अगले पांच छह वर्षों में तिलहनों का उत्पादन 700 लाख टन पर पहुंचाने का प्लान

01-Apr-2025 07:48 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने तिलहन फसलों का घरेलू उत्पादन 390 लाख टन के वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 2030-31 के सीजन तक 700 लाख टन पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए 10103.38 करोड़ रुपए की धनराशि के साथ नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स- ऑयल सीड की लांचिंग की है।

सरकार को उम्मीद है कि इस मिशन के सहारे वह तिलहनों के घरेलू उत्पादन में बढ़ोत्तरी के लक्ष्य को हासिल करने में सफल हो जाएगी।

देश में तिलहनों का उत्पादन कम होने से विदेशों से अत्यन्त विशाल मात्रा में खाद्य तेलों का आयात करना पड़ता है जिस पर भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

हकीकत तो यह है कि भारत पिछले कई वर्षों से दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है। खाद्य तेलों व औसत वार्षिक आयात बढ़ाकर 150 लाख टन से ऊपर पहुंच गया है। घरेलू प्रभाग में खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति औसत सालाना खपत में भी जोरदार वृद्धि हुई है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता बढ़कर 57 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

इसका मतलब यह हुआ कि खाद्य तेलों की केवल 43 प्रतिशत घरेलू मांग एवं जरूरत ही स्वदेशी स्रोतों से पूरी होती है। हालांकि भारत में लगभग सभी किस्मों के तिलहनों एवं तेल धारक जिंसों का उत्पादन होता है मगर सोयाबीन, सरसों एवं मूंगफली को छोड़कर अन्य फसलों की पैदावार बहुत कम होती है।

सोयाबीन, सरसों एवं मूंगफली में से प्रत्येक का उत्पादन 100 लाख टन या उससे ज्यादा होता है जबकि सूरजमुखी, तिल, अलसी, नाइजरसीड एवं सैफ्लावर आदि का उत्पादन बहुत कम होता है।

अब ऑयल पाम का उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है जो अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि भारत में खाद्य तेलों के संवर्ग में सर्वाधिक आयात पाम तेल का ही होता है जिसमें क्रूड पाम तेल एवं आर बीडी पामोलीन शामिल है। अब देश में सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल जैसे सॉफ्ट खाद्य तेलों का आयात भी तेली से बढ़ रहा है। 

ऑयल सीड मिशन के तहत खासकर सरसों- रेपसीड, मूंगफली, सोयाबीन, तिल एवं सूरजमुखी का उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।

इसके अलावा द्वितीयक स्रोतों से एक्सट्रैक्शन की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाना बहुत जरुरी है।