नारियल एवं कोपरा के अभाव एवं ऊंचे दाम से छोटी इकाइयां पस्त

01-Apr-2025 08:29 PM

कोच्चि। उत्पादन एवं आपूर्ति में भारी गिरावट आने से नारियल तेल तथा कोपरा का भाव बढ़कर नए-नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है जिससे केरल की अनेक छोटी-छोटी इकाइयों को अपनी गतिविधि जारी रखने में भारी कठिनाई हो रही है और पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने से उसके बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। 

उद्योग समीक्षकों के अनुसार कच्चे नारियल के निर्यात में इजाफा होने, अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों में उपयोग बढ़ने तथा भयंकर गर्मी के कारण टेंडर कोकोनट (नारियल पानी) की भारी मांग निकलने से बाजार में कोपरा की आपूर्ति तथा  उपलब्धता काफी घट गई है। इससे कीमतों में नियमित रूप से तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है। 

कोचीन ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन (कोमा) के अध्यक्ष के अनुसार केरल में नारियल तेल का थोक बाजार भाव उछलकर 261 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह कोपरा का दाम 174 रुपए प्रति किलो हो गया है और धीरे-धीरे 2017 के रिकॉर्ड मूल्य स्तर 200 रुपए प्रति किलो की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान समय में केरल एवं तमिलनाडु में कोपरा की आपूर्ति 40-50 प्रतिशत तक घट गई है जिससे लघु स्तरीय मिलिंग इकाइयों के कार्य संचालन में भारी बाधा पड़ रही है। 

अत्यन्त ऊंचे मूल्य को देखते हुए दिसावरी व्यापारी और खासकर उत्तरी भारत के खरीदार कोपरा एवं नारियल तेल बाजार से गायब हो गए है।

हालांकि नारियल तेल का खुदरा भाव बढ़कर 300 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है लेकिन इससे नारियल तेल का खुदरा भाव बढ़कर 300 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है लेकिन इससे नारियल उत्पादकों को कोई खास फायदा नहीं हो रहा है।

नारियल का दाम छह माह पूर्व 30-35 रुपए प्रति किलो चल रहा था जो अब 65-70 रुपए प्रति किलो पर पहुंचा है। समझा जाता है कि तमिलनाडु एवं कर्नाटक के कुछ स्टॉकिस्टों में कोपरा का स्टॉक दबाकर रखा है और बाजार की तेजी से भारी मुनाफा कमा रहा है। सरकार को इसकी जांच-पड़ताल करवानी चाहिए।