तुवर-उड़द एवं मोटे अनाजों की फसल पर खतरा बरकरार
13-Jul-2026 12:39 PM
नई दिल्ली। वैसे तो दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा में अनिश्चितता का असर कमोबेश सभी खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है लेकिन तुवर (अरहर) तथा कुछ मोटे अनाजों पर इसका विशेष प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी के अनुसार इस वर्ष 8 जुलाई तक कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बारिश का भारी अभाव रहा जबकि हरियाणा में भी कम वर्षा हुई। उसके बाद बिहार-यूपी में अच्छी वर्षा हुई।
रेटिंग एजेंसी के अनुसार गन्ना के जिन उत्पादक इलाकों में सिंचाई की अच्छी सुविधा है वहां फसल ज्यादा प्रभावित नहीं होगी। इस तरह सोयाबीन एवं मूंगफली के साथ-साथ बाजरा एवं मक्का की फसल भी वर्षा के अभाव तथा शुष्क मौसम को ज्यादा समय तक झेलने में सक्षम है मगर धान, तुवर, उड़द एवं ज्वार तथा रागी की फसल पर खतरा बना रहेगा।
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक सिंचाई सुविधा की उपलब्धता और मानसूनी वर्षा की स्थिति को देखते हुए प्रतीत होता है कि कुछ फसलों के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में ज्यादा गिरावट आ सकती है जबकि अन्य फसलों की पैदावार में कम गिरावट आने की संभावना है। जुलाई की अच्छी वर्षा से खरीफ फसलों को राहत मिलने तथा इसकी बिजाई की रफ्तार कुछ तेज होने की उम्मीद है लेकिन यह बारिश सभी महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक इलाकों में नियमित अंतराल पर और समान वितरण के साथ होना आवश्यक है।
तुवर-उड़द के रकबे में सुधार आने के संकेत मिल रहे हैं। यह देखना आवश्यक होगा कि इसका बिजाई क्षेत्र पिछले साल के स्तर तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष कैसा रहता है। यदि बिजाई क्षेत्र में ज्यादा गिरावट नहीं आई तो उत्पादन भी कम घटेगा। अगस्त की वर्षा भी फसल की दशा और दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तुवर एवं उड़द का उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत की तुलना में काफी कम होता है। इसलिए भारत को प्रतिवर्ष म्यांमार, अफ्रीकी देशों एवं ब्राजील आदि से विशाल मात्रा में इसका आयात करना पड़ता है।
