मानसून की बारिश कम होने पर दलहन-तिलहन फसलों को भी खतरा
22-May-2026 01:33 PM
इंदौर। देश का मध्यवर्ती एवं पश्चिमी भाग बेहतर खरीफ उत्पादन के लिए मानसून की वर्षा पर काफी हद तक निर्भर रहता है क्योंकि वहां कृत्रिम सिंचाई की सुविधा अपेक्षाकृत कम है। यदि वहां मानसूनी वर्षा की हालत अनिश्चित एवं अनियमित रही तो दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
उत्तरी क्षेत्र में नहरों से सिंचाई की अच्छी सुविधा तो है मगर वहां भी अच्छी वर्षा की सख्त आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि बांधों-जलाशयों में पानी का कम स्टॉक बचा हुआ है। भीषण गर्मी से जल स्रोत सूखते जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि देश में करीब 70 प्रतिशत वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून के चार माह की अवधि (जून-सितम्बर) के दौरान होती है जबकि चावल का 80 प्रतिशत उत्पादन खरीफ सीजन में होता है।
उड़द, तुवर, मूंग, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली एवं अरंडी आदि का सम्पूर्ण या अधिकांश उत्पादन खरीफ सीजन में ही होता है। इसी तरह कपास एवं जूट (पटसन) खरीफ कालीन फसलें हैं। कुछ विशेषज्ञ इस बार सुपर अल नीनो के आने की चेतावनी दे रहे हैं जो भारत के लिए घातक हो सकता है।
