त्यौहारी सीजन में खाद्य तेलों का भाव मजबूत रहने की संभावना
25-Aug-2026 03:11 PM
मुंबई। खरीफकालीन तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के लगभग बराबर हो गया है और कुछेक इलाकों को छोड़कर अधिकांश प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की हालत लगभग सामान्य बनी हुई है। विदेशों से विशाल मात्रा में खाद्य तेलों का आयात जारी है। सोयाबीन की अगैती बिजाई वाली फसल की कटाई-तैयारी आमतौर पर मध्य सितम्बर से आरम्भ हो जाती है लेकिन इस बार इसमें कुछ देर हो सकती है। मूंगफली, तिल एवं सूरजमुखी की फसल सही समय पर आएगी।
आधिकारिक आकड़ों से पता चलता है कि खरीफकालीन तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र इस बार 188.3 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 188.69 लाख हेक्टेयर से महज 32 हजार हेक्टेयर कम है। सोयाबीन का क्षेत्रफल 122.26 लाख हेक्टेयर से घटकर 121.35 लाख हेक्टेयर रह गया मगर इसकी क्षतिपूर्ति तिल से हो गयी जिसका रकबा 9.39 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.81 लाख हेक्टेयर हो गया। मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 48.22 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 48.79 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का बिजाई क्षेत्र 61 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 1.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। हालांकि अरंडी का रकबा 7.42 से घटकर 5.88 लाख हेक्टेयर रह गया है मगर वह खाद्य श्रेणी की तिलहन फसल नहीं है इसलिए खाद्य तेल बाजार पर उसका असर नहीं पड़ेगा।
रूस-यूक्रेन के बीच भयंकर युद्ध जारी रहने से सूरजमुखी तेल का आयात काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। वैसे तो अर्जेंटीना से इसका आयात जारी है लेकिन वहां इसका सीमित स्टॉक उपलब्ध रहता है। दक्षिण भारत के जो रिफाइनर्स पहले रूस-यूक्रेन से क्रूड सूरजमुखी तेल मंगाते थे वे अब अर्जेंटीना-ब्राजील से सोयाबीन तेल एवं इंडोनेशिया-मलेशिया से पाम तेल के आयात को प्राथमिकता दे रहे हैं। सूरजमुखी तेल का भाव कुछ ऊंचा रह सकता है। ओणम पर्व के कारण दक्षिण भारत में नारियल तेल का दाम भी तेज होने लगा है।
जहां तक सरसों तेल की बात है तो उत्तरी एवं पूर्वी भारत में इसका भाव ऊंचे स्तर पर मजबूत रहने की सम्भावना है। सरसों का थोक मंडी भाव 7000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है जबकि 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों 8000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बिक रही है। सरसों तेल के साथ-साथ रिफाइंड सोयाबीन तेल की कीमतों में त्यौहारी सीजन के दौरान कुछ और तेजी आ सकती है।
