काजू का वैश्विक उत्पादन एवं कारोबार बेहतर होने का अनुमान
29-Jan-2026 05:28 PM
मुम्बई। दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों में इस वर्ष काजू के उत्पादन की स्थिति काफी अच्छी दिखाई पड़ रही है। इधर एशिया महाद्वीप में भारत, वियतनाम तथा कम्बोडिया एवं इंडोनेशिया जैसे देशों में भी उत्पादन सुधरने के आसार हैं।
वियतनाम से काजू का निर्यात बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। उधर यूरोपीय संघ में इसका आयात बढ़ने की सूचना मिल रही है। अफ्रीका महाद्वीप के तंजानिया एवं मोजाम्बिक जैसे देशों में काजू का बेहतर उत्पादन होने के आसार हैं।
दक्षिणी गोलार्द्ध में काजू का सीजन आरंभ हो गया है और पिछले साल के मुकाबले इस बार फसल की हालत बेहतर है।
तंजानिया में काजू का उत्पादन पिछले साल के 4.20 लाख टन से बढ़कर इस वर्ष 5 लाख टन पर पहुंच जाने की उम्मीद है। मोजाम्बिक में भी काजू का उत्पादन 15 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जहां तक उत्तरी गोलार्द्ध का सवाल है तो वहां से काजू के अधिकांश माल का निर्यात एवं उपयोग हो चुका है। इसके फलस्वरूप अब वहां कच्चे काजू (आरसीएन) की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है।
वियतनाम से प्रसंस्कृत काजू के निर्यात में जोरदार इजाफा होने से वहां प्रोसेसिंग इकाइयों में कच्चे काजू की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है।
इधर भारत में प्रसंस्कृत काजू की मांग एवं खपत में जोरदार वृद्धि देखी जा रही है। भारतीय काजू निर्यातकों को अमरीकी बाजार में वियतनाम एवं अफ्रीकी देशों से कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
अमरीका में भारतीय काजू पर 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है जबकि वियतनाम एवं अफ्रीकी देशों पर इसकी दर बहुत कम है।
वियतनाम से चीन, यूरोपीय संघ एवं मध्य, पूर्व के देशों में भी काजू की विशाल मात्रा का निर्यात हो रहा है। अमरीका में पिछली दो तिमाही से काजू का स्टॉक घट रहा है। ऊंचे सीमा शुल्क के कारण वहां काजू का आयात खर्च बढ़ गया है।
काउंटर टैरिफ के उन्मूलन के बाद अमरीका के आयातक अब काजू की खरीद के लिए वैश्विक बाजार में दोबारा सक्रिय हो सकते हैं क्योंकि अमरीका में इसकी खपत बढ़ने की उम्मीद रहेगी।
भारतीय प्रसंस्कृत काजू का फ्री ऑन बोर्ड ऑफर मूल्य एल डब्ल्यू पी किस्म के लिए 6825 डॉलर प्रति टन, एस डब्ल्यू पी के लिए 6160 डॉलर, डब्ल्यू 320 के लिए 8170 डॉलर, डब्ल्यू 450 के लिए 7455 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है।
