खाद्यान्न का उत्पादन 45 करोड़ टन तक पहुंचाने की जरूरत
21-May-2026 08:10 PM
शिमला। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक ने कहा है कि भारत को वर्ष 2047 तक खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाकर 45 करोड़ टन पर पहुंचाने की आवश्यकता पड़ेगी और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करके इस महत्वकांक्षी मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करना होगा।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक एवं नई विधियों का बुद्धिमता पूर्ण उपयोग और उर्वरकों का सही समय पर उचित मात्रा में इस्तेमाल करना बहुत जरुरी है क्योंकि अब यह कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।
महानिदेशक के मुताबिक वर्ष 2030 तक खाद्यान्न का घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 40 करोड़ टन तक पहुंचाने की जरूरत पड़ेगी जबकि वर्ष 2047 में जब देश स्वतन्त्रता का शताब्दी समारोह मना रहा होगा तब खाद्यान्न उत्पादन की आवश्यकता बढ़कर 45 करोड़ टन पर पहुंच जाएगी।
इस विशालकाय लक्ष्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा क्योंकि खाद्यान्न फसलों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी करने का ज्यादा स्कोप नहीं है और न ही अन्य फसलों का रकबा घटना संभव है। देश को चावल, गेहूं एवं मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, गन्ना एवं कपास सहित अन्य जिंसों का उत्पादन बढ़ाने की भी जरूरत पड़ेगी
क्योंकि बढ़ती जनसंख्या एवं वैश्विक मांग को पूरा करना तभी संभव हो पाएगा। जब सभी फसलों के उत्पादन में आनुपातिक रूप से बढ़ोत्तरी हो। बिजाई क्षेत्र के बजाए उपज दर में वृद्धि करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा और इसके लिए तकनीक की जरूरत पड़ेगी।
