पंजाब में मात्र 40 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती
16-May-2026 12:34 PM
भटिंडा। पंजाब में कपास की अगैती खेती होती ही जिसका आदर्श समय 20 अप्रैल से 15 मई तक माना जाता है। पिछले दिन आदर्श समय समाप्त होने के बाद जो आंकड़ा सामने आया है वह बेहद निराशाजनक है।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में इस वर्ष कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र महज 40,402 हेक्टेयर पर पहुंच सका जो नियत लक्ष्य 1.25 लाख हेक्टेयर का मात्र 32 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य में कपास की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बहुत घट गया है।
वैसे पंजाब में आदर्श समय के बाद भी कपास की बिजाई होती है जो कमोबेश मई के अंत और कभी-कभी जून के प्रथम सप्ताह तक जारी रहती है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 20 मई के बाद होने वाली बिजाई की फसल को आगे प्रतिकूल मौसम एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप का गंभीर खतरा रहता है और उसकी उपज दर काफी घट जाती है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रतीत होता है कि लेट बिजाई के बावजूद पंजाब में कपास का कुल रकबा निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह जाएगा।
कृषि विभाग के अनुसार इस बार गेहूं फसल की कटाई-तैयारी देर से शुरू होने के कारण कपास की बिजाई में विलम्ब हो गया मगर विभाग को अब भी उम्मीद है कि मई के अंत तक इसका कुल क्षेत्रफल नियत लक्ष्य के आसपास पहुंच सकता है। इस वर्ष देसी या परम्परागत किस्मों की कपास का बिजाई क्षेत्र भी 10 हजार हेक्टेयर के करीब पहुंचने की संभावना है।
पंजाब में 2024-25 के सीजन में फसल का कुल उत्पादन क्षेत्र पहली बार एक लाख हेक्टेयर से घटकर 99,700 हेक्टेयर पर आया था मगर 2025-26 के सीजन में सुधरकर 1.19 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इस बार स्थिति ज्यादा खराब लगती है।
