सरकार को खरीफ फसलों पर अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं

20-Aug-2026 03:14 PM

नई दिल्ली। हालांकि गत वर्ष की तुलना में इस बार खरीफ फसलों का रकबा करीब 21 लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है मगर 1100 लाख हेक्टेयर के सामान्य औसत क्षेत्रफल को देखते हुए यह गिरावट मामूली प्रतीत होती है। इसमें से ज्यादा हिस्सेदारी धान, तुवर, मूंग एवं मक्का की है। सोयाबीन का क्षेत्रफल भी पीछे है। 

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व यूरोपीय जलवायु पूवार्नुमान ब्यूरो ने कहा था कि आगामी समय के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून पर अल नीनो का प्रभाव बढ़ जाएगा। लेकिन केन्द्रीय कृषि मंत्री को आशा है कि खरीफ उत्पादन पर अल नीनो का कोई उल्लेखनीय असर नहीं पड़ेगा। देश के अधिकांश भाग में बिजाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और फसल की प्रगति भी सामान्य ढंग से हो रही है। देश के कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हुई है लेकिन फिर भी खरीफ फसलों के बिजाई क्षेत्र में अंतर लगातार घटता जा रहा है।

कृषि मंत्री के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रदर्शन बेहतर होने से देश में वर्षा के संभावित संकट ग्रस्त जिलों की संख्या 262 से घटकर 100 के करीब रह गई है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति सामान्य नहीं है मगर अन्य अधिकांश इलाकों में हालात अच्छे नजर आ रहे हैं। वहां फसलों की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त बारिश हुई है। परिस्थिति रोजाना बदल रही है इसलिए कृषि मंत्रालय हालात की नियमित समीक्षा कर रहा है। 

कृषि मंत्री के मुताबिक कर्नाटक एवं तेलंगाना को पानी के अभाव का सामना करना पड़ रहा है लेकिन फिर भी वहां कुल मिलाकर खरीफ फसलों की अच्छी बिजाई हुई है। जहां वर्षा कम हुई है वहां फसलों की उपज दर में कमी आ सकती है। आगे वर्षा की हालत पर गहरी नजर बनी रहेगी। बीज विधेयक और कीटनाशी प्रबंधन विधेयक तैयार कर लिया गया है  जिसे संसद के अगले सत्र में पेश किया जाएगा। इससे कृषि क्षेत्र की उन्नति में सहायता मिलेगी।