स्टॉक में कमी आने तथा मांग बेहतर रहने से लालमिर्च का भाव मजबूत

27-Jun-2026 12:21 PM

मुम्बई। पिछला बकाया स्टॉक कम रहने तथा घरेलू एवं निर्यात मांग बेहतर होने से लालमिर्च की अधिकांश किस्मों की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल देखा जा रहा है। इससे किसान काफी उत्साहित हैं और वे इस महत्वपूर्ण मसाला फसल की बिजाई का रकबा बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर सकते हैं।

यदि मौसम सामान्य रहा तो लालमिर्च का अगला उत्पादन 2024-25 सीजन की भांति 2026-27 के सीजन में भी शानदार हो सकता है। ज्ञात हो कि 2025-26 के सीजन में लालमिर्च का उत्पादन कमजोर रहा था। 

आंध्र प्रदेश के गुंटूर स्थित लालमिर्च निर्यातक संघ (चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन) के अनुसार लालमिर्च का बकाया स्टॉक घटकर महज 1.46 करोड़ बोरी (40 किलो की प्रत्येक बोरी) के आसपास रह गया है जो पिछले साल की सामान अवधि में उपलब्ध स्टॉक 2.29 करोड़ बोरी से काफी कम है। थोक मंडियों में आवक की स्थिति लगभग सामान्य होने से कोल्ड स्टोरेज एवं वेयर हाउस में स्टॉक घटता जा रहा है।  

पिछले साल के मुकाबले वर्तमान समय में निर्यात वैरायटी वाली तेजा एवं अरमूर लालमिर्च में मांग कमजोर रहने से कीमत करीब 20 प्रतिशत नीचे आ गई है। अगस्त से मसाला उत्पाद निर्माताओं की इसमें जोरदार मांग निकल सकती है और तब इसका भाव भी मजबूत होने लगेगा।

पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। दक्षिणी राज्यों-आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक में लालमिर्च का सर्वाधिक उत्पादन होता है जबकि मध्य प्रदेश भी इसका एक महत्वपूर्ण उत्पादक राज्य है।

लालमिर्च के बीज की बिक्री में 10-12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मानसून के कमजोर रहने के कारण इस बार लालमिर्च की बिजाई की प्रक्रिया अगस्त के अंत तक जारी रहने की संभावना है। उत्पादन में बढ़ोत्तरी के आसार हैं।