खाद्य तेलों के ऊंचे भाव से तिलहन उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी सहायता

21-May-2026 01:18 PM

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विभिन्न खाद्य तेलों का भाव ऊंचा चल रहा है। सामुद्रिक परिवहन (शिपमेंट) के लिए किराया भाड़ा एवं बीमा चार्ज में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है और डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य घटकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। इससे भारत में खाद्य तेलों का आयात महंगा बैठ रहा है जिससे स्वदेशी खाद्य तेल का दाम भी ऊंचा हो गया है।

इससे तेल मिलर्स / प्रोसेसर्स को किसानों से ऊंचे दाम पर तिलहन खरीदने में कोई हिचक या परेशानी नहीं हो रही है। किसानों को अपने तिलहनों का लाभप्रद मूल्य प्राप्त हो रहा है जिससे इसकी खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है।

सरसों का उत्पादन तो रबी सीजन में होता है मगर सोयाबीन एवं मूंगफली की खेती खरीफ सीजन में होती है। सरसों का भाव लम्बे समय से सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जबकि हाल के महीनों में सोयाबीन एवं मूंगफली का दाम भी उछलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊपर पहुंच गया है।

इससे किसानों को लाभप्रद आमदनी प्राप्त हो रही है। यदि मौसम एवं मानसून की हालत सामान्य या अनुकूल रही तो खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन तथा मूंगफली सहित अन्य तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है। 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार सरसों का एमएसपी इस बार 6200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ है जबकि इसका औसत थोक मंडी भाव 7000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है।

इसी तरह सोयाबीन का एमएसपी 5328 रुपए प्रति क्विंटल तथा मूंगफली का एमएसपी 7263 रुपए प्रति क्विंटल नियत है जबकि थोक मंडी भाव इससे काफी ऊपर चल रहा है। इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल सकता है।