गेहूं के विशाल उत्पादन की संभावना बरकरार
11-Feb-2026 05:39 PM
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने फरवरी तथा मार्च महीने के लिए वर्षा एवं तापमान का जो अनुमान व्यक्त किया है वह गेहूं की फसल के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है। ला नीना मौसम चक्र पहले ही काफी कमजोर पड़ चुका है जिससे देश में बारिश की संभावना क्षीण पड़ती जा रही है।
कभी-कभार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता एवं बंगाल की खाड़ी में हलचल से थोड़ी-बहुत वर्षा होने की उम्मीद है लेकिन बढ़ते तापमान के बीच यह सामान्य से हल्की बारिश गेहूं की फसल को भरपूर फायदा सुनिश्चित करने में शायद सफल नहीं हो पाएगी।
अल नीनो मौसम चक्र के आने का समय अभी कम से कम 4 माह दूर है। फरवरी से जून तक मौसम न्यूट्रल रहने की संभावना है जिसका मतलब यह हुआ कि इस अवधि में न तो ला नीना का प्रकोप रहेगा और न ही अल नीनो का प्रभाव दिखाई पड़ेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की बिजाई बहुत पहले समाप्त हो चुकी है और इस बार रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 328.04 लाख हेक्टेयर से 6.13 लाख हेक्टेयर और पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर से करीब 22 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
बिजाई क्षेत्र में हुई बढ़ोत्तरी के आधार पर गेहूं का उत्पादन बढ़ने का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए फरवरी-मार्च का मौसम अनुकूल होना भी आवश्यक है।
इस बार लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं के ऐसे बीज का उपयोग किया गया है जिससे पनपे पौधों में प्रतिकूल मौसम को बर्दाश्त करने की अधिक क्षमता होती है। यदि समय-समय पर बारिश हो जाए और तपमान में जरूरत से ज्यादा इजाफा न हो तो देश में एक बार फिर गेहूं का विशाल उत्पादन हो सकता है।
फिलहाल कुल मिलाकर फसल की हालत सामान्य एवं संतोषजनक है। आगे का समय बेहद महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि गेहूं के पौधों में फूल और दाना लगने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
