सरसों तेल की मांग, खपत एवं कीमत में वृद्धि के संकेत
08-May-2026 06:00 PM
नई दिल्ली। कुछ विशेष कारणों से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पाम तेल एवं सोयाबीन तेल का भाव ऊंचा एवं तेज हो गया है जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखा जा रहा है। भारतीय उपभोक्ता अब महंगे आयातित खाद्य तेलों के बजाए स्वदेशी खाद्य तेल और खासकर सरसों तेल के उपयोग को प्राथमिकता देने लगे हैं जिससे इसकी मांग, खपत एवं कीमत में बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं।
इस बदलते परिदृश्य का अपना खास महत्व है। संभवतः पहली बार सरसों तेल का भाव विदेशों से आयातित खाद्य तेलों की प्रतिस्पर्धा में खड़ा हो गया है। पाम तेल का दाम तेजी से बढ़ रहा है और सोयाबीन तेल का आयात भी महंगा बैठ रहा है क्योंकि एक तो वैश्विक बाजार में इसकी आपूर्ति की स्थिति जटिल है और दूसरे, डॉलर की तुलना में रुपया का भारी अवमूल्यन हो चुका है। इसके फलस्वरूप घरेलू तेल के प्रति उपभोक्ताओं का आकर्षण बढ़ गया है। यदि स्थिति निकट भविष्य में कायम रह सकती है।
स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि विभिन्न उत्पादक देशों में बायोडीजल निर्माण में खाद्य तेलों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है जबकि पश्चिम एशिया में संकट के कारण सोया तेल एवं सूरजमुखी तेल का दाम ऊंचा हो गया। मोटे अनुमान के अनुसार मार्च-अप्रैल 2026 के दो महीनों में गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले सरसों तेल की घरेलू बिक्री में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हो गई।
इस बार सरसों का शानदार उत्पादन हुआ और क्रशिंग- प्रोसेसिंग इकाइयों को इसकी समुचित आपूर्ति भी हो रही है। सरसों का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊंचा होने के कारण किसान अपने स्टॉक की बिक्री करने में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सरसों तेल की मांग एवं कीमत ऊंची रहने से मिलर्स- प्रोसेसर्स सरसों की भारी खरीद करने से नहीं हिचक रहे हैं।
भारतीय उपभोक्ताओं का घरेलू खाद्य तेलों की ओर बढ़ता झुकाव एक महत्वपूर्ण घटना है और इससे किसानों को खासकर सरसों का उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिल सकता है। सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल तथा बिनौला तेल की कीमतों में भी तेजी-मजबूती देखी जा रही है।
