वर्षा की कमी से आगामी रबी फसलों को बढ़ सकता है खतरा
10-Sep-2026 05:20 PM
नई दिल्ली। जून में कमजोर रहने के बाद जुलाई-अगस्त में दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी हद तक मजबूत एवं सक्रिय रहा। सितम्बर के प्रथम सप्ताह के दौरान भी देश के विभिन्न राज्यों में अच्छी वर्षा हुई लेकिन फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष अभी तक मानसून की कुल वर्षा 14 प्रतिशत कम हुई है। मौसम विभाग ने सितम्बर में भी एलपीए के मुकाबले 8-10 प्रतिशत कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। इससे न केवल खरीफ फसलों की उपज दर एवं पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है बल्कि आगामी रबी सीजन की फसलों की बिजाई एवं प्रगति भी प्रभावित होने की संभावना है। अगले महीने से इसकी बिजाई आरंभ होने वाली है।
एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी के अनुसार मानसून की कमजोर वर्षा का ज्यादा प्रतिकूल असर कपास, बाजरा, मक्का, तुवर, मूंगफली एवं सोयाबीन आदि की फसल पर पड़ने की संभावना है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई में बाधा पड़ सकती है और रबी फसलों की सिंचाई के लिए भी कम पानी उपलब्ध रहेगा।
यद्यपि मौसम विभाग ने सितम्बर में 9 प्रतिशत कम बारिश होने का अनुमान लगाया है मगर एक प्राइवेट मौसम एजेंसी ने वर्षा की कमी 20 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की है। खरीफ फसलों की बिजाई तो लगभग पूरी हो गई है लेकिन कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी से उसकी हालत संतोषजनक नहीं है। सिंचाई सुविधा का भी सीमित सहयोग मिल रहा है। सामान्य औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष खरीफ फसलों की 98 प्रतिशत बिजाई पहले ही हो चुकी है।
रबी सीजन में मुख्यतः गेहूं, चना, मसूर, मटर, जौ एवं सरसों की खेती होती है जबकि कुछ अन्य ऐसी फसलों का भी उत्पादन होता है जिसकी बिजाई खरीफ सीजन में भी की जाती है। इस बार खरीफ सीजन में धान, मूंग, मक्का, रागी, मूंगफली एवं सोयाबीन आदि का रकबा गत वर्ष से पीछे रह गया। कपास और गन्ना के क्षेत्रफल में भी गिरावट आई है। अल नीनो का खतरा अभी बरकरार है जो रबी फसलों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
