कमजोर मानसून से घुलनशील उर्वरकों की मांग बढ़ने की संभावना

13-Jul-2026 01:47 PM

नई दिल्ली। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनिश्चित स्थिति से भारत में घुलनशील उर्वरकों की मांग एवं खपत बढ़ने की संभावना बन रही है मगर इसकी कीमतों में जोरदार इजाफा होने से किसानों को इसका उपयोग बढ़ाने से पूर्व कई बार सोचना पड़ सकता है। 

सोल्यूबल फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का कहना है कि चीन द्वारा निर्यात पर रोक लगाने तथा पश्चिम एशिया में संकट के कारण आपूर्ति में बाधा पड़ने से घुलनशील उर्वरकों की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान 60 से 100 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़ोत्तरी हो चुकी है। गत दो वर्षों से मोनो अमोनियम फॉस्फेट (एमएपी) का भाव 1000 डॉलर प्रति टन के करीब चल रहा था जो वर्तमान समय में बढ़कर 1500-1600 डॉलर प्रति टन हो गया है। 500-600 डॉलर का इजाफा बहुत बड़ा है। 

कीमतों में हुई इस जोरदार वृद्धि के कारण घुलनशील उर्वरकों की मांग प्रभावित होने की आशंका है। कीमतों पर नियंत्रण करना संभव नहीं है और न ही यह घरेलू उद्योग के बस की बात है क्योंकि इसका आयात बहुत महंगा बैठ रहा है।

चीन ने अनेक महत्वपूर्ण उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और पश्चिम एशिया से भी आयात में काफी कठिनाई हो रही है इसलिए भारत को रूस सहित अन्य पूर्व सोवियत गणराज्यों से उसे मंगाने की जरूरत पड़ रही है।

वहां से भी आयात सीमित मात्रा में ही संभव हो सकता है। घरेलू प्रभाग में घुलनशील उर्वरकों का उत्पादन बहुत कम होता है इसलिए विदेशों से इसके विशाल आयात की आवश्यकता बनी रहती है।