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30-Oct-2026 06:45 PM
नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान जीरा कीमतों में मिला-जुला व्यापार रहा। सप्ताह के शुरू में भाव घटने के पश्चात सप्ताह के अंत में भाव तेज रहे। सूत्रों का कहना है कि हालांकि हाल ही में आई कीमतों में तेजी के कारण जीरा बिजाई के पूर्वानुमानों की तुलना में वृद्धि होगी। लेकिन बिजाई गत वर्ष की तुलना में कम रहेगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में अनुमान लगाए जा रहे थे कि इस वर्ष उत्पादक केन्द्रों पर जीरे की बिजाई 35/40 प्रतिशत कम रहेगी। लेकिन गत दिनों आई कीमतों में 20/25 रुपए की तेजी के पश्चात संभावना व्यक्त की जा रही है कि बिजाई 25/30 प्रतिशत कम रहेगी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में जीरे की बिजाई का कार्य शुरू हो चुका है जबकि राजस्थान में बिजाई का कार्य आगामी महीने में शुरू होगा। इस वर्ष पानी की कमी के चलते बिजाई प्रभावित रहेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष देश में 11.18 लाख हेक्टेयर पर की गई थी जबकि वर्ष 2025 में बिजाई 11.71 लाख हेक्टेयर पर की गई थी।
अधिक मंदा नहीं
जानकार सूत्रों का कहना है कि एक तरफा तेजी के पश्चात बाजार में मुनाफावसूली बिकवाली बढ़ने की संभावना है जिस कारण से अल्पकाल के लिए भाव घट सकते हैं लेकिन अधिक नहीं। व्यापारियों का कहना है कि आगामी दिनों में भारतीय जीरे की निर्यात मांग बढ़ेगी। आगामी दिनों में रमजान की खरीद भी बाजार में आएगी। साथ ही बिजाई के पश्चात मौसम कैसा रहता है यह भी मंदा-तेजी निर्धारित करेगा। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर जीरे के भाव 225/255 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं।
स्टॉक
जानकार सूत्रों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान चीन की कमजोर मांग के कारण जीरे का निर्यात घटा है। जिस कारण से उत्पादक केन्द्रों पर स्टॉक पर्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में गुजरात में जीरे का स्टॉक 18/20 लाख बोरी का माना जा रहा है जबकि राजस्थान में स्टॉक 28/30 लाख बोरी होने के समाचार मिल रहे हैं जोकि नई फसल आने तक पर्याप्त है।
घटेगा उत्पादन
जानकार सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2027 के दौरान भी जीरे का उत्पादन घटने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन 93/94 लाख बोरी के लगाए गए थे जबकि वर्ष 2025 में उत्पादन 97/98 लाख बोरी का माना गया था। सूत्रों का मानना है कि बिजाई क्षेत्रफल में कमी आने के अलावा अल नीनो का प्रभाव भी फसल पर पड़ेगा। जिस कारण से उत्पादन भी प्रभावित होगा।
आवक
गत दिनों आई कीमतों में तेजी के कारण किसानों की बिकवाली बढ़ गई है और आवक भी बढ़ी है। प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक बढ़कर 12/13 हजार बोरी की हो गई है। राजकोट में भी आवक 1200/1300 बोरी की हो रही है। जबकि राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 2000/2500 बोरी की चल रही है। नागौर मंडी में आवक 800/1000 बोरी एवं जोधपुर 700/800 बोरी की हो रही है।
निर्यात घटा
चीन का निर्यात प्रभावित होने के कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में भारतीय जीरे का निर्यात मात्रात्मक रूप में 24 प्रतिशत घटा है जबकि निर्यात से प्राप्त आय में 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून - 2026 में जीरे का निर्यात 47916 टन का हुआ है और निर्यात से प्राप्त आय 1118.11 करोड़ की रही। अप्रैल-जून 2025 में निर्यात 62886 टन का हुआ था और निर्यात से प्राप्त आय 1514.61 करोड़ की रही। वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान जीरे का कुल निर्यात 196800 टन का रहा और प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही।