गेहूं का सरकारी स्टॉक पांच साल के उच्च स्तर पर मौजूद
04-Sep-2026 05:22 PM
नई दिल्ली। हालांकि गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को प्रतिबंधित सूची से बाहर निकालकर 'मुक्त' सूची में शामिल करने के सरकार के निर्णय पर कुछ अर्थ शास्त्रियों एवं व्यापार विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अल नीनो मौसम चक्र का प्रभाव बरकरार रहने से रबी सीजन में गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है लेकिन अन्य समीक्षकों को लगता है कि सरकारी निर्णय से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि एक तो भारतीय गेहूं का निर्यात ऑफर मूल्य अन्य आपूर्तिकर्ता देशों से काफी ऊंचा है और दूसरे, सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक पिछले पांच वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर मौजूद है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा अभी तक खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत मिलर्स प्रोसेसर्स ने अपने स्टॉक से गेहूं बेचने के लिए ई-नीलामी भी आरंभ नहीं की गई है।
उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं के दाम (थोक मंडी भाव) में पिछले दिनों 150 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई जिसमें वैश्विक बाजार में भारतीय गेहूं और भी ज्यादा गैर प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। मौजूदा समय में भारतीय गेहूं का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य अन्य देशों की तुलना में कम से कम 30 डॉलर प्रति टन ऊंचा चल रहा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2025-26 के रबी सीजन में गेहूं का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़कर 1206.60 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि 2024-25 के सीजन में यह 1179.50 लाख टन रह गया था। इधर भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 अगस्त 2026 को केन्द्रीय पूल में 505.30 लाख टन गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद था जो गत 5 वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर था। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए गेहूं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा और इसका कोई अभाव महसूस नहीं होगा।
