दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को व्यावहारिक रणनीति बनाने का सुझाव
21-May-2026 06:56 PM
नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों से देश में दलहनों का उत्पादन या तो एक निश्चित सीमा में स्थिर बना हुआ है या फिर घटता जा रहा है। दूसरी ओर दालों की घरेलू मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके फलस्वरूप मांग एवं आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर को पाटने के लिए विशाल मात्रा में विदेशों से दलहनों के वार्षिक आयात की आवश्यकता पड़ रही है।
इससे न केवल बहुमूल्य विदेश मुद्रा देश से बाहर जा रही है बल्कि भारतीय किसानों को भी दलहन उत्पादन बढ़ाने का समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। यह स्थिति भविष्य के लिए चिंताजनक साबित होगी।
एक विख्यात एवं विश्वसनीय कम्पनी- जिंदल ओवरसीज कार्पोरेशन के सीएमडी प्रदीप जिंदल ने केन्द्र सरकार को दलहनों और खासकर चना का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़ाने के लिए यथाशीघ्र एक ठोस, सामयिक, स्थायी एवं व्यावहारिक रणनीति बनाने और उसे युद्ध स्तर पर गम्भीरतापूर्वक लागू करने का सुझाव दिया है।
उनका कहना है कि जब तक किसानों को चना का दाम 8000-9000 रुपए प्रति क्विंटल नहीं मिलेगा तब तक इसका उत्पादन बढ़ाने के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण नहीं बढ़ पाएगा बेहतर उत्पादन के लिए किसानों का खुश होना जरुरी है।
प्रदीप जिंदल ने आगाह किया है कि जिस तरह खाद्य तेलों का आयात उछलकर नए-नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है और सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं कर पा रही है उसी तरह दलहनों का आयात भी भविष्य में अत्यन्त तेजी से बढ़ सकता है।
खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता बढ़कर 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है। दलहनों के आयात पर निर्भरता अभी 20 प्रतिशत के करीब है मगर तत्काल एहतियाती प्रयास नहीं किए गए तो अगले पांच-छह वर्षों में यह निर्भरता बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
देश में फिलहाल करीब 300 लाख टन दलहन की वार्षिक खपत होती है जो भविष्य में 400 लाख टन तक पहुंच सकती है। तब आयात पर निर्भरता बढ़ाना ही एक मात्र विकल्प बचेगा।
