की पहली छमाही में यानी नवम्बर 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान इसके आयात बिल में जोरदार वृद्धि दर्ज की गयी जबकि दूसरी छमाही (मई-अक्टूबर 2026) में भी इसका स्तर ऊंचा रहने का अनुमान है। घरेलू प्रभाग में खाद्य तेलों की मांग एवं आपूर्ति के बीच भारी अंतर बना रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण सामुद्रिक परिवहन के लिए किराया-भाड़ा काफी बढ़ गया है और अमरीकी डॉलर के सापेक्ष भारतीय रुपया 96 अनकट के स्तर को पार कर गया है। इससे खासकर रूपए के दृष्टिकोण से खाद्य तेलों के आयात बिल में जबरदस्त इजाफा होने के प्रबल आसार हैं।
भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक देश लम्बे समय से बना हुआ है और आने वाले वर्षों में भी इसकी यह पोजीशन बरकरार रहने की सम्भावना है। वस्तुतः विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता बढ़कर 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच गयी है। घरेलू प्रभाग में तिलहनों की पैदावार एवं निश्चित सीमा में स्थिर हो गयी है इसलिए खाद्य तेलों के उत्पादन में ज्यादा वृद्धि संभव नहीं है। भारत में पाम तेल, सोया तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात होता है।
