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16-Oct-2026 05:29 PM
अहमदाबाद। शुल्क मुक्त आयात की अवधि जल्दी ही समाप्त होने, मौसम एवं वर्षा की प्रतिकूल स्थिति के कारण उत्पादन में गिरावट आने की आशंका रहने और टेक्सटाइल मिलों की मांग सुधरने से रूई का घरेलू बाजार भाव तेज होने लगा है।
पिछले सप्ताह यह 3000-4000 रुपए की बढ़ोत्तरी के साथ 68,000 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) पर पहुंच गया। प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में नई कपास (बिनौला युक्त रूई) की आवक कम हो रही है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों में मानसून की बारिश कम होने तथा तापमान ऊंचा रहने से कपास की औसत उपज दर एवं क्वालिटी प्रभावित होने के संकेत मिल रहे हैं। किसानों ने कपास का स्टॉक रोकना शुरू कर दिया है क्योंकि उसे आगामी समय में इसका दाम और भी बढ़ने की उम्मीद है।
सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) भी किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीदने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उधर वैश्विक बाजार में रूई का भाव ऊंचा होने लगा है जिससे भारत में इसका आयात खर्च बढ़ सकता है। पिछले साल की तुलना में इस बार कपास का रकबा कुछ घट गया है। गुजरात और तेलंगाना में क्षेत्रफल बढ़ा है जबकि महाराष्ट्र और राजस्थान में पीछे रह गया।