कम पानी की जरूरत वाली फसलों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा
28-Jul-2026 01:46 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनिश्चित एवं अनियमित स्थिति तथा सामान्य औसत से कम वर्षा होने की आशंका से चालू खरीफ सीजन में किसानों का रुझान ऐसी फसलों की खेती की तरफ बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं जिसे सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता पड़ती है और जिससे किसानों को त्वरित आमदनी प्राप्त हो सकती है।
हालांकि पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान ज्वार, बाजरा, मक्का, तुवर, मूंग, मोठ एवं सोयाबीन आदि के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है मगर धीरे-धीरे अंतर घटता जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन में 24 जुलाई तक सूरजमुखी के उत्पादन क्षेत्र में 61.6 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है।
इसके अलावा तिल के बिजाई क्षेत्र में 8.3 प्रतिशत, कुलथी के क्षेत्रफल में 15.6 प्रतिशत, जूट में 2 प्रतिशत एवं मेस्ता के रकबे में 5.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उड़द का रकबा भी बढ़ गया है।
किसान उन फसलों एवं किस्मों की खेती को विशेष प्राथमिकता देना चाहते हैं जो कम समय में पककर तैयार हो सके। इसमें सब्जियों की फसल भी शामिल है। उम्मीद की जा रही है कि मोटे अनाजों एवं दलहनों के रकबे में आगे और सुधार आएगा। मूंगफली और सोयाबीन का क्षेत्रफल सुधरकर गत वर्ष के अत्यन्त निकट पहुंच गया है। कपास का क्षेत्रफल भी सुधर रहा है।
