धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आने की आशंका
07-Jul-2026 05:09 PM
नई दिल्ली। पिछले साल खरीफ सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर धान का उत्पादन क्षेत्र तेजी से उछलकर 446.70 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था जिससे देश में चावल का भी रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। 2026-27 सीजन के लिए धान का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 412 लाख हेक्टेयर आंका गया है लेकिन इस बार रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस बार 5 जुलाई तक धान का उत्पादन क्षेत्र 60.24 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के रकबा 69.30 लाख हेक्टेयर से 9.06 लाख हेक्टेयर तथा इस इस तिथि के लिए नियत सामान्य औसत क्षेत्रफल 66.57 लाख हेक्टेयर से 6.33 लाख हेक्टेयर कम है।
जून में मानसून की वर्षा काफी कम हुई। जुलाई के प्रथम सप्ताह में इसकी अच्छी सक्रियता देखी गई जिससे धान की रोपाई की गति कुछ तेज हुई लेकिन रकबा अभी गत वर्ष से पीछे है।
आगे भी धान का उत्पादन क्षेत्र मानसून की वर्षा पर निर्भर रहेगा। मध्य जुलाई के बाद बारिश की हालत अनिश्चित एवं अनियमित रहने की संभावना है जिससे किसानों को धान की खेती में कठिनाई हो सकती है।
