मौसम की हालत पर निर्भर करेगा तिलहन फसलों का उत्पादन
14-Sep-2026 05:18 PM
नई दिल्ली। खरीफ कालीन तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के अत्यन्त निकट पहुंच गया है और अब बिजाई की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो गई है। कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक प्रांतों में अच्छी बारिश होने से फसल की हालत संतोषजनक और कहीं-कहीं उत्साहवर्धक बनी हुई है लेकिन अन्य क्षेत्रों में मौसम एवं मानसून की स्थिति पूरी तरह अनुकूल नहीं होने से फसल का परिदृश्य कमजोर या सामान्य देखा जा रहा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन के दौरान देश में 11 सितम्बर तक तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 193.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 194.07 लाख हेक्टेयर से महज 17 हजार हेक्टेयर कम है। आमतौर पर क्षेत्रफल में आई इस मामूली गिरावट का तिलहनों के सकल उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा लेकिन यदि मौसम एवं वर्षा की दशा में बिगाड़ आता है तो तिलहनों की पैदावार जरूर प्रभावित हो सकती है। अगले महीने से सोयाबीन एवं मूंगफली सहित अन्य तिलहनों के नए माल की जोरदार आवक शुरू हो सकती है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 50.66 लाख हेक्टेयर से गिरकर 50.45 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 123.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 122.08 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का क्षेत्रफल 9.31 लाख हेक्टेयर से गिरकर 8.36 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि दूसरी ओर सूरजमुखी का उत्पादन क्षेत्र 67 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर तथा तिल का बिजाई क्षेत्र 9.64 लाख हेक्टेयर से उछलकर 11.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके अलावा खरीफ सीजन में कुछ अन्य खरीफ फसलों की भी थोड़ी-बहुत खेती होती है।
मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में तिलहन फसलों की हालत अच्छी बताई जा रही है मगर महाराष्ट्र, गुजरात एवं कर्नाटक में इसकी स्थिति मिश्रित बनी हुई है। दक्षिणी राज्यों में बारिश कम हुई है जिससे तेलंगाना, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश में कहीं-कहीं फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।
