पश्चिम एशिया में घमासान युद्ध से भारतीय निर्यातक चिंतित

10-Jul-2026 01:06 PM

मुम्बई। पश्चिम एशिया में एक बार फिर ईरान और अमरीका के बीच घमासान युद्ध आरंभ हो गया है। एक तरफ अमरीका ईरान के विभिन्न शहरों एवं ठिकानों पर बमबारी कर रहा है तो दूसरी ओर ईरान भी खाड़ी क्षेत्र के देशों- कुवैत, बहरीन, जॉर्डन एवं कतर आदि में अवस्थित अमरीकी सैन्य बेस तथा अन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। शीघ्र ही इस युद्ध में इजरायल के भी शामिल हो जाने की संभावना है जिससे इसकी विकरालता और भी बढ़ जाएगी और युद्ध की अवधि भी लम्बी हो सकती है।

दरअसल युद्ध का आरंभ जिस कारण से हुआ वह भारत को परेशान कर रहा है। ईरान ने चेतावनी दी थी कि जिस जहाज को होर्मुज स्ट्रेट पार करना है उसे ईरान द्वारा बताए गए रास्ते से जाना होगा अन्यथा उस पर अटैक किया जा सकता है। जब इस चेतावनी को नजर अंदाज करके तीन टैकर्स (जहाज) ने अमरीका द्वारा निर्धारित मार्ग से गुजरने का प्रयास किया तब ईरान ने उस पर हमला करके उसे नष्ट कर दिया। इससे अमरीका भड़क गया और उसने ईरान पर अटैक कर दिया। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमरीकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन एवं मिसाइल से हमला शुरू कर दिया। इस तरह दोनों देशों में घमासान युद्ध आरंभ हो गया। 

होर्मुज स्ट्रेट का जलमार्ग विवाद का प्रमुख आधार बना हुआ है जबकि यह रास्ता भारतीय आयात-निर्यात के लिए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। अमरीकी सेना ईरान के चावहार सहित ऐसे बंदरगाहों को भी निशाना बना रही है जिसके रास्ते भारत बड़े पैमाने पर कारोबार करता है। चावहार पोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय उत्पाद पहले वहीं पहुंचता है और फिर वहां से अफगानिस्तान सहित कई अन्य देशों को भेजा जाता है। 

पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारत से बड़ी मात्रा में बासमती चावल, चाय एवं मसाला आदि का निर्यात होता है जबकि वहां से पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रासायनिक उर्वरक एवं सूखे मेवों का विशाल मात्रा में आयात किया जाता है। अफगानिस्तान से ड्राई फ्रूट्स का आयात अक्सर ईरान के रास्ते ही भारत में होता है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने तथा चावहार बंदरगाह के बंद होने से भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ती जा रही है।