मानसून पर अल नीनो का खतरा बरकरार- किसानों को सरकारी सहायता की जरूरत
13-Jul-2026 03:45 PM
नई दिल्ली। जून में सुस्त रहने के बाद जुलाई के प्रथम सप्ताह में दक्षिण- पश्चिम मानसून की सक्रियता बढ़ने से देश के विभिन्न भागों में अच्छी वर्षा हुई जिससे किसानों को खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने का कुछ अवसर मिल गया लेकिन मौसम विशेषज्ञों एवं कृषि अर्थ शास्त्रियों का कहना है कि मानसून पर अल नीनो का गंभीर खतरा अभी बरकरार है।
मानसून का आरंभ इस बार बेहद कमजोर रहा जिससे बारिश में भारी गिरावट आ गई और खरीफ फसलों की बिजाई काफी पिछड़ गई। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई में मानसून की हालत अच्छी देखी जा रही है मगर इसमें यह नहीं समझना चाहिए कि अल नीनो का खतरा टल गया है। मानसून एक बार फिर कमजोर होने लगा है। अगले कुछ सप्ताहों तक मौसम एवं मानसून पर गहरी नजर रखनी पड़ेगी क्योंकि वह समय खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।
जुलाई के प्रथम सप्ताह के दौरान सामान्य औसत से अधिक बारिश होने के कारण 1 जून से 9 जुलाई के बीच देश में वर्षा की कुल कमी घटकर 12 प्रतिशत के करीब रह गई जबकि जून के अंत तक यह कमी 40 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई थी।
केन्द्र सरकार लगातार मानसून की हालत की समीक्षा कर रही है और खरीफ फसलों की बिजाई तथा प्रगति पर भी गहरी नजर रख रही है। कृषि विशषज्ञों का कहना है कि सरकार को किसानों के लिए खाद-बीज एवं अन्य जरुरी इनपुट की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि बिजाई में कोई बाधा न पड़ सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का विकास अभी शुरू ही हुआ है जबकि आगे इसका विकराल स्वरूप सामने आ सकता है। इससे मानसून की दशा एवं दिशा प्रभावित हो सकती है। भारत को खासकर दलहन-तिलहन संवर्ग की फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर देना चाहिए।
