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30-Oct-2026 05:24 PM
मैसूर। केन्द्र सरकार द्वारा गन्ना उत्पादकों की समस्याओं एवं शिकायतों के निपटान हेतु उपाय सुझाने के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समीति जब कर्नाटक पहुंची तब वहां गन्ना उत्पादक संगठन के प्रतिनिधियों ने उससे आग्रह किया कि गन्ना के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का निर्धारण एक्स फैक्टरी आधार पर नहीं बल्कि एक्स फील्ड (खेत) के आधार पर करने की प्रणााली लागू की जानी चाहिए
ताकि किसानों को एफआरपी का पूरा फायदा प्राप्त हो सके और उसे फसल की कटाई तथा उसके परिवहन पर होने वाले खर्च से छुटकारा मिल सके। वर्तमान समय में चीनी मिलों द्वारा इस खर्च को काटकर गन्ना किसानों को एफआरपी का भुगतान किया जाता है जिससे उसे पूरी राशि नहीं मिल पाती है।
गन्ना के मूल्य निर्धारण एवं लागत खर्च पर अपना पक्ष रखने के लिए कर्नाटक के किसानों ने 29 अक्टूबर को बंगलोर में केन्द्रीय समिति के सदस्यों से मुलाकात की थी। हाल ही में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उत्तरी कर्नाटक के गन्ना उत्पादकों ने जोरदार आंदोलन किया था और तब केन्द्र सरकार ने नीति आयोग के एक पूर्व सदस्य की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।
यह समिति अब गन्ना किसानों द्वारा उठाये गए मुद्दों का आंकलन विश्लेषण करेगी और फिर विभिन्न उपयुक्त उपायों की सिफारिशों के साथ केन्द्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उसके आधार पर सरकार कोई निर्णय ले सकती है।
चीनी के उत्पादन में महाराष्ट्र पहले तथा कर्नाटक तीसरे नंबर पर रहता है जबकि दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना उत्पादक चाहते हैं कि गन्ना का एफआरपी 4500 से 5500 रुपए प्रति टन के बीच नियत हो अथवा फसल कटाई एवं ढुलाई का खर्च सीधे चीनी मिलों द्वारा वहन किया जाए।