कनाडा में दलहन व्यापार नीति को विशेष प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर

02-Apr-2025 05:50 PM

विनीपेग। एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- पल्स कनाडा का कहना है कि संघीय चुनाव में देश की व्यापार नीति को प्रमुख मुद्दा बनाया जाना चाहिए ताकि दलहन सहित अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात प्रदर्शन को सुधारने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता  मिल सके।

उल्लेखनीय है कि पल्स कनाडा देश में उत्पादित 85 प्रतिशत से अधिक दलहनों के उत्पादन, व्यापारियों एवं प्रोसेसर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है। दलहनों के निर्यात पर भी इसके सदस्यों का वर्चस्व रहता है। 

कनाडा में मटर और मसूर जैसे दलहनों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और परम्परागत रूप से वह दलहनों का सबसे प्रमुख निर्यातक देश भी बना हुआ है।

पल्स कनाडा का कहना है कि सिर्फ दिखावे की नीति से अब काम नहीं चलने वाला है और न ही इस पर ज्यादा समय तक निर्भर रहना उचित है।

वैश्विक बाजार का परिदृश्य बदल रहा है। रूस में मटर तथा ऑस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन तेजी से बढ़ने लगा है जबकि भारत और चीन जैसे शीर्ष आयातक देश अपनी आयात नीति में अनवरत बदलाव कर रहे हैं।

इन देशों के साथ कनाडा के राजनयिक सम्बन्ध भी अच्छे नहीं हैं। ऐसी हालत में कनाडाई  दलहन उत्पादकों एवं निर्यातकों का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है।

व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए वास्तविक कूटनीति (डिप्लोमैसी) का सही समय आ गया है और उस पर राजनीतिक दलों को विशेष ध्यान देना चाहिए।

किसानों एवं व्यापारियों का भविष्य ऐसे नेताओं पर निर्भर है जो एक ठोस, सक्रिय एवं व्यावहारिक व्यापार एजेंडा के साथ सामने आ सके और अड़चनों को दूर करने के लिए तैयार हो।  

चीन ने कनाडाई दलहनों पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगा दिया है और साथ ही साथ कैनोला तेल तथा मील के आयात को भी नियंत्रित करना शुरू कर दिया है।

चीन में कनाडा से औसतन 700 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की पीली मटर का वार्षिक निर्यात होता है जिस पर अब विराम लग सकता है। इसका सीधा लाभ रूस को मिलेगा जो वहां पीली मटर का विशाल निर्यात कर रहा है। 

कनाडा की अर्थव्यवस्था मुख्यत: निर्यात कारोबार पर निर्भर है इसलिए कनाडा को प्रमुख आयातक देशों के साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है।

संबंधों में दरार पड़ने से कनाडा को ही ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि आयातक देशों को नए विकल्प आसानी से मिल जाएंगे।