चीन की स्टार्च समस्या एवं कमजोर मांग से मटर का भाव स्थिर

13-Jul-2026 04:51 PM

वैंकुवर। पिछले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मटर का भाव काफी हद तक शांत एवं स्थिर बना रहा क्योंकि अधिकांश निर्यातकों, व्यापारियों, आयातकों एवं अंतिम उपयोगकर्ताओं का ध्यान उत्तरी गोलार्द्ध के देशों में फसल की प्रगति एवं मौसम की स्थिति पर केन्द्रित रहा। रूस, कनाडा, कजाकिस्तान, यूक्रेन एवं अमरीका जैसे देशों में मटर की नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू होने में कम समय बचा है। यूरोपीय संघ में नई फसल आने वाली है। 

कनाडा में आमतौर पर फसल की हालत सामान्य बताई जा रही है लेकिन वहां कीड़ों-रोगों का आघात बढ़ने के संकेत मिल रहे। इससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। उत्पादकों को लगता है कि इस वर्ष मटर की उपज दर न केवल पिछले साल से बल्कि पंचवर्षीय औसत स्तर से भी नीचे रह सकती है। ध्यान देने की बात है कि कनाडा में इस बार मटर की खेती गत वर्ष के मुकाबले कम क्षेत्रफल में हुई है।

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और खासकर फ्रांस तथा जर्मनी में इस बार वर्षा का अभाव देखा जा रहा है जबकि भीषण गर्मी के साथ तापमान अत्यन्त ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसके फलस्वरूप मटर की उपज दर एवं क्वालिटी पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। वैश्विक मटर बाजार में रूस के साथ-साथ फ्रांस भी कनाडा का एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी देश माना जाता है। वहां फसल की हालत कमजोर बताई जा रही है। 

चीन की संघीय सरकार ने कनाडा से आयातित मटर स्टार्च पर 73.5 प्रतिशत का भारी-भरकम एंटी-डम्पिंग शुल्क लगा दिया है जिससे कनाडा के घरेलू प्रभाग में साबुत मटर की मांग अनिश्चित हो गई है। इससे मटर बाजार को तगड़ा झटका लगने की आशंका है। मटर के अलावा गेहूं, मक्का एवं आलू आदि से भी निर्मित स्टार्च के लिए खतरा बढ़ जाता है। 

कनाडा में मटर का भारी-भरकम पिछला बकाया स्टॉक मौजूद है इसलिए उत्पादन में आने वाली थोड़ी-बहुत गिरावट से इसकी कुल उपलब्धता पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा लेकिन यदि घरेलू एवं निर्यात मांग कमजोर रही तो कीमतों पर दबाव अवश्य बढ़ जाएगा।