साप्ताहिक समीक्षा- हल्दी
27-Jun-2026 08:08 PM
हल्दी कीमतों में मंदे की संभावना नहीं : बारिश की कमी से बिजाई में विलम्ब
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में हालांकि हल्दी की बिजाई का कार्य शुरू हो चुका है लेकिन बारिश की की के चलते बिजाई में आशानुरूप प्रगति नहीं देखी गई। सूत्रों का कहना है कि ट्यूबवैल आधारित क्षेत्रों में बिजाई हुई है लेकिन वर्षा आधारित क्षेत्रों में अभी तक बिजाई का कार्य शुरू नहीं हुआ है। आमतौर पर जून माह के दौरान बिजाई का कार्य प्रगति पर होता है लेकिन इस वर्ष अभी तक पानी की कमी के चलते बिजाई में विलम्ब हो रहा है। साथ ही अगर जल्द उत्पादक राज्यों में बारिश नहीं होती है तो बिजाई क्षेत्रफल में भी कमी आ सकती है। व्यापारियों का कहना है कि अलनीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष बारिश की कमी बनी रहेगी। जिस कारण बिजाई के पश्चात भी फसल को पानी की कमी रहने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। जिससे फसल प्रभावित होगी।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष देश में हल्दी की बिजाई का क्षेत्रफल 30/35 प्रतिशत बढ़ा था लेकिन बिजाई के पश्चात प्रतिकूल मौसम के चलते फसल को नुकसान हुआ था। जिस कारण से बिजाई के अनुरूप पैदावार नहीं हुई और उत्पादन 80/85 लाख बोरी तक सिमट गया जबकि अधिक बिजाई के कारण पूर्व में अनुमान लगाया जा रहा था कि पैदावार 90/95 लाख बोरी की रहेगी।
मिल रही जानकारी के अनुसार इरोड लाइन पर हल्दी की बिजाई संतोषजनक रहने के अनुमान है जबकि निजामाबाद एवं महाराष्ट्र में बिजाई प्रभावित होने की आशंका है। आगामी दिनों में पर्याप्त बारिश होने के पश्चात जुलाई माह में बिजाई का कार्य जोरों पर होगा।
आवक कम
कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आवक के कारण मंडियों में हल्दी की आवक कम रह गई है। निजामाबाद मंडी में आवक घटकर 2000/2500 बोरी एवं इरोड 4000/4500 बोरी की रह गई है। जबकि सांगली में सप्ताह में आवक 10/11 हजार बोरी की चल रही है। मराठवाड़ा लाइन पर भी दैनिक आवक 9/10 बोरी की रह गई है। सूत्रों का कहना है कि मराठवाड़ा को छोड़कर अन्य उत्पादक राज्यों की मंडियों में कुल उत्पादन का 75/80 प्रतिशत माल आ चुका है। जबकि मराठवाड़ा लाइन पर अभी भी किसानों के पास 50 प्रतिशत माल बकाया है जोकि मजबूत हाथों में है। किसान भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
मन्दा नहीं
जानकार सूत्रों का कहना है कि हालांकि वर्तमान में हल्दी के भाव गत वर्ष की तुलना में लगभग 8/10 रुपए प्रति किलो ऊंचे चल रहे हैं लेकिन उत्पादक केन्द्रों पर स्टॉक की कमी के चलते वर्तमान मंडी में मंदा संभव नहीं है। वर्तमान में दिल्ली बाजार में हल्दी सिंगल पॉलिश गट्ठा के भाव 152/154 रुपए प्रति किलो बोले जा रहे हैं जबकि गत वर्ष इसी समयावधि में भाव 143/144 रुपए बोला जा रहा था। सूत्रों का मानना है कि आगामी दिनों में निर्यात मांग बढ़ने पर कीमतों में अवश्य ही तेजी आएगी। क्योंकि खपत की तुलना में स्टॉक कम है साथ ही मौसम भी बिजाई के प्रतिकूल चल रहा है। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों सहित खपत केन्द्रों पर भी हल्दी का स्टॉक 42/45 लाख बोरी के आसपास है जबकि नई फसल आने में अभी लगभग 7/8 माह का समय शेष है।
निर्यात
मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान हल्दी का निर्यात 175896 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 2887.18 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान निर्यात 176325 टन का किया गया था और निर्यात से प्राप्त आय 2885.39 करोड़ बोरी की रही थी वर्ष 2020-21 के दौरान हल्दी का रिकॉर्ड निर्यात 183868 टन का हुआ था।
