मानसून की बेरुखी से मोटे अनाजों की बिजाई भी घटी

07-Jul-2026 05:55 PM

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश कम होने तथा तापमान ऊंचा रहने से चालू खरीफ सीजन में गन्ना को छोड़कर अन्य अधिकांश फसलों के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है। इसमें धान, दलहन, तिलहन एवं कपास के साथ-साथ मोटे अनाज एवं श्री अन्न भी शामिल है। मोटे अनाजों के संवर्ग में खासकर बाजरा एवं मक्का के रकबे में ज्यादा गिरावट आई है जबकि ज्वार, रागी एवं स्मॉल मिलेट्स का क्षेत्रफल कम रहा है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्तमान खरीफ सीजन में मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 5 जुलाई 2026 तक 60.12 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 71.87 लाख हेक्टेयर से 11.75 लाख हेक्टेयर कम है।

इसके तहत बाजरा का बिजाई क्षेत्र 30 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 20.82 लाख हेक्टेयर, मक्का का उत्पादन क्षेत्र 35 लाख हेक्टेयर से घटकर 32.94 लाख हेक्टेयर, ज्वार का क्षेत्रफल 4.89 लाख हेक्टेयर से गिरकर 4.53 लाख हेक्टेयर तथा रागी का रकबा 88 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 84 हजार हेक्टेयर रह गया। स्मॉल मिलेट्स की बिजाई 98 हजार हेक्टेयर में हुई जबकि गत वर्ष 1.09 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

आमतौर पर कम वर्षा की स्थिति में किसान मोटे अनाजों की खेती को प्राथमिकता देते हैं लेकिन इस बार किसानों का उत्साह कुछ ठंडा दिख रहा है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे राज्यों में ज्वार एवं बाजरा की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी कम देखी जा रही है।

मानसून की सक्रियता बढ़ने से आगामी दिनों में खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार कुछ तेज होने की उम्मीद है। मानसून अभी देश के पश्चिमी, मध्यवर्ती, उत्तरी एवं पश्चिमोत्तर भाग में एक्टिव है। उम्मीद की जा रही है कि इससे मोटे अनाजों की बिजाई में भी किसानों को अच्छी सहायता मिलेगी।