खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे
29-Jun-2026 07:54 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में देर होने तथा मौसम काफी गर्म एवं शुष्क होने से देश के अधिकांश प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में खरीफ फसलों की बिजाई की गति बहुत धीमी चल रही है। इसके फलस्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर इन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 25 जून 2026 तक महज 182.72 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 236.46 लाख हेक्टेयर से 53.74 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून अब धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र 21.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.75 लाख हेक्टेयर तथा गन्ना का क्षेत्रफल 56.54 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 57.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर दलहनों का बिजाई क्षेत्र 21.46 लाख हेक्टेयर से गिरकर 14.92 लाख हेक्टेयर, तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 36.41 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 16.99 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का रकबा 36.07 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 31.84 लाख हेक्टेयर और कपास का क्षेत्रफल 45.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गया। अनेक फसलों की निराशाजनक बिजाई हुई है।
दलहन फसलों में तुवर, उड़द एवं मूंग आदि का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है जबकि केन्द्र सरकार किसानों से बार-बार इसका रकबा बढ़ाने का आग्रह कर रही है। इसी तरह तिलहन फसलों में मूंगफली और सोयाबीन की बिजाई गत वर्ष से काफी पीछे चल रही है जबकि पहले इसका क्षेत्रफल बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी। जहां तक मोटे अनाजों की बात है तो इसके अंतर्गत ज्वार का रकबा तो कुछ बढ़ा है मगर बाजरा का बिजाई क्षेत्र 1.70 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 2.90 लाख हेक्टेयर पीछे रह गया है।
जुलाई-अगस्त में देश के अंदर सर्वाधिक वर्षा और खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा बिजाई होती है लेकिन अल नीनो के प्रभाव से मानसून की अनिश्चित हालत को देखते हुए खरीफ फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष से कुछ पीछे रह जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
