पश्चिम बंगाल के चावल उद्योग द्वारा नई सरकार से राहत देने का आग्रह
19-May-2026 08:44 PM
कोलकाता। देश के सबसे प्रमुख धान-चावल उत्पादक राज्य-पश्चिम बंगाल के चावल उद्योग द्वारा नई प्रांतीय सरकार से राज्य में बुनियादी ढांचागत प्रावधानों का विकास-विस्तार करने, नई योजनाओं एवं नीतियों को तेज गति से स्वीकृति देने तथा निर्यात संवर्धन के लिए माहौल अनुकूल बनाने का आग्रह किया है। मिलर्स एवं निर्यातकों का कहना है कि चावल उद्योग के विकास तथा इसमें निवेश के लिए सरकार का नीतिगत सहयोग- समर्थन एवं प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार चावल मिलों तथा वेयर हाउसों (गोदामों) के लिए बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की जरूरत है और खासकर ग्रामीण इलाकों में इसका अभाव देखा जा रहा है। वहां सड़कों एवं नालियों (पानी निकासी) की हालत खराब है और बिजली का कनेक्शन भी देर से मिलता है। इससे व्यापारियों एवं मिलर्स को अपनी कारोबारी गतिविधियों के संचालन में भारी कठिनाई होती है।
एक विश्लेषक का कहना है कि अनेक ग्रामीण जिलों में नई चावल मिलों को बिजली का कनेक्शन हासिल करने में कई महीनों का समय लग जाता है। वहां परियोजना का खर्च भी काफी ऊंचा रहता है और उद्यमियों का शोषण- उत्पीड़न किया जाता है।
उद्योग को नई सरकार से काफी उम्मीदें है कि वह त्वरित सेवा प्रदान करेगी और बुनियादी सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए सही रणनीति अपनाएगी। बंगाल का चावल उद्योग काफी बड़ा है।
राज्य में आधुनिक तकनीक एवं बेहतर सुविधा वाले भंडार गृहों का निर्माण होना तथा यातायात के साधनों के लिए कदम उठाया जाना जरुरी है। जर्जर एवं खस्ता हाल सड़कों का पुनर्निर्माण किए जाने की आवश्यकता है।
भारत में चावल का कुल वार्षिक उत्पादन 15 करोड़ टन से ऊपर पहुंच गया है जबकि केन्द्रीय पूल में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का स्टॉक भी 590 लाख टन से ज्यादा है। भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यात देश बना हुआ है।
