गेहूं का निर्यात 50 लाख टन तक पहुंचना मुश्किल

20-May-2026 05:22 PM

नई दिल्ली। रिकॉर्ड घरेलू उत्पदान एवं कमजोर मंडी भाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस वर्ष 50 लाख टन गेहूं के निर्यात की स्वीकृति प्रदान की है और इसके साथ-साथ 10 लाख टन मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों के शिपमेंट की अनुमति भी दी है। सरकार ने शुरूआती चरण में 25 लाख टन गेहूं तथा 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की मंजूरी दी थी मगर बाद में दोनों का निर्यात कोटा दोगुना बढ़ा दिया। ध्यान देने की बात है कि गेहूं तथा इसके उत्पादों का निर्यात अब भी प्रतिबंधित सूची में शामिल है और इसलिए निर्यातक केवल निर्धारित कोटे तक का ही शिपमेंट कर सकते हैं।

बेशक गेहूं का थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से नीचे या उसके आसपास चल रहा है लेकिन फिर भी वैश्विक निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी स्तर का नहीं माना जा रहा है क्योंकि रूस एवं युक्रेन सहित अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में गेहूं का निर्यात ऑफर मूल्य अपेक्षाकृत नीचे चल रहा है। इसना अवश्य है कि बांग्लादेश और श्रीलंका सहित अन्य पडोसी देशों के लिए भारतीय गेहूं अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध होगा क्योंकि इस पर ऊंचा शिपमेंट चार्ज नहीं लगेगा।

केंद्र सरकार ने इस बार 1202 लाख टन तथा उद्योग-व्यापार संगठनों ने 1106 लाख टन गेहूं के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है जो एक रिकॉर्ड स्तर है। गेहूं की सरकारी खरीद इस बार चार वर्षों में सबसे ज्यादा हुई है और केंद्रीय पूल में इसका स्टॉक बढ़कर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई ख़तरा नहीं है। सरकार स्वयं गेहूं का भाव ऊंचा उठाने का इरादा रखती है ताकि किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो सके।

इस बार अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं अर्जेंटीना सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में गेहूं का उत्पादन घटने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके फलस्वरूप जुलाई 2026 के बाद गेहूं के वैश्विक बाजार मूल्य में कुछ सुधार आने के आसार हैं जिससे भारतीय निर्यातकों को थोड़ी राहत मिल सकती है।