IGrain India विशेष रिपोर्ट सोयाबीन बाजार का भविष्य: कमजोर उत्पादन की आशंका के बीच अल्पावधि में ₹500 प्रति क्विंटल तक सुधार संभव

28-Jul-2026 01:07 PM

IGrain India विशेष रिपोर्ट सोयाबीन बाजार का भविष्य: कमजोर उत्पादन की आशंका के बीच अल्पावधि में ₹500 प्रति क्विंटल तक सुधार संभव
★ भारत में खरीफ 2026 के दौरान 24 जुलाई तक सोयाबीन की बुवाई लगभग 114 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 117 लाख हेक्टेयर थी। क्षेत्रफल में मामूली कमी दिख रही है, लेकिन इस वर्ष एल नीनो के प्रभाव, कमजोर मानसून और कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसल की उत्पादकता पर दबाव बनने की आशंका बढ़ गई है।
★ पिछले वर्ष देश में सोयाबीन का उत्पादन लगभग 113 लाख टन रहा था। मौजूदा मौसम और फसल की स्थिति को देखते हुए इस वर्ष उत्पादन घटकर लगभग 105 लाख टन रहने का अनुमान लगाया जा सकता है। यदि अगस्त और सितंबर में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो उत्पादन पर और दबाव पड़ सकता है।
★ हालांकि उत्पादन में संभावित कमी के बावजूद घरेलू उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण सोयाबीन का रिकॉर्ड आयात है। चालू तेल वर्ष (अक्टूबर–सितंबर) में अब तक लगभग 7.7 लाख टन सोयाबीन का आयात हो चुका है, जबकि पिछले वर्ष आयात लगभग नगण्य था। इससे घरेलू आपूर्ति को पर्याप्त समर्थन मिला है।
★ दूसरी ओर, भारत से सोयामील निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट आई है। चालू वर्ष में लगभग 9 लाख टन सोयामील का निर्यात हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 लाख टन कम है। निर्यात घटने से घरेलू बाजार में सोयामील की उपलब्धता बढ़ी है।
★ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोयाबीन की कुल उपलब्धता आरामदायक बनी हुई है। ब्राजील और अमेरिका सहित प्रमुख उत्पादक देशों में पर्याप्त स्टॉक और अच्छी आपूर्ति के कारण वैश्विक स्तर पर फिलहाल किसी बड़े आपूर्ति संकट के संकेत नहीं हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर सीमित दबाव बना हुआ है।
★ घरेलू क्रशिंग उद्योग भी इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। बड़ी मात्रा में सस्ते सोया तेल के आयात से घरेलू तेल मिलों की क्रशिंग प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई है। दूसरी ओर, सोयामील निर्यात में गिरावट और घरेलू मांग में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से भी क्रशिंग मार्जिन प्रभावित हुए हैं।
★ पशु आहार उद्योग में डीडीजीएस (DDGS) की बढ़ती उपलब्धता ने भी सोयामील की घरेलू मांग को प्रभावित किया है। कई फीड निर्माता सोयामील के विकल्प के रूप में डीडीजीएस का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे सोयामील की खपत पर दबाव बना हुआ है।
★ जुलाई के दूसरे सप्ताह के दौरान देश की विभिन्न मंडियों में सोयाबीन के भाव लगभग ₹6,500 से ₹7,550 प्रति क्विंटल के बीच कारोबार कर रहे थे। लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह में कमजोर मांग और सीमित खरीद के कारण अधिकांश मंडियों में कीमतों में लगभग ₹500 प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।
★ आगे की दिशा मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी—घरेलू फसल की वास्तविक स्थिति, अंतिम उत्पादन तथा अगस्त-सितंबर के दौरान एल नीनो और मानसून का प्रदर्शन। यदि मौसम की स्थिति उत्पादन संबंधी चिंताओं को और बढ़ाती है तथा किसानों की बिकवाली सीमित रहती है, तो बाजार में पुनः मजबूती लौट सकती है।
★ आई-ग्रेन इंडिया का मानना है कि वर्तमान गिरावट के बाद सोयाबीन बाजार अपने निचले स्तर के काफी करीब पहुंच चुका है। उत्पादन में संभावित कमी, मौसम संबंधी अनिश्चितता तथा नई फसल आने तक सीमित आपूर्ति की धारणा के कारण अल्पावधि में सोयाबीन के भावों में लगभग ₹500 प्रति क्विंटल तक सुधार की संभावना बन रही है। हालांकि दीर्घकालीन तेजी की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अगस्त और सितंबर में वर्षा कैसी रहती है तथा वास्तविक उत्पादन का आकार कितना निकलता है।