शानदार सरकारी खरीद से गेहूं के स्टॉक में भारी बढ़ोत्तरी

16-May-2026 01:50 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए इस बार गेहूं की खरीद में शानदार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है जिससे इसका स्टॉक बढ़कर न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा से काफी ऊपर पहुंच गया है। वैसे इस बार हल्की क्वालिटी के बदरंग एवं चमकहीन तथा टूटे-चिपटे दाने वाले गेहूं की खरीद अधिक हुई है। पिछले साल सम्पूर्ण रबी मार्केटिंग सीजन (अप्रैल-जून- 2025) के दौरान करीब 302 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी जबकि चालू वर्ष में 13 मई 2026 तक कुल खरीद बढ़कर 306 लाख टन से ऊपर पहुंच गई। कुछ महत्वपूर्ण राज्यों में खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।

पिछले साल की तुलना में इस वर्ष केन्द्रीय पूल के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं बिहार में गेहूं की सरकारी खरीद में अच्छी वृद्धि हुई है और मध्य प्रदेश में भी खरीद की मात्रा गत वर्ष के काफी करीब पहुंच गई है। इस बार सरकार ने कुल 345 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य नियत किया है जिसका 89 प्रतिशत भाग हासिल हो चुका है। पिछले साल 13 मई तक 292.60 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जबकि इस बार उससे 13.52 लाख टन अधिक की खरीद हुई है। 

इस बार मुख्यतः दो कारणों से गेहूं की सरकारी खरीद में इजाफा हुआ है। एक तो पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में मौसमी कारणों से गेहूं की क्वालिटी खराब हो गई और किसानों ने स्टॉक रोकने के बजाए सरकारी क्रय केन्द्रों पर उसे बेचना ज्यादा लाभदायक समझा / वहां किसानों को 2585 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो रहा था।

दूसरी बात यह है कि इस बार मिलर्स / प्रोसेसर्स एवं व्यापारी / स्टॉकिस्ट किसानों से गेहूं की जोरदार खरीद नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्हें आगे सरकारी सख्ती की आशंका सता रही है। पिछले साल उसने ऊंचे दाम पर गेहूं खरीदा मगर सरकार ने स्टॉक लिमिट लागू करके उसे नीचे भाव पर अपने स्टॉक को बेचने पर विवश कर दिया। गेहूं के निर्यातक भी फिलहाल ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। आगे उनकी सक्रियता बढ़ सकती है।