आपूर्ति की जटिलता एवं मजबूत मांग से काजू में तेजी के आसार

28-Jul-2026 12:05 PM

मुम्बई। पश्चिमी अफ्रीका के देशों में काजू का केवल सीमित बकाया स्टॉक मौजूद है चीन के आयातक वियतनामी काजू की जोरदार खरीद कर रहे हैं और भारत में भी काजू का लम्बा-चौड़ा स्टॉक उपलब्ध नहीं है। पश्चिम अफ्रीका में 2026 का काजू सीजन अन्तिम चरण में पहुंच गया है। वहां काजू का जो स्टॉक बंदरगाहों के आसपास वेयर हाउस में पड़ा हुआ है उसके शिपमेंट का प्रयास किया जा रहा है। वहां से मुख्यतः कच्चे काजू का निर्यात होता है। 

काजू का वैश्विक उत्पादन पूर्व अनुमान की तुलना में कम घटने की संभावना है। पहले उत्पादन में 3.75-4.00 लाख टन की गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही थी मगर अब करीब 3 लाख टन की कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है सेनेगल, गाम्बिया, ब्राजील, इंडोनेशिया में उत्पादन कुछ घटा है लेकिन कम्बोडिया में यह बढ़कर 10.00-10.50 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है जो अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। 

सभी प्रमुख उत्पादक देशों में काजू का भाव मजबूत बना हुआ है। अच्छी क्वालिटी के दाने (43.44 एल वी से ऊपर) का भाव 1400 डॉलर प्रति टन तथा इससे ज्यादा वजन दार (46-52 / 53 एल वी) दाने का मूल्य 1500-1750 डॉलर प्रति टन के बीच बताया जा रहा है। उधर वियतनाम में बाजार स्थिर बना हुआ है। ऊंचे परिवहन खर्च की वजह से काजू का दाम उच्च स्तर पर बरकरार है। लेकिन कच्चे काजू की तुलना में प्रसंस्कृत काजू का दाम कुछ धीमी गति से बढ़ रहा है। इससे प्रोसेसर्स सतर्क हो गए हैं और सिर्फ अपनी वास्तविक जरूरत के अनुरूप ही कच्चे काजू का आयात कर रहे हैं। 

चीन की जोरदार लिवाली से वियतनामी प्रसंस्कृत काजू का भाव काफी हद तक मजबूत बना हुआ है। इसका मूल्य डब्ल्यू 210 के लिए 4.00-4.30 डॉलर प्रति पौंड /  एल वी, डब्ल्यू 240 के लिए 3.45-3.60 डॉलर, डब्ल्यू 180 के लिए 4.30-4.60 डॉलर तथा डब्ल्यू 320 के लिए 3.10-3.35 डॉलर प्रति एल वी चल रहा है। भारत में डब्ल्यू 240 काजू का दाम 8825 डॉलर प्रति टन तथा डब्ल्यू 320 का भाव 8175 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। घरेलू मांग भी मजबूत बनी हुई है।