धान का क्षेत्रफल गत वर्ष से 14 लाख हेक्टेयर पीछे
31-Aug-2026 07:34 PM
नई दिल्ली। जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर प्रदर्शन के कारण खरीफ कालीन धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट का जो सिलसिला आरंभ हुआ वह अभी तक बरकरार है। हालांकि जुलाई तथा अगस्त में मानसून की बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही जिससे इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न के रकबे में काफी सुधार आया लेकिन फिर भी यह गत वर्ष के स्तर तक नहीं पहुंच पाया।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि मौजूदा खरीफ सीजन में 28 अगस्त 2026 तक धान का कुल उत्पादन क्षेत्र 414.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के उत्पादन क्षेत्र 428.46 लाख हेक्टेयर से 14.36 लाख हेक्टेयर कम है। पूर्वी एवं दक्षिणी प्रांतों में सितम्बर के दूसरे सप्ताह तक धान की खेती जारी रहती है।
धान का यह उत्पादन क्षेत्र पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 405 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है इसलिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है। दरअसल पिछले साल इसका रकबा तेजी से उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था इसलिए उससे तुलना करने पर छोटा प्रतीत होता है।
सितम्बर की वर्षा धान की फसल के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होगी। धान की फसल को पानी की सर्वाधिक जरूरत पड़ती है। सरकार के पास धान-चावल का विशाल स्टॉक पहले से ही मौजूद है इसलिए यदि खरीफ सीजन में उत्पादन थोड़ा-बहुत घटता है तो भी कोई फिक्र की बात नहीं होगी। अक्टूबर में धान की फसल की कटाई आरंभ हो जाएगी।
