आयात एवं घरेलू उत्पादन के सहारे उर्वरक का संकट होगा दूर

07-Jul-2026 07:22 PM

नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही शुरू होने से भारत में न केवल यूरिया एवं डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का नियमित आयात हो रहा है बल्कि इसके निर्माण में काम आने वाला प्रमुख कच्चा माल भी मंगाया जा रहा है ताकि घरेलू प्रभाग में उत्पादन बढ़ाया जा सके।

मानसून की संभावित कमजोर स्थिति को देखते हुए चालू खरीफ सीजन में उर्वरकों का उपयोग पूर्व अनुमान से कुछ कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। 

उल्लेखनीय है कि चालू खरीफ सीजन में 383.90 लाख टन उर्वरकों की घरेलू मांग रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके सापेक्ष 2 जुलाई को देश में 163.65 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक मौजूद था जो कुल अनुमानित मांग का 43 प्रतिशत है। जून का महीना समाप्त हो चुका है और अब जुलाई-सितम्बर की मांग को पूरा करने की बारी है।

सरकार को भरोसा है कि बेहतर घरेलू उत्पादन एवं नियमित आयात के सहारे इस मांग को पूरा किया जा सकेगा। 2 जुलाई को 69.08 लाख टन यूरिया, 16.64 लाख टन डीएपी, 8.90 लाख टन एमओपी, 45.64 लाख टन कॉम्प्लैक्स तथा 23.09 लाख टन सिंगल 'सुपर फास्फेट' का स्टॉक मौजूद था।