मोटे अनाजों की बिजाई गत वर्ष से 4.25 लाख हेक्टेयर पीछे

29-Jun-2026 07:59 PM

नई दिल्ली। आमतौर पर मानसून की वर्षा कम होने पर मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र बढ़ने की उम्मीद की जाती है क्योंकि  इसकी फसल को सिंचाई के लिए अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है और ये फसलें शुष्क मौसम को ज्यादा बर्दाश्त कर सकती है। 

लेकिन इस बार स्थिति भिन्न नजर आ रही है। दोनों प्रमुख मोटे अनाजों-मक्का तथा बाजरा का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है। इसकी खेती में किसानों की दिलचस्पी घट सकती है जो हैरानी की बात नहीं होगी। सरकार पहले मक्का के उत्पादन संवर्धन को विशेष प्रोत्साहन दे रही थी ताकि एथनॉल निर्माण के लिए इसका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध हो सके लेकिन उत्पादन बेहतर हुआ तब सरकार ने नजर फेर लिया।

इस बार मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 10 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया और इसका थोक मंडी भाव काफी नीचे रहने से किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त नहीं हो रही है। न तो केन्द्र सरकार और न ही एथनॉल डिस्टीलरीज एमएसपी पर मक्का खरीदने के लिए तैयार है। ऐसी हालत में किसानों से मक्का का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? बाजरा का बाजार भी नरम है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान मक्का का रकबा 18.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 15.71 लाख हेक्टेयर और बाजरा का बिजाई क्षेत्र 13.06 लाख हेक्टेयर से गिरकर 11.34 लाख हेक्टेयर रह गया।

यद्यपि ज्वार का क्षेत्रफल 2.70 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 3.38 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर रागी का रकबा 73 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 66 हजार हेक्टेयर, स्मॉल मिलेट्स का क्षेत्रफल 97 हजार हेक्टेयर से गिरकर 75 हजार हेक्टेयर और मोटे अनाजों का सम्पूर्ण उत्पादन क्षेत्र 36.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।