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24-Oct-2026 12:11 PM
नई दिल्ली। कम क्षेत्रफल में बिजाई होने तथा महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में सूखे का गंभीर संकट बरकरार रहने से इस बार खरीफ कालीन मक्का के घरेलू उत्पादन में काफी गिरावट आने की संभावना है।
दूसरी ओर पशु आहार, पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण उद्योग के साथ-साथ एथनॉल निर्माण डिस्टीलरीज में भी मक्का की मांग एवं खपत बढ़ने की उम्मीद है। इसके फलस्वरूप मांग तथा आपूर्ति का समीकरण जटिल रहने तथा कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बनने के आसार हैं। मक्का का भाव एमएसपी से ऊंचा रह सकता है।
पशु आहार क्षेत्र ने खरीफ कालीन मक्का का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 16.75 प्रतिशत घटकर इस बार 232.09 लाख टन रह जाने की संभावना व्यक्त की है। मक्का का बिजाई क्षेत्र भी 9 प्रतिशत गिरकर 89.06 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि इसकी औसत उपज दर में भी कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है।
कम्बाइन लिवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अनुसार इस वर्ष सोयाबीन का घरेलू उत्पादन 3.52 प्रतिशत गिरकर 124.06 लाख टन पर अटक सकता है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने खरीफ 2025 में 128.59 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन आंका था।
एसोसिएशन के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान मक्का का उत्पादन महाराष्ट्र में 24.22 प्रतिशत गिरकर 22.80 लाख टन तथा कर्नाटक में 33.37 प्रतिशत घटकर 34 लाख टन पर अटक जाने का अनुमान है।
जहां तक सोयाबीन का सवाल है तो इसका उत्पादन महाराष्ट्र में 4 प्रतिशत गिरकर 46.50 लाख टन तथा सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- मध्य प्रदेश में 10.43 प्रतिशत घटकर 53.20 लाख टन रह जाने की संभावना है।
मक्का का भाव आगामी समय में मजबूत रहने की उम्मीद है। रबी कालीन फसल पर भी संशय बना हुआ है। मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 10 रुपए प्रति क्विंटल की मामूली वृद्धि हुई है जिससे इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट रहा है। एथनॉल उद्योग में मांग बढ़ने पर मक्का के दाम में तेजी आ सकती है।