भारत के लिए 1.50 अरब डॉलर मूल्य तक गेहूं के निर्यात का अवसर

03-Sep-2026 04:42 PM

नई दिल्ली। रिकॉर्ड उत्पादन, विशाल सरकारी स्टॉक, प्रतिस्पर्धी मूल्य तथा सरकार की उदार निर्यात नीति के सहारे भारत को गेहूं का शिपमेंट बढ़ाने का ठोस आधार मजबूत अवसर मिलने की उम्मीद है जिससे यह वैश्विक बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी छवि दोबारा बनाने में सफल हो सकता है। 

एक अग्रणी संगठन- एसोचैम का कहना है कि यदि सचिव एवं सामयिक रणनीति बनाकर उस पर गम्भीरतापूर्वक अमल   किया जाए तो भारत को 1.50 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का गेहूं विदेशों में निर्यात करने का अवसर मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में सरकार ने गेहूं एवं इसके उत्पादों के निर्यात को नियंत्रण मुक्त कर दिया है। 

एसोचैम की एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि गेहूं का निर्यात बढ़ाने हेतु भारत के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। गेहूं का वैश्विक बाजार भाव कुछ खास कारणों से ऊंचा एवं तेज होता जा रहा है। प्रतिकूल मौसम के कारण कुछ देशों में इसका उत्पादन प्रभावित होने के संकेत मिल रहे हैं जबकि इसके आयात-निर्यात में बाधा भी उत्पन्न हो गई है। रूस और यूक्रेन से गेहूं के निर्यात शिपमेंट की गति काफी धीमी पड़ गई है। 

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और खासकर फ्रांस, जर्मनी एवं स्पेन जैसे देशों में इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ने से गेहूं की फसल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। ऑस्ट्रेलिया एवं अर्जेन्टीना में गेहूं के उत्पादन में अनिश्चितता बनी हुई है।  अमरीका तथा कनाडा में भी गेहूं के उत्पादन की स्थिति उत्साहवर्धक नहीं है।

अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने गेहूं का वैश्विक उत्पादन 2025-26 के 84.40 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 2026-27 के सीजन में 81.90 करोड़ टन पर अटकने का अनुमान लगाया है जबकि इसकी मांग मजबूत रहने की संभावना व्यक्त की है। भारत में 2025-26 के सीजन में 12.10 करोड़ टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन आंका गया जबकि इसकी घरेलू खपत 11.10 करोड़ टन होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।