दलहन की मांग कमजोर रहने से कीमतों में स्थिरता

06-May-2026 08:15 PM

मुम्बई। आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम रहने तथा मांग एवं खपत में कमी आने से अधिकांश प्रमुख दलहनों का थोक मंडी भाव सरकारी सर्मथन मूल्य (एमएसपी) से नीचे तथा एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है। निकट भविष्य में इसमें जोरदार तेजी आना भी मुश्किल लगता है। रबी कालीन दलहनों और खासकर चना तथा मसूर की आपूर्ति का पीक सीजन चल रहा है। कुछ राज्यों में उड़द एवं मूंग के अन्य माल की आवक भी हो रही है। जल्दी ही ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की फसल कटने लगेगी। 

जबकि सरकारी एजेंसियों द्वारा कई राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से चना एवं मसूर की खरीद की जा रही है लेकिन इससे कीमतों में तेजी का माहौल नहीं बन रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने पिछले दिन महाराष्ट्र में चना की खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर करीब 8.20 लाख टन नियत कर दिया और खरीद की समय सीमा भी 29 मई तक बढ़ाने की घोषणा की जिससे वहां बाजार की स्थिति कुछ मजबूत होने की उम्मीद है। 

दलहन-दाल की खपत के लिए अभी सीजन अनुकूल नहीं है। दाल मिलर्स एवं प्रोसेसर्स केवल तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित मात्रा में दलहन की खरीद कर रहे हैं। व्यापारियों / स्टॉकिस्टों में भी ज्यादा उत्साह नहीं देखा जा रहा है। विदेशों से विभिन्न दलहनों का नियमित आयात जारी है जिसमें चना, मसूर, तुवर एवं उड़द शामिल है। भारत में मूंग का आयात नहीं होता है क्योंकि लम्बे समय से इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, ब्राजील एवं कई अफ्रीकी देश भारत में अपने दलहनों का निर्यात बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। 

इस वर्ष खरीफ सीजन में दलहन फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है क्योंकि अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रह सकता है। इससे बारिश कम होने तथा देश के कई भागों में सूखा पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। देश में दलहन फसलों की अधिकांश खेती वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में होती है इसलिए अगर मानसून की वर्षा की स्थिति नियमित एवं अनिश्चित रही तो फसल की बिजाई तथा प्रगति पर असर पड़ सकता है। वैसे सरकारी एजेंसियों के पास चना, तुवर, मसूर एवं मूंग का अच्छा स्टॉक मौजूद है जिससे आपूर्ति को सामान्य रखने में सहायता मिलेगी।